ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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सोमवार, 21 अप्रैल 2014

हनुमानजी के 'अतुलित बलधामं' बनने का क्या है सबसे बड़ा राज ??

मित्रों, सुप्रभात आईए आज मंगलवार को श्रीराम भक्त श्री हुनमानजी के जीवन चरित्र से एक सीख लें। एक साधारण राज्य किष्किन्धा नरेश केसरी के यहाँ अवतरीत हुए परम भक्त हनुमान जी ने अपने उत्साह के बदौलत, देवासुर संग्राम विजयी दिलाने वाले राजा दशरथ
के पुत्र तथा स्वयं विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम जैसे संप्रभुत्वशाली तथा ताकतवर राजकुमार को रावण जैसे महान योद्धा से हुये युद्ध मे हनुमान जी उत्साह रुपी शौर्य ने विजय हासिल कराया। हुन्मानजी के पराक्रम का सिलसिला यहीं तक नहीं रुका, आगे इन्होंने अपनी माँ अन्जना का शरणागत त्रिविक्रम नामक ब्राह्मण के मर्यादा के लिए प्रभु श्रीराम से ही युद्ध किये। वास्तविक में इसी साहस को देखकर गोस्वामी तुलसीदासजी ने कहा है..अतुलित बल धामं..यानि अतुलनीय बलवान हनुमान जी थे। और इस महान पराक्रमी को शौर्यवीर बनाने में सबसे बड़ी भूमिका रही है, हनुमानजी के उत्साह की। आईये जरा इस श्लोक के माध्यम से भी इसे समझने का प्रयास करते हैं-
उत्साहो बलवानार्य
नास्त्युत्साहात्परं बलम्।
सोत्साहस्य च लोकेषु
न किंचिदपि दुर्लभम्॥

उत्साह श्रेष्ठ पुरुषों का बल है, उत्साह से बढ़कर और कोई बल नहीं है। उत्साहित व्यक्ति के लिए इस लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं है॥
अतः मित्रों किसी भी कार्य को करने का मन में उत्साह हो तो निश्चित ही वह व्यक्ति उस हर ऊँचाईयों को स्पर्श करता है, जहाँ तक पहुँचना सर्वजन सामान्य के लिए आसान नहीं रहता। आप सभी से निवेदन है आपलोग किसी भी कार्य को उत्साहपूर्वक करें।
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक 'ज्योतिष का सूर्य' राष्ठ्रीय मासिक पत्रिका भिलाई, जिला- दुर्ग (छ.ग.)

सोमवार, 14 अप्रैल 2014

भारत का अद्भुत व विलक्षण दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर.....छत्तीसगढ़ के भिलाई में

भारत का अद्भुत व विलक्षण दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर.....छत्तीसगढ़ के भिलाई में


श्री हनुमान जयंती के पावन पर्व पर आप सभी देश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ...


आज भिलाई के कुरुद रोड स्थित हनुमान चौक पर ...दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर में दक्षिणमुखी सिद्ध श्री हनुमान जी का दर्शन हुआ। मित्रों मैं इस मंदिर में बतौर पुजारी के रुप में 2001 से 2006 तक पाँच वर्ष अपनी सेवा दी है , साथ ही इस चमत्कारिक हनुमान मंदिर का प्रत्यक्ष गवाह मैं स्वयं हुँ .क्योंकि डेढ़ वर्ष अनवरत सुन्दरकाण्ड का नियमित पाठ करता था। और मुझे मंदिर कमेटी से मात्र 400 रु. प्रति माह वेतन के रुप में 1 वर्ष तक मिला बाद में मैंने स्वयं उस मासिक वेतन को लेने से मना कर दिया और निःस्वार्थ सेवा करना प्रारंभ किया। परम सद्गुरु परम संत श्री दक्षिणेश्वर हनुमान जी के कृपा से आज लगभग चतुर्दिक बहुत बढ़ियाँ अर्थात्  सम्मान एवं संतुष्टिजनक स्थिति में हुँ। श्री हनुमान जी ने मुझे सबकुछ दिया और हमेशा एक पारीवारिक वरिष्ठ जन तथा मार्गदर्शक के रुप में हमेशा साथ में रहते हैं। भिलाई के आस पास के लोग इस सिद्ध हुनुमान मंदिर में दर्शन करने अवश्य जायें।

क्या है ख़ास इस मंदिर में...
1. वास्तु अनुसार त्रिकोणात्मक दक्षिणमुखी श्री हनुमान जी की प्रतिमा है, जो स्वयं अपने आप में शक्ति-पीठ है।
2. प्रायः मंदिरों में उपरी हिस्सा गुंबद (पीरामीड के आकार का) होता है परन्तु यहाँ  हनुमान जी के ठिक उपर छत पर उनके स्वामी तथा आराध्य श्रीराम, जानकी तथा लक्ष्मणजी की प्रतिमा स्थापित है, जो देश का यह दूसरा मंदिर श्री राम जानकी लक्ष्मण जी दक्षिणमुखी विराजीत हैं, जिनका स्थापना भी मैने ही करवाई थी। इसलिए इस मंदिर के नामकरण के समय कालाराम जानकी मंदिर रखा गया।
3. कोहका अवंती बाई चौक से सीधा कुरुद रोड की ओर जायेंगे तो श्री हनुमान जी का दर्शन सहज ही हो जाता है, अर्थात् वास्तु के अनुसार जिस मंदिर अथवा घर के सामने गमनागमन अधिक हो वह अत्यन्त शुभ माना गया है।
4.श्री हनुमान जी के साथ ही भगवान शिव, पार्वती तथा गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है जहाँ आध्यात्मिक तौर पर भक्त और भगवान का बेहतरीन संतुलन है। श्री हनुमान जी के आराध्य प्रभु श्रीराम हैं, तथा श्री राम जी के आराध्य भगवान शिव हैं, जो त्रिकाणात्मक शक्तियों का अनुनाश्रय संबंध स्वमेव स्थापित होता है।
5. यहाँ प्रत्येक वर्ष हनुमान जयंती के दिन अखण्ड श्री राम चरित मानस का पाठ तथा श्री हनुमान चालीसा का 24 घंटे पाठ होता है। जो कल से 14 अप्रैल 2014 से आरंभ होकर आज 15 अप्रैल 2014 को पूर्णाहूति एवं महा प्रसाद का वितरण होगा।

मित्रों, मैने इस बात अहसास किया है जो भी श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी का तन्मयता से पूजन अर्चन किया उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हुईं। यहाँ तक की मैंने स्वयं कई ऐसे कई लोगों के यज्ञादि- अनुष्ठान इस मंदिर में कराये जो काल के मुख से पुनः वापस आये हैं, और वे लोग आज भी हुनामजी के शरण में सुखी, संपन्न तथा सौभाग्य से युक्त खुशहाल जीवन यापन कर रहें हैं।
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक-'' ज्योतिष का सूर्य '' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका भिलाई, जिला- दुर्ग (छ.ग.)
भिलाई के कुरुद रोड में स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में मेरा बेटा अक्षत पूजन करते हुए

भिलाई के कुरुद रोड में स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में श्री हनुमत् शरणम्...मैं स्वयं
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