ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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गुरुवार, 30 मई 2013

क्या अब समय आ गया है युद्ध की रणभेरी बजाने की..?? पं.विनोद चौबे

क्या अब समय आ गया है युद्ध की रणभेरी बजाने की..??

छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों हुए नक्सली हमले ने एक बार फिर पुरे देश को दहला दिया है। ऐसे में क्या वक्त आ गया है सीधी लड़ाई का, हालाकि जिनसे लड़ने की बात हो रही है वे किसी अन्य देश के नहीं वरन् अपने ही देश के लोग हैं, लेकिन भारतीय लोकतंत्र में बिश्वास न करने वाले इन लोगों पर कठोर कार्यवाही करने का वक्त आ गया है ?
पहले ,साम, दाम, भेद आदि चारों नीतियों का प्रयोग करना चाहिए। इन चारों की असफलता के बाद युद्ध की तत्क्षण घोषणा कर आर-पार की लड़ाई लड़नी चाहिए। क्योंकि कुछ इसी प्रकार का वाकया आज के तकरीबन डेड़ लाख वर्ष पूर्व अयोध्या के राजकुमार भगवान श्रीराम के सामने आयी थी..उन्होंने सर्वप्रथम इन चार नीतियों का प्रयोग किया और इन नीतियों के सफल न होनें पर उन्होंने फौरी तौर पर युद्ध की घोंषणा कर दी, बावजूद एक बार पुनः रावण को मित्रता का पैगाम लेकर अंगद को भेजा परन्तु वह भी असफल रहा और 84 दिन का भयंकर युद्ध करना पड़ा साथ ही आतंक का पर्याय बन चुका तानाशाह शासक रावण का अन्त हुआ। उसी प्रकार अब वक्त आ गया है, इन लोगों पर कठोर कार्यवाही करने की। पंचतन्त्र के अनुसार ''प्रागेव विग्रहो न विधिः'' । पहले ही ( बिना साम, दान , दण्ड का सहारा लिये ही ) युद्ध करना कोई (अच्छा) तरीका नहीं है ।
परन्तु..'दसकुमारचरित' में कहा गया है कि एक राज्य अथवा देश की शक्ति क्या है, और उसकी कितनी आवश्यकता है। निश्चित ही राज्य तीन शक्तियों के अधीन है । शक्तियाँ मंत्र , प्रभाव और उत्साह हैं जो एक दूसरे से लाभान्वित होकर कर्तव्यों के क्षेत्र में प्रगति करती हैं । मंत्र ( योजना , परामर्श ) से कार्य का ठीक निर्धारण होता है , प्रभाव ( राजोचित शक्ति , तेज ) से कार्य का आरम्भ होता है और उत्साह ( उद्यम ) से कार्य सिद्ध होता है । ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे , संपादक- ज्योतिष का सूर्य, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, भिलाई-09827198828

सोमवार, 27 मई 2013

कहीं यह भारत में ’तहरिके तालीबान’की धमक तो नहीं ?

  संपादकीय

कहीं यह भारत में ’तहरिके तालीबान’की धमक तो नहीं ?


- संपादक- ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे, भिलाई

Pandit Vinod Choubey

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अब तो हद हो गई...जिस राष्टÑगान को मौलाना अब्दुल कलाम जैसे महान विद्वान ने भी अपनी स्वीकृति दी...जिस वन्दे मातरम् को बोलते हुए देश के असंख्य शहीदों ने अपनी हंसते हंसते जान गंवा दी, उस वन्दे मातरम् के विरोधी बसपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क पर देशद्रोह का मुकद्दमा नहीं चलाया जाना चाहिए...?

यह तो देश के अस्मिता का सवाल था जहाँ देश पहले है, बाद में मजहब। जिस देश में हिन्दू, मुश्लिम, सिक्ख, ईसाई। आपस में हैं भाई भाई।। उस देश में ऐसे देश द्रोहियों की क्या आवश्यकता है। जो हालात आज पाकिस्तान में तहरिके तालीबान की है, वही हालात ऐसे छद्म विचारों वाले शफीकुर्रहमान बर्क के भांति विचारक भारत में अशांति फैलाने और आतंकी संगठनों की गोद में सदा सदा के लिए सुला देने का कुत्सित प्रयास है।
8 मई 2013 को देश की सबसे बडी पंचायत अर्थात् लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से पहले सदन में ‘वंदेमातरम्’ की धुन बजायी गई. धुन बजने के दौरान संभल से बहुजन समाजवादी पार्टी के माननीय सांसद श्री शफीकुर्रहमान बर्क सदन से उठकर बाहर चले जाते है. लोकसभा अध्यक्षा मीरा कुमार बसपा सांसद के इस कदम पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और उन्हें भविष्य में ऐसा नहीं करने की सख्त चेतावनी दी।
बसपा सांसद द्वारा उठाये गये इस अपमानजनक कदम पर कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद एवं भाजपा नेता सहनवाज़ हुसैन ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। 4 नवंबर 2009 को देवबंद मे उलेमाओ ने वंदेमातरम् न गाने का एक प्रस्ताव पारित किया था. जिस पर राष्टÑवादी विचारधारा के लोगो ने कड़ी आपत्ति जताई थी. लेकिन शफीकुर्रहमान बर्क ने देश से माफी मांगने की बजाय अपनी हेकड़ी जमाते हुए कहा, ‘यह हमारे धर्म के खिलाफ है,इसलिए अगर भविष्य में भी ऐसी स्थिति आई तो मैं वही करूंगा, जो आज किया है.’ ज्ञात हो कि1866 के ओडिशा के अकाल को देखकर चिंतित हुए बंकिम चन्द्र ने एक उपन्यास लिखना प्रारंभ किया और 1882 मे उन्होने ‘वंदेमातरम्’ को अपने उपन्यास ‘आनन्द मठ’ मे शामिल कर लिया. कालांतर मे महर्षि अरविन्द ने वंदेमातरम् को नये-मंत्र की संज्ञा दी. यह पवित्र मंत्र ‘वंदेमातरम्’ कोलकाता मे भारतीय कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन मे पहली बार गाया गया. 28 दिसंबर, 1896 को कांग्रेस के अधिवेशन मे श्री रविन्द्रनाथ ठाकुर ने स्वयं ही वंदेमातरम् को संगीतबद्ध कर दिया, और उसी अधिवेशन मे वंदेमातरम् को हर अधिवेशन गाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. 1905 मे बंग-भंग के आन्दोलन मे वंदेमातरम् नामक इस मंत्र का ऐसा जादू चला कि इसके उद्घोष ने ब्रिटिश सरकार की चूले हिला दी.
14 अगस्त 1947 को भारतीय संविधान द्वारा वंदेमातरम् को राष्टÑीय गीत का दर्जा दिया गया. उसी राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा करने की शपथ लेने के बावजूद उनके इस अपमानजनक कृत्य से क्या यह मान लिया जाय कि इन्होने विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा की झूठी कसम खायी थी, क्योंकि इन्होने अपने इस दंभ के चलते देश की जनता को और उन महान हुतात्माओ को जिन्होने देश को स्वतंत्र कराने हेतु अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, को भी लजा दिया. या कहीं यह भारत में तहिरके तालीबान की धमक तो नहीं..?

''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका का 46 वाँ अंक जून 2013, संपादक- ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे, भिलाई

शनिवार, 25 मई 2013

ज्योतिष सम्मेलन हेतु विशेष सूचना।

ज्योतिष सम्मेलन हेतु विशेष सूचना।

ज्योतिषी एवं वास्तुविद मित्रों से अनुरोध है कि ''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के चतुर्थ वर्षगांठ के अवसर पर 25 अगस्त 2013 को छ्तीसगढ़ के जिला दुर्ग में स्थित भिलाई में में ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन करने जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में ज्योतिष एवं वास्तु से जुड़े तमाम बिन्दूओं पर संगोष्ठी के साथ ही वरिष्ठ ज्योतिषियों द्वारा प्रतिभावान ज्योतिषियों को गोल्ड मेडल, महर्षि पाराशर अलंकरण, महर्षि आर्यभट्ट अलंकरण एवं वास्तु पुरुष अलंकरणों से अलंकृत किया जायेगा। इस सम्मेलन में भाग लेने के पूर्व आप समपूर्ण बायोडाटा, 4 पासपोर्ट साईज फोटो एवं पत्राचार का पूर्ण पता मय फोन, मोबाईल नं. के साथ हमें इस पते भेजें-

''ज्योतिष का सूर्य'' प्रधान कार्यालय,
संपादक- ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे,
जीवन ज्योतिष भवन, सड़क-26, कोहका मेन रोड,
शांतिनगर, भिलाई, जिला-दुर्ग (छ.ग.) 490023,
मोबा.नं.09827198828,
मेल आईडी- jyotishkasurya@gmail.com

सूचना@ पत्र प्राप्त होने के बाद आपको आपके द्वारा प्रेषित पते पर कार्यक्रम की सम्पूर्ण जानकारी एवं पहुँच मार्ग अथवा अन्य जानकारियाँ आपके पते पर भेज दिया जायेगा।

शनिवार, 11 मई 2013

छत्तीसगढ़ में 'अक्ती' और पूरे देश में अक्षय तृतीया..

Pt.Vinod choubey
मित्रों, नमस्कार सर्वप्रथम अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर आप सभी को ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...।
छत्तीसगढ़ में 'अक्ती' के नाम से प्रचलित अक्षय तृतीया को लेकर पूरे राज्य में तैयारी चल रही है. लगभग 28 वर्षों बाद अद्भुत संयोग के साथ आ रही हैं.अक्षय तृतीया  13 मई को मनाई जाएगी. अक्षय तृतीया पर्व पर इस बार शनि 28 साल बाद अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे. भक्तों के लिए यह संयोग विशेष फलदायी होगा. भगवान परशुराम जयंती पर्व 12  मई को इसे मनाया जायेगा।

विशेष संयोग: सूर्य अपनी उच्च राशि में
अक्षय तृतीया इस बार विशेष संयोगों के साथ आ रही है. पर्व पर जहां एक ओर सूर्य देव अपनी उच्च राशि 'मेष' और चंद्र देव अपनी उच्च राशि 'वृषभ' में गोचर करेंगे, वहीं न्याय के देवता भगवान शनि भी अपनी उच्च राशि 'तुला' में गोचर करेंगे.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 28 साल बाद अक्षय तृतीया पर शनि देव का गोचर हो रहा है. इस संयोग से भक्तों को हर क्षेत्र में सकारात्मक फल की प्राप्ति होगी. ज्योतिष
के अनुसार इस अवसर पर शनि साढ़े साती से पीड़ित जातक भगवान शनि की विधिवत आराधना, हवन-अनुष्ठान कर इस दोष से छुटकारा पा सकेंगे.

आईए अब इस पावन पर्व पर भगवान परशुराम की स्तृति परक यह स्तोत्र का पाठ कर आत्मसात करने का प्रयास करें ताकि हमारे जीवन में शौर्य ऊर्जा का संचार हो।
परशुरामाष्टाविंशतिनामस्तोत्रं
ऋषिरुवाच-

यमाहुर्वासुदेवांशं हैहयानां कुलान्तकम्‌।

त्रिःसप्तकृत्वो य इमां चक्रे निःक्षत्रियां महीम्‌॥1॥

दुष्टं क्षत्रं भुवो भारमब्रह्मण्यमनीनशत्‌।

तस्य नामानि पुण्यानि वच्मि ते पुरुषर्षभ॥2॥

भू-भार-हरणार्थाय माया-मानुष-विग्रहः।

जनार्दनांशसम्भूतः स्थित्युत्पत्तयप्ययेश्वरः॥3॥

भार्गवो जामदग्न्यश्च पित्राज्ञापरिपालकः।

मातृप्राणप्रदो धीमान्‌ क्षत्रियान्तकरः प्रभु॥4॥

रामः परशुहस्तश्च कार्तवीर्यमदापह।

रेणुकादुःखशोकघ्नो विशोकः शोकनाशन॥5॥

नवीन-नीरद-श्यामो रक्तोत्पलविलोचनः।

घोरो दण्डधरो धीरो ब्रह्मण्यो ब्राह्मणप्रियस॥6॥

तपोधनो महेन्द्रादौ न्यस्तदण्डः प्रणान्तधीः।

उपगीयमानचरित-सिद्ध-गन्धर्व-चारणै॥7॥

जन्म-मृत्यु-जरा-व्याधि दुःख शोक-भयातिग।

इत्यष्टाविंशतिर्नाम्नामुक्ता स्तोत्रात्मिका शुभा॥8॥

अनया प्रीयतां देवो जामदग्न्यो महेश्वरः।

नेदं स्तोत्रमशान्ताय नादान्तायातपस्विने॥9॥

नावेदविदुषे वाच्यमशिष्याय खलाय च।

नासूयकायानृजवे न चाऽनिर्दिष्टकारिणे॥10॥

इदं प्रियाय पुत्राय शिष्यायानुगताय च।

रहस्यधर्मं वक्तव्यं नाऽन्यस्मै तु कदाचन॥11॥

॥ इति परशुरामाष्टाविंशतिनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ ॥

ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे, संपादक ज्योतिष का सूर्य, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, भिलाई-9827198828
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