ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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बुधवार, 16 नवंबर 2011

.. श्रीदुर्गासप्तश्लोकी ..

.. श्रीदुर्गासप्तश्लोकी ..

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य
नारायण ऋषिः . अनुष्टुपादीनि छन्दांसि .
श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः .
श्री जगदम्बाप्रीत्यर्थे पाठे विनियोगः ..

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा  .
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति  .. १..

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
        स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि  .
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
        सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता  .. २..

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके  .
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते  .. ३..

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे  .
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते  .. ४..

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते  .
भयेभ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते  .. ५..

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्  .
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति  .. ६..

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि  .
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम्  .. ७..

          .. इति दुर्गासप्तश्लोकी ..

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