ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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रविवार, 30 मार्च 2014

स्वागत है नव सम्वत् 2071 का....राजा एवं मंत्री चन्द्र और वित्तमंत्री मंगल

मित्रों, आप सभीको नूतन हिन्दू नववर्ष 2071 (प्लवंग) सम्वत् की हार्दिक शुभकामनाएँ....माँ शक्ति आपको पूरे वर्ष खुशियाँ देती रहें....ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै - 

राजा एवं मंत्री चन्द्र और वित्तमंत्री मंगल

विक्रम संवत 2070 'पराभव' 30 मार्च को समाप्त होगा। नववर्ष 30 और 31 मार्च की रात 12.14 बजे लगेगा। गुरु सप्तम भाव में रहेगा। मीन लग्न और मीन राशि में नवसंवत्सर का प्रवेश हो रहा है। व्यापारी और किसानों को जून के बाद शुभ समाचार मिलेंगे। शुक्र कुंभ राशि और सूर्य रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इसके चलते महंगाई बढ़ने से जनता में असंतोष के योग बन रहे हैं। चंद्र के राजा और मंत्री होने से शासक वर्ग नैतिकता पूर्ण कार्य करेगा। सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूती आएगी। धान्येश मंगल होने से महंगाई बढ़ सकती है। मेघेश सूर्य हैं, इसलिए इस वर्ष वर्षा में कुछ कमी रहेगी

मंगलवार, 18 मार्च 2014

..........काहें कि नरेन्द्र मोदी के सम्हने उऽऽ(केजरीवाल) न टिक पईंहऽऽ....

दशाश्वमेध घाट के मान मंदिर के पान ठेला पर संवाद चल रहा था (वाराणसी)

 काहें कि नरेन्द्र मोदी के सम्हने उऽऽ(केजरीवाल) न टिक पईंहऽऽ....

गुंजन महाराज जीतू सरदार से कहलन की - का गुरु आजकल नरेन्दर मोदी क जब से नाम बनारस से चुनाव लड़ले क आयेल ह तबसे सब्बो टीबी वाला इहां आवत हउवँ..

जीतू सरदार- हाँ, गुरु नरेन्दर मोदी कै हम देखली अईसन भाषन देहेलस की हम्मे लगल की जरुर महादेव एकरे कपारे पर सवार हो गयेल हउवँ...नरेन्दर मोदी बदे ही इहाँ सब टीबी वाला लाईव देखावत हउवँ।

गुंजन महाराज - का जीतू , ईइइ...केजरीवाल कवन हऽऽव गुरु , इहैँ तऽऽ लंगोट पक्का पहलवानन् क जरुरत हऽऽव, सुनत हईंऽऽ वोहू इहाँ से चुनाव लड़े बदे आवत हौंऽऽव..।

जीतू सरदार - हाँ, गुरु, घाट पर सुबैहैये आखाड़ा में दण्ड पेलत रहलीं तऽऽ लईकन मन कहत हौंव, ईऽऽ केजरीवाल कहीं नौकरी करत रहल, अब राजनीति में आऽऽ के फँस गयेल हऽऽव।
अऽऽऊर बनारस में ठण्डई पीये बदे आऽऽवत हऽऽव ,  गौदवलिया वाले गामा पान वाले क एक ठे बीड़ा खाके मन-मन्साईन करे के बाद रफू चक्कर हो जाही..

गुंजन महाराज- जीतू, तोहें एक काम करेके पड़ी ..एक दिन केजरीवाल के अखाड़ा पर ले जाके उन्हें धोबिया पाठ सिखावे के पड़ी, काहें कि नरेन्द्र मोदी के सम्हने उऽऽ न टिक पईंहऽऽ।

अब थोड़ा इधर भी........
ईऽऽ टबलेट आदरणीय चकाचक बनारसी जी क हऽऽव...खाँसी माकूल दवाई खाऽऽल...राजा..................................................................................
चेत गइल जनता त बोलऽ हे मंत्री जी फिर का करबऽ ।

दरे दरे गोड़ धरिया कइलऽ दाँत निपोरत रहलऽ मालिक,
भिखमंगई, चन्दा व्यौरा पर सच्चा जीयत रहलऽ मालिक,
कांगरेसी तू रहलऽ नाहीं झटके में बन गइलऽ मालिक,
बाप दादा भीख मंगलन, तू एम०एल०ए० हो गइलऽ मालिक,
कुर्सी निकल गइल त बोलऽ फिर केकर तू चीलम भरबऽ ॥१॥

सत्ता में अउतै तू मालिक दिव्य डुबइलऽ देश कऽ लोटिया,
दरे दरे उदघाटन कइलऽ पेड़ लगउलऽ रखलऽ पटिया,
घूसो लेहलऽ टैक्स बढ़इलऽ सबै काम तू कइलऽ घटिया,
आज देश कंगाल हो गयल, कइलऽ खड़ी देश कऽ खटिया,
खूँटा में बँधलेस जनता त कइसे खेत देस क चरबऽ ॥।२॥

पाँच बरस अस्वासस्न छोड़ के जनता के कुछ देहलऽ नाहीं,
अउर तू का देतऽ जनता के रासन तक त देहलऽ नाहीं,
सेतै देहलऽ परमिट, कोटा, लाइसेंस का लेहलऽ नाहीं ?
सच बोले का खानदान के सरकारी पद देहलऽ नाहीं ?
यदि हिसाब लेहलेस जनता त फिर केकर सोहरइबऽ धरबऽ ॥३॥

वादा पर वादा कइलऽ पर वादा पूरा कइलऽ नाहीं,
बेइमानन क साथ निभइलऽ बेइमानन के धइलऽ नाहीं,
हौ सेवा करतब हमार का भाषन में तू कहलऽ नाहीं ?
बोलऽ बे मतलब तू का दौरा पर दौरा कइलऽ नाहीं ?
मर के तू शैतानै होबऽ मरले पर तू नाहीं मरबऽ ॥४॥

जनता के भूखा मरलऽ पर हचक हचक के खइलऽ सच्चा,
कभी बाजरा कांड, कभी लाइसेंस कांड तू कइलऽ सच्चा,
तू चुनाव के जीतै खातिर तस्करवन के धइलऽ सच्चा,
सबके धर के लोकतंत्र खतरे में हौ समझउलऽ सच्चा,
सोझे संसद भंग न होई सोझे तू सब नाहीं टरबऽ ॥५॥

सोचत होबऽ अपने मन में की सब जूता नाप क हउवै,
सोचत होबऽ अपने मन में की मंत्री पद टाप क हउवै,
तनिको नाहीं सोचत होबऽ की ई कुल धन पाप क हउवै,
छोड़तऽ काहे नाहीं कुर्सी का ऊ तोहरे बाप क हउवै,
कइले चालऽ पाप एकजाई यही जनम में सब कुछ भरबऽ ॥६॥

सब कुछ छोड़बऽ सीधे-सीधे तोप चली न चली तमंचा,
जाग रहल हौ देस चकाचक रोजै होई खमची खमचा,
गिनवाई जौने दिन जनता दिव्य लगइबऽ ओ दिन खोमचा,
निश्चित भुक्खन मर जइहैं ओ दिन तोहार कुल चमची चमचा,
पाँच बरस तू रह गइलऽ त अबकी मालिक देश के गरबऽ ॥७॥

--चकाचक बनारसी

रविवार, 16 मार्च 2014

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

ब्लॉग के सभी उपस्थित जनों एवं यथायोग्य आदरणीय जनों को नमन करते हुए देश के सभी
प्रिय मित्रों सहित 'ज्योतिष का सूर्य' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के सुधी पाठकों  को..होली की हार्दिक शुभकामनाएँ   
.........................  होली आयी सतरंगी रंगों की बौछार लाई, ढेर सारी मिठाई और मीठा मीठा प्यार लाई, आप की ज़िंदगी हो मीठे प्यार और खुशियों से भरी....पुनश्च .... होली के महपर्व पर ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ.....

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

होली का शुभ मुहूर्र्त एवं होली में कौन सा रंग आपके लिए है शुभ

होली का शुभ मुहूर्र्त एवं होली में कौन सा रंग आपके लिए है शुभ 

साथ ही ग्रहों की शांति भी 

मित्रों, आप सभी को सपरिवार रंग बिरंगी होली महापर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ....

होली दहन 16 मार्च को सर्वार्थसिद्धि योग में प्रदोषकाल के दौरान होगा। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (रविवार) को रात 10 बजकर 16 मिनट के पहले होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है, क्योंकि इसके बाद पुर्णीमा समाप्त हो जायेगा। पूर्णिमा में ही होलिकादहन शास्त्र सम्मत है। होलिकोत्सव चैत्र कृष्ण प्रतिपदा सोमवार (17 मार्च) को परम्परागत रूप से मनाया जाएगा।
क्या है दुर्लभ संयोग:
होली का पर्व इस बार 17 मार्च को कई संयोग लेकर आ रहा है। होली पर चार ग्रह एक साथ वक्री होंगे। राहु और केतु सदैव वक्री रहते है। ऐसे में वतर्मान स्थिति में शनि वक्री होने के साथ-साथ राहु के साथ तुला राशि में स्थित है। शनि के अलावा मंगल भी वक्री हो गए हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो होली पर चार ग्रह शनि, मंगल, राहु और केतु वक्री रहेंगे। तुला राशि में मंगल के साथ शनि और राहु का एक साथ वक्रगति में मिलन होना शताधिक वर्षों बाद एक दुर्लभ संयोग है। होली पर इस बार मंगल, शनि और राहु की युति राजनीति के शुभ संकेत दे रही है। यह संयोग जहां एक ओर अर्थव्यवस्था में सुधार होगा वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिलेगा।
पुराणों के अनुसार:
सती से मोहभंग के बाद शास्वत शिव अखण्ड समाधि में लीन थे और इधर हिमांचल पुत्री पार्वति का शिव से विवाह और स्कन्द का पुत्र रुप में प्रकट होना तय था, ताकि उसी पुत्र स्कन्द से राक्षसों का वध हो और स्वर्गादि लोकों में राक्षसों का आधिपत्य समाप्त हो सके। शिव के अखण्ड समाधि को तोड़ने के लिए कामदेव को भेजा गया, कामदेव ने शिव पर कामबांण से शिव पर प्रहार किया। भगवान शिव का तिसरा नेत्र खुल गया जिससे सामने खड़े कामदेव भस्म हो गया तबसे होली को काम दहन दिवस के रुप में भी मनाया जाता है। नृसिंह भगवान ने असुर भक्त हिरण्यकश्यप का संहार किया था। होलाष्टक में शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं।
प्राकृतिक रंगो से ही मनायें होली :
आयुर्वेद ने प्राकृतिक रंगों में पलाश के फूलों के रंग को बहुत महत्वपूर्ण माना है। यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है। यह प्राकृतिक नारंगी रंग रक्तसंचार की वृद्धि करता है, मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक शक्ति व इच्छाशक्ति को बढ़ाता है। अत: पानी का अपव्यय न करें।
होली के रंगों के साथ ग्रहों की शांति भी:
मेष और वृश्चिक राशि वालों के लिए सूखा लाल रंग:
लाल गुलाल के स्थान पर लाल चंदन (रक्त चंदन) के पाउडर का उपयोग किया जा सकता है। व्यापार में वृद्धि और नौकरी में प्रमोशन के अलावा शिक्षण कार्य में प्रगति के लिए शुभदायक रहेगा।
वृषभ और तुला राशि वालों के लिए भूरा रंग: आँवला चूर्ण और मुलतानी मिट्टी के मिश्रण से तैयार रंग से होली खेलें और तरक्की के मार्ग को प्रशस्त करें।
मिथुन और कन्या राशि वालों के लिए सूखा हरा रंग: केवल मेंहदी पाउडर या उसे आटे में मिलाकर बनाये गये मिश्रण से होली खेलें ताकि चार ग्रहों के वक्रगति से उत्पन्न अशुभ फलों से निजात मिलेगा।
कर्क राशि वालों के लिए सफेद गुलला से हली खेलनी चाहिए, सिंह राशि वालों को सुनहले रंगों का प्रयोग करना शुभदायक रहेगा।
धनु और मीन राशि वालों के लिए सूखा पीला रंग:
चार चम्मच बेसन में दो चम्मच हल्दी पाउडर मिलाने से अच्छा पीला रंग बनता है, जो त्वचा के लिए साथ ही विवाह में विलंब अथवा दाम्पत्य जीवन में आ रहीं बाधाओं को समाप्त करता है।
मकर और कुंभ राशि वालों के लिए जमुनी रंग: चुकंदर को पानी में उबालकर पीस के बढ़िया जामुनी रंग तैयार होता है। इस रंग से होली खेलने से निश्चित ही शनि के ढ़ैया अथवा साढ़ेसाती के अलावा रुके हुए कार्य को बल मिलता है।
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक ''ज्योतिष का सूर्य'', राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, भिलाई  

शुक्रवार, 7 मार्च 2014

हे नारी तू नारायणी .......................आईए आज एक संकल्प लें

आज ८ मार्च है, और सारा विश्व नारी सशक्तीकरण का प्रतीक “अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस” मना रहा है | सर्वप्रथम तो आप सभी को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ |

हे नारी तू नारायणी .......................आईए आज एक संकल्प लें

कभी दुष्टों का संहार करने वाली माँ दुर्गा के रूप में, तो कभी ज्ञान का प्रसार करने वाली माँ सरस्वती के रूप में और कभी धन की वर्षा करने वाली माँ लक्ष्मी के रूप में – उसी नारी शक्ति को हम संसार में आने से पूर्व ही मार डालते हैं | आज उसी “देवी” को अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ाई लड़नी पड़ रही है | आज का पाखण्डी समाज अपनी “जन्मदात्री” को ही जड़ से उखाड़ फेंकने में लगा हुआ है – जो कि खुद इस समाज की जड़ है, नींव है | बेटी के नाम पर सौ-सौ कसमें खाने वाले ही आज उसे कष्ट पहुँचाने में लगे हुए हैं | और उससे भी बड़ी सच्चाई यह है कि बेटी को “पराया धन” मानने वालों ने उसे कभी ह्रदय से “अपना” माना ही नहीं | वह तो अपने माता पिता के घर तक में “दूसरे की अमानत” ही बनकर रही सदा | उनके होश सँभालते ही उन्हें बताया जाने लगता है कि उन्हें दूसरे घर जाना है | यहाँ तक कि बहुत से परिवारों में तो लड़की को उच्च शिक्षा भी केवल इसीलिये दिलाई जाती है कि वह एक योग्यता होगी अच्छा घर वर प्राप्त करने के लिये | और जैसा कि ऊपर भी लिखा है, ऐसा केवल अशिक्षित अथवा निम्न वर्ग में ही नहीं होता | बल्कि उच्च तथा शिक्षित वर्ग के लोग भी इसी परम्परा का वहन कर रहे हैं | यदि इस समस्या से मुक्ति पानी है तो सबसे पहली आवश्यकता है इस विषय में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की | भ्रूण हत्या अथवा गर्भ का लिंग परीक्षण करने वालों के क्लीनिक सील किए जाने, उनका लाइसेंस निरस्त किये जाने तथा उन पर जुर्माना किए जाने के प्रावधान की आवश्यकता है । साथ ही आवश्यकता है प्रसव पूर्व जाँच तकनीक अधिनियम १९९४ को सख्ती से लागू किए जाने की । क्योंकि हमारे देश में तो हर कानून, हर सुविधा को अपने स्वार्थ के अनुसार तोड़ना मरोड़ना लोगों को अच्छी तरह आता है | यह विडंबना ही है कि जिस देश में कभी नारी को गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाओं के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ, वहीं अब कन्या के जन्म पर उसके परिवार और समाज में दुख व्याप्त हो जाता है l सिर्फ बेटे की चाह में अनगिनत मांओं की कोख उजाड़ दी जाती है l पर क्या इस क्रूरता के लिए केवल डॉक्टर ही उत्तरदायी है जो प्रसवपूर्व लिंग जाँच करके इस हत्या को अंजाम देता है ? क्या वे माता पिता इस अपराध के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं जो सिर्फ़ और सिर्फ़ बेटा ही पाना चाहते हैं ? केवल कड़े क़ानून बनाकर ही इस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता | जब तक हम अपनी संकीर्ण मानसिकता का त्याग नहीं करेंगे तब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता l बेटी के जन्म लेते ही हम इस सोच में तो पड़ जाते हैं कि कल यह बड़ी होगी तो इसके हाथों में मेंहदी भी रचानी पड़ेगी, इसके लिए “योग्य वर खरीदने” के लिये दहेज़ का प्रबंध भी करना होगा | किन्तु उसे स्वावलम्बी और शिक्षित भी बनाना है इस विषय में बहुत कम लोग सोचते हैं | लड़कियों को घर की लक्ष्मी या देवी कह देने भर से उसे उसके अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाते l महिलाओं के सामजिक बहिष्कार के रूप में कन्या भ्रूण हत्या की समस्या आज भारत में विकराल रूप ले चुकी है और आज यह हज़ारों करोड़ रुपयों का व्यापार बन चुका है | जबकि १९९४ में लिंग जाँच करके कन्या भ्रूण को समाप्त करना सरकार की ओर से गैर कानूनी क़रार दे दिया गया है |
पर इस भयावह सत्य को झुठलाया जा सकता है, बशर्ते कि हम सब मिलकर संकल्प लें कि न तो हम गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जाँच कराएँगे और न अपने किसी परिचित या रिश्तेदार को ऐसा करने देंगे | साथ ही यह भी कि जो डाक्टर गर्भस्थ शिशु की लिंग जाँच करके कन्या भ्रूण की हत्या जैसा जघन्य अपराध करेंगे उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवाने का प्रयास करेंगे |
-पण्डित विनोद चौबे, भिलाई
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.