ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

!!विशेष सूचना!!
नोट: इस ब्लाग में प्रकाशित कोई भी तथ्य, फोटो अथवा आलेख अथवा तोड़-मरोड़ कर कोई भी अंश हमारे बगैर अनुमति के प्रकाशित करना अथवा अपने नाम अथवा बेनामी तौर पर प्रकाशित करना दण्डनीय अपराध है। ऐसा पाये जाने पर कानूनी कार्यवाही करने को हमें बाध्य होना पड़ेगा। यदि कोई समाचार एजेन्सी, पत्र, पत्रिकाएं इस ब्लाग से कोई भी आलेख अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क कर अनुमती लेकर ही प्रकाशित करें।-ज्योतिषाचार्य पं. विनोद चौबे, सम्पादक ''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका,-भिलाई, दुर्ग (छ.ग.) मोबा.नं.09827198828
!!सदस्यता हेतु !!
.''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के 'वार्षिक' सदस्यता हेतु संपूर्ण पता एवं उपरोक्त खाते में 220 रूपये 'Jyotish ka surya' के खाते में Oriental Bank of Commerce A/c No.14351131000227 जमाकर हमें सूचित करें।

ज्योतिष एवं वास्तु परामर्श हेतु संपर्क 09827198828 (निःशुल्क संपर्क न करें)

आप सभी प्रिय साथियों का स्नेह है..

शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

समलैंगिकता और बृहन्नला

तुम लोग जिस वात्स्यायन कामसूत्र की बात कर कुतर्क देते फिर रहे हो, उसे तो तुम लोगों ने सहज ही स्वीकार कर लिया, साथ में 'वैदिक सभ्यता' को भी स्वीकार कर लेते। एक बड़े पत्रकार ने अपने संपादकीय में 5130 वर्ष पूर्व के धनुर्धारी वीर अर्जुन के 'बृहन्नला' और 'शकुनी' का तर्क दिया है, हे पत्रकार महोदय मुझे इस बात की प्रसन्नता हुई कि कम से कम 'कृष्ण-अर्जुन' के अस्तित्व को आपने स्वीकार किया, किन्तु उपरोक्त दोनों के अन्य जीवन चरित्र के सिद्धांतो के मुताबिक भी भारतीय संविधान में 'वेदोक्त, शास्त्रोक्त विधान' एक्ट को भी लागू कराते तो मैं आपके इस पत्रकारिता को 'श्वान-सूकरी' पत्रकारिता ना बोलता। दिन-रात 'भगवा' को गरियाने वालों, हिन्दुओं को आतंकी सिद्ध करने वालों तुम्हारे अन्दर अचानक बृहन्नला, शकुनि और वात्स्यायन कामसूत्र के प्रति इतना प्रेम कैसे उमड़ पड़ा ? साफ है भारत की युवा पीढ़ी को नष्ट-भ्रष्ट करने की गहरी चाल है जिसको पूरी तरह राजनैतिक हवा तब मिली जब कांग्रेस नेता शशि थरूर ने 2015 में संसद पटल पर 'समलैंगिकता' को अपराध (धारा 377) से बाहर रखे जाने के लिए निजी बिल लेकर आए हालांकि वह बिल गिर गया लेकिन 2005 में गुजरात स्थित राजपिपला के राजकुमार 'मानवेंद्र' से लेकर भारत के कई अन्य हाईकोर्ट में मामलों आने लगे थे, लेकिन संसद में पहली बार इस बिल को शशि थरूर ने लाकर इसे बड़ी राजनैतिक हवा दी। 2016 अगस्त में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में आया और 2017 में इसे निजता बताया गया और अब यह 2018 में इस बेवाहयात मानसिक रूप से मुठ्ठी भर 'कामरोगियों' के पक्ष में पर फैसला आ गया। यह एक सुसंस्कृत भारतीय समाज में विष घोलने का काम तो किया ही गया बल्कि कई ऐसे असाध्य रोगों को आयातित करने का आमंत्रण दिया गया, साथ ही हिन्दू संस्कृति, हिन्दुत्व विचारधारा पर कठोर प्रहार किया गया है। अब आप समझ गए होंगे इसके जड़ को। आज 'चौबेजी कहिन' में हमने मुगलों का नाम क्यों जोड़ा क्योंकि की 'मुगल शासक' स्वयं ही 'समलैंगिक' थे, और पिछले दिनों कई पादरी और फादरों द्वारा दुधमुंहे बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौनाचार के अपराध में जेल की हवा खा रहे हैं, हालांकि ईसाई, स्लाम दोनों धर्मों में 'समलैंगिकता' की तिव्र निंदा की गई है, बावजूद 'बाबर प्रेमी' इस समलैंगिकता के पैरोकार हैं। जबकि हालांकि समलैंगिकता के खिलाफ अंग्रेजों ने धारा 377 को 1860 में लागू किया था। 158 साल पुराने इस कानून के द्वारा समलैंगिकता को गैरकानूनी बताया गया है जिसमें 1935 में फिर कुछ परिवर्तन कर दायरे को बढ़ाया गया।




शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

चौबेजी कहिन:- 'हर हर महादेव' के उद्घोष के साथ आज से सावन माह आरंभ। आईए सावन में पड़ने वाली विशेष तिथियां और रुद्राभिषेक हेतु अलग-अलग द्रव्यों के लाभ के बारे में कुछ जानकारियां प्रस्तुत करता हूं 🙏

आज से सावन का पवित्र माह आरंभ हो गया इस मांह को 'पावस माह' भी कहा जाता है। पौराणिक संदर्भों में वर्णित कथाओं के मुताबिक सनत्कुमारों का प्रसंग मिलता है वहीं मां पार्वती के 'शिव' जी को पति रुप में प्राप्त करने हेतु किए गए कठोर तप इसी सावन माह में किया गया। चूंकि मैं भिलाई के शांतिनगर में निवासरत हूं छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में जाना होता है यहां के लोग पूरे सावन में बाबा बूढादेव की पूजा अर्चना की जाती है, यत्र-तत्र-सर्वत्र शिव आराधना हर हर महादेव के उद्घोष के साथ की जाती है। आईए आपको सावन में पड़ने वाले कुछ विशेष तिथियों और रुद्राभिषेक द्रव्य और उसके लाभ के बारे में आज के "चौबेजी कहिन'' में चर्चा करेंगे 😊🌹





शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा।

बुधवार, 25 जुलाई 2018

चौबेजी कहिन:- 21 वीं सदी का अद्भुत खग्रास चंद्रग्रहण 27 जुलाई को। आईए जानते हैं 'चन्द्रग्रहण रहस्य'...🙏 आज 'फेसबुक लाईव' में बतायेंगे राशियों पर 'चन्द्रग्रहण' का शुभाशुभ प्रभाव।

चौबेजी कहिन:- 21 वीं सदी का अद्भुत खग्रास चंद्रग्रहण 27 जुलाई को। आईए जानते हैं 'चन्द्रग्रहण रहस्य'...🙏 आज 'फेसबुक लाईव' में बतायेंगे राशियों पर 'चन्द्रग्रहण' का शुभाशुभ प्रभाव।

26/7/2018

खग्रास चंद्रग्रहण 27/28 जुलाई 2018 शुक्रवार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पुर्णिमा को लगेगा। जिसका सूतक 27/7/2018 को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से आरंभ हो जायेगा अत: इसके बाद मंदिरों के पट बंद हो जायेंगे, साथ ही आज गुरु पूर्णिमा होने की वजह से सूतक लगने के पूर्व यानी दोपहर 2 बजकर 54 मिनट के पहले ही गुरुपूजन आदि कार्य संपन्न कर लें, क्योंकि सूतक लगने के बाद किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य या पूजन अर्चन करना या अन्नग्रहण करना वर्जित है।

चन्द्रग्रहण रात्रि 27/7/2018 को 11बजकर 54 (PM) मिनट से लेकर 28/7/2018 को रात्रि 03 बजकर 49 मिनट (AM) तक 235 मिनट तक रहेगा जो 21वीं सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्रग्रहण है।

साथियों नमस्कार 🙏 वैसे तो चंद्र ग्रहण का प्रभाव शुभ नहीं माना जाता। खगोलीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी अपनी धूरी पर भ्रमण करते हुए चंद्रमा व सूर्य के बीच आ जाती है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा का पूरा या आधा भाग ढ़क जाता है। इसी को चंद्र ग्रहण कहते हैं। यह चंद्रग्रहण भारत सहित दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, आस्ट्रेलिया और यूरोप में देखा जा सकेगा।

ज्योतिष के अनुसार अभी वर्तमान में गोचर मकर राशि के केतु और चंद्रमा की प्रधानता रहेगी। राहु से समसप्तक दृष्टि संबंध रहेगा। जो अशुभता का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण बहुत सारी प्राकृतिक आपदाओं से रू-ब-रू होना पड़ सकता है। पृथ्वी के पूर्वोत्तर भाग में भूकंप की संभावना है वहीं जिसके जन्मांक में चन्द्र कमजोर है उसे ग्रहण के दौरान घर से बाहर ना निकले ं क्योंकि ऐसे लोगों पर किन्हीं कारणों से डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं इसके अलावा जिन जातकों के जन्मांक में ग्रहण-दोष है उनको ग्रहण के दौरान महापुरुषों के जीवन चरित्र को पढ़ना चाहिए जिनका जीवन बेहद संघर्ष पूर्ण रहा है ताकी उनके जीवन चरित्र से सीख लेकर अवसाद ग्रस्त लोग 'देहविसर्जन' यानी आम भाषा में 'आत्महत्या' की आशंकाओं के प्रबलता से बच सकें। इसके अलावा ग्रहण के दौरान विकिरण के कारण आंखों, रक्तचाप और फुडपायजनिंग आदि रोगों की संभावना बढ़ जाती है अतः ऐसे रोगियों के लिए विशेष तौर पर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कुछ वामपंथी विचारधारा के लोग जो सनातनधर्म के द्रोही हैं और कुछ अन्य धर्मों के लोग जो नक़ल तो सनातन सिद्धांत का ही करते हैं परन्तु वे सनातनधर्म के प्रबल विरोधी भी हैं चूंकि उनकी यह मजबूरी है क्योंकि सनातनधर्म का वह विरोध नहीं करेंगे तो उनके असैद्धांतिक-धर्म का प्रचार कैसे संभव होगा कुछ ऐसे टाईप के लोग 'चन्द्रगहण' को खगोलीय घटना मानते हैं और ग्रहण में शास्त्रसम्मत वर्जनीय तथ्यों को दकियानूसी करार देते हैं, तो उन आसुरी प्रवृत्तियों को यह समझना चाहिए की ं🌹 सनातनधर्म एक प्रमाणिक व सैद्धांतिक धर्म है और इस धर्म ग्रंथों में वर्णित सभी विषय, प्रकल्प सद्य: प्रमाणित दस्तावेज हैं जिनमें कही एक एक बातें हर फ्लोर पर सटीक होती आई हैं तभी तो महाभारत काल में हमारे वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों एवं गणितज्ञों ने त्रिकोणमीति जो भारत की देन है, की सहायता से  5000 साल पहले ही बता दिया था कि महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने से जब भरी दोपहरी में अंधकार छा जाता है तो पक्षी  भी अपने घोंसलों में लौट आते हैं। यह पिछले सूर्य ग्रहण के समय लोग देख चुके हैं और पूरे विश्व के वैज्ञानिक भी। तो ग्रहण का प्रभाव हर जीव जन्तु, मनुष्य, तथा अन्य ग्रहों पर  पड़ता है। गुरुत्वाकर्षण घटने या बढऩे से धरती पर भूकंप आने की संभावना ग्रहण के 41 दिन पहले या बाद तक रहती है। आज इसी विषय पर 'फेसबुक लाईव' में आपके समक्ष उपस्थित होऊंगा, यदि आपके मन में कोई प्रश्न हो तो आप कमेंट में लिखे, लेकिन मित्रों व्यक्तिगत प्रश्न नहीं होना चाहिए। प्रश्न केवल ग्रहण से जुड़ी है।। अस्तु।।



दूरभाष क्रमांक -09827198828

(कृपया इस लेख को कोई कॉपी-पेस्ट ना करें ऐसा करते पाये जाने पर ' ज्योतिष का सूर्य' वैधानिक कार्यवाही करने को बाध्य होगा)

सोमवार, 23 जुलाई 2018

गेरुआधारी फर्जी अग्निवेश ...!!

गेरुआधारी फर्जी अग्निवेश ...!!

माओवादी और मिशनरीज की
रोटी पर पलता अग्निवेश फर्जी
गेरुआधारी है: वस्तुतः ईसाई है:
वेटिकन का प्यादा है अग्निवेश।

सोनियाँ सरकार में बड़ी दलाली
का काम वही कर सकता था जो
रोमन कैथोलिक ईसाई हो।

आपको पता होना चाहिए
कि सोनियाँ काँग्रेस के
शासनकाल में सबसे बड़े
लायजनर्स में अग्निवेश की
गिनती होती थी।

अग्निवेश सत्ता के गलियारे के
चमकते सितारे थे उन दिनों।

अग्निवेश की कृपा प्राप्त हो
जाने पर सोनियाँ सरकार में
बड़े से बड़ा काम करा लेते
थे लोग।

अग्निवेश का जन्म हुआ
आंध्रप्रदेश में।☺️

पले बढ़े पढ़े छत्तीसगढ़ में
और जीवन भर काम किया
मिशनरीज और माओवाद
के लिए।☺️☺️

विनायक सेन जैसे दुर्दांत
माओवादी को सोनियाँ सरकार
के सहारे फाँसी से बचा लेने
का चमत्कार कर दिखाया था
अग्निवेश ने।

आज तक भी विनायक सेन की
गर्दन फाँसी के फंदे तक न पहुँच
सका।

यह सोनियाँ की शक्ति नहीं
है यह चर्च की शक्ति का
परिणाम है।

अग्निवेश एक संगठन
चलाता है सर्व धर्म संसद।

उस संगठन की जहाँ भी बैठक
होती है वहाँ सर्व धर्म के नाम
पर केवल चर्च का बोलबाला
होता है।

और सनातन धर्म का स्वयंभू
प्रतिनिधि हर बार अग्निवेश ही
होता है।

अर्थात यह सर्व धर्म संसद
केवल चर्च की संसद बनकर
रह गया है।

या यूँ कहें कि चर्च के हितों को
ध्यान में रखकर ही यह संगठन
बनाया गया है।

19 जून 2009 को
G8 सम्मेलन से ठीक
पहले रोम में सर्व धर्म
संसद का आयोजन
हुआ।

आयोजक अग्निवेश थे।

चूँकि इस संगठन के सर्वेसर्वा
अग्निवेश ही हैं।

उस सम्मेलन से तीन दिन
पहले सभी डेलीगेट्स भारी
सुरक्षा व सुविधा के अंतर्गत
भूकंप प्रभावित ला अकीला
शहर में ले जाए गए।

जहाँ वेटिकन के पादरियों द्वारा
मृतकों के लिए सामूहिक प्रेयर
का आयोजन हुआ।

सारी व्यवस्था वेटिकन
ने ही किया था।

प्रेयर का आइडिया अग्निवेश
का ही था।

यदि तुम आर्य समाजी थे
और सनातनी थे तो वहाँ
वैदिक स्वस्तिवाचन व शांति
पाठ भी करवा सकते थे।

किन्तु चर्च का प्रेयर जिसको
आनन्दित करता हो वह वैदिक
शांति पाठ क्यों करेगा ?

सर्व धर्म संसद का उद्घाटन
संध्या 5 बजे रोम के प्रसिद्ध
विला मडामा में हुआ।

उद्घाटनकर्ता था कम्युनिटी
ऑफ सेंट इडिगो का संस्थापक
प्रोफेसर एंड्रिया रिकार्डी।

एंड्रिया रिकार्डी चर्च के सम्बंध
में ही पुस्तकें लिखता रहा है।

इसी लेखन के कारण वह
इतिहासकार कहा जाता है।

चर्च के विश्वस्त लोगों में
से एक वफादार है एंड्रिया
रिकार्डी।

वही व्यक्ति अग्निवेश के सर्व
धर्म संसद का उद्घाटनकर्ता
महापुरुष था।

अग्निवेश के रिश्ते सम्बंधों
को समझने के लिए यह
लिंक महत्वपूर्ण है।

अपने वेटिकन के लिंक के
कारण ही अग्निवेश लगातार
हिन्दू धर्म के विविध तीर्थ,पर्व-
उत्सवों और रीति नीति पर
आक्रमण करता रहा है।

अग्निवेश का माओवाद के
साथ गहरा संबंध भी उसके
हिन्दू विरोधी होने का एक
प्रमुख कारण रहा है।

अग्निवेश झारखंड और
छत्तीसगढ़ के माओवादियों
से बड़े निकट से जुड़ा रहा है।

इन दोनों राज्यों के चर्च और
मिशनरीज से भी अग्निवेश
के बड़े गहरे संबंध रहे हैं।

अग्निवेश इनके लिए अनेकों
बार काम करता हुआ दिखाई
देता है।

अभी की अग्निवेश की झारखंड
यात्रा भी चर्च के लिए ही थी।

अग्निवेश राँची के समीप खूँटी
में वहाँ के सभी मिशनरीज के
प्रमुख लोगों से मिलकर उनको
साहस देने का काम किया।

हीलिंग टच टू मिशनरीज।

बच्चा बेचने वाली घटना में
सिस्टर कोनसिलिया और
सिस्टर मेरिडियन के पकड़े
जाने और अपराध स्वीकार
कर लेने के बाद राज्य सरकार
द्वारा मिशनरीज ऑफ चैरिटी
के ठिकानों पर पड़े छापे के बाद
मिशनरीज की चूलें हिल गई हैं।

भारत का कैथोलिक विशप
थियोडोर मैशकरेनहैस इस
छापे के तुरंत बाद दिल्ली से
दौड़ते हुए राँची पहुँचा था।

किंतु उसके वहाँ जाने
और दलाली के तमाम
प्रयत्न विफल रहे तब
दलाल शिरोमणि अग्निवेश
को थियोडोर मैशकरेनहैस
ने खूंटी भेजा।

पाकुड़ यात्रा लोगों को भ्रमित
करने के लिए आयोजित किया
गया था।

किन्तु कुछ नैजवानों के
आक्रामक रवैये ने सारा
भ्रम निवारण कर दिया।

रविवार, 22 जुलाई 2018

चौबेजी कहिन:- आज से 4 माह योगनिद्रा में शयन करने चले जायेंगे भगवान विष्णु, 'हरिशयनी' एकादशी का व्रत हमारे ऋषियों द्वारा दी गई 'साइंटिफिक उपहार' है.....🌹🌹🌹🙏🙏🙏

आज आषाढ़ मास के शुक्ल में पड़ने वाली एकादशी देवशयनी एकादशी है। आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🌺🌹🌺🙏 आज से चातुर्मास प्रारंभ हो गया है। आज से भगवान विष्णु 4 माह के लिए पाताल लोक में योगनिद्रा करने चले जाते हैं। जिसके कारण 4 माह तक किसी भी तरह का शुभ कार्य जैसे यज्ञ, विवाह, व्यापारिक कार्यों का शुभारंभ आदि मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी की पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त को आज 'चौबेजी कहिन'' में जानने का प्रयास करते हैं।

ज्योतिष के अनुसार सूर्य के मिथुन राशि में आने पर यह एकादशी (पद्मनाभा) आती है। पुराणों में प्राप्त संदर्भों के अनुसार भगवान विष्णु इस दिन से चार मासपर्यन्त (चातुर्मास) पाताल में राजा बलि के द्वार पर निवास करके कार्तिक शुक्ल एकादशी को लौटते हैं। इसी प्रयोजन से इस दिन को 'देवशयनी' तथा कार्तिकशुक्ल एकादशी (19/11/2018) को प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। इस काल में यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षाग्रहण, यज्ञ, गृहप्रवेश, गोदान, प्रतिष्ठा एवं जितने भी शुभ कर्म है, वे सभी त्याज्य होते हैं। भविष्य पुराण, पद्म पुराण तथा श्रीमद्भागवत पुराणके अनुसार हरिशयन को 'योगनिद्रा' कहा गया है। आज हम अपने निवास सड़क -26, शांतिनगर भिलाई-दुर्ग छत्तीसगढ़ में 'हरिशयनी एकादशी व्रतोत्सव' का आयोजन किया है।

साथियों🌷संस्कृत में धार्मिक साहित्यानुसार 'हरि' शब्द सूर्य, चन्द्रमा, वायु, विष्णु आदि अनेक अर्थो में प्रयुक्त है।  साईंटिफ ढंग से देखा जाए तो 🚩हरिशयन🚩 का तात्पर्य इन चार माह में बादल और वर्षा के कारण सूर्य-चन्द्रमा का तेज क्षीण हो जाना उनके शयन का ही द्योतक होता है। इस समय में पित्त स्वरूप अग्नि की गति शांत हो जाने के कारण शरीरगत शक्ति क्षीण या सो जाती है। आधुनिक युग में वैज्ञानिकों ने भी खोजा है कि कि चातुर्मास्य में (मुख्यतः वर्षा ऋतु में) विविध प्रकार के कीटाणु अर्थात सूक्ष्म रोग जंतु उत्पन्न हो जाते हैं, जल की बहुलता और सूर्य-तेज का भूमि पर अति अल्प प्राप्त होना ही इनका कारण है। अत: सनातनधर्म सद्य: एक प्रमाणित धर्म है जो ना केवल वैज्ञानिक है वरन् व्यावहारिक जीवन को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है अतएव इस व्रत को हम सभी को इस व्रत को करना चाहिए।

दूरभाष क्रमांक -09827198828

(कृपया इस लेख को कोई कॉपी-पेस्ट ना करें ऐसा करते पाये जाने पर  ' ज्योतिष का सूर्य' वैधानिक कार्यवाही करने को बाध्य होगा)