ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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रविवार, 26 अक्तूबर 2014

छठपूजा का महत्त्व और कैसे करें छठपूजा.....

मित्रों, सुप्रभात
ऊं नमः शंभवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय, च मयस्कराय च नमः शिवाय चशिवतराय च।
भगवान शिव, माँ पार्वती तथा विनायक आप सभी की मनोकामना पूर्ण करें.....शुद्ध लक्ष्मी का आपके घर आगमन हो....!

बुधवार, 24 सितंबर 2014

कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त......?

 कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त......?
मित्रों आप सभी को शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएँ.... और आईए नवरात्रि के प्रथम दिवस पर कलश स्थापना के मुहूर्त के बारे में जानने का प्रयास करते हैं
कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त
कल यानि गुरुवार को ही सुबह 4 बजकर 40 मिनट से सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक, तथा प्रातः 06 बजकर 16 मिनट से 07 बजकर 45 मिनट तक शुभ की चौघड़िया।  कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है. यदि किसी कारण आप इस दौरान कलश स्थापित नहीं कर पाते हैं तो आप कलश का स्थापन अभिजीत मुहूर्त में करें. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. राहु काल में कलश स्थापना निषेध है. राहु काल दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से दोपहर बाद 3: 15 बजे तक रहेगा.

शनिवार, 6 सितंबर 2014

गणेश विसर्जन एवं महारविवार व्रत एक साथ

गणेश विसर्जन एवं महारविवार व्रत एक साथ

-ज्योतिषाचार्य  पण्डित विनोद चौबे
07/09/2014 को दिन में 12 बजकर && मिनट पर चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगा जो सोमवार को प्रात: 10 बजकर &5 मिनट तक रहेगा। निर्णय सिंधु के अनुसार निश्चित तौर पर मध्याह्न व्यापिनी पर्व महारविार व्रत को आज के ही दिन करना आवश्यक है कई वर्षों बाद यह दुर्लभ संयोग
बन रहा है कि गणेश विसर्जन के साथ ही अनन्त चतुर्दशी तथा महारविवार व्रत का महासंयोग बन रहा है।
ग्रहों के अनुसार संवत् 2071(हिन्दी वर्ष) का पहला दुर्लभ संयोग है कि सूर्य, बुध तथा मंगल स्वगृह (स्वराशि) में तथा वृहस्पति अपनी उ"ा की राशि कर्क में स्थित है। बुध ग्रह के देवता गणेश हैं तो महारविवार व्रत के स्वामी सूर्य तथा अनन्त चौदश अर्थात् भगवान विष्णु यानी उ"ा राशि में वृहस्पति हैं कुल मिलाकर सिद्धांत Óयोतिष की दृष्टी से लगभग 167  वर्ष बाद ऐसा शुभ संयोग आया है। आध्यात्मिक दृष्टी से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।
गणेश विसर्जन 7 सितंबर रविवार को ही करना अत्यंत शुभदायक रहेगा। किसी भी मूर्ति के विसर्जन में पंचक दोष मान्य नहीं है। और यदि इस प्रकार की भ्रांति फैलाई जा रही है तो वह मात्र कोरी कल्पना है।  पंचक में किया गया हवन यज्ञ तथा विसर्जनादि कार्य पाँच गुना अधिक फलदायी माना जाता है। अत: 07 सितंबर को मध्याह्न काल में मूर्ति का विसर्जन किया जाना चाहिए। देश काल की मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए भगवान गणेश जी साथ उनकी दोनों पत्नियाँ ऋद्धी-सिद्धी भी स्थापित की जाती हैं, तो उस दृष्टी से दिन रविवार होने का कारण सोमवार (08/09/2014) को भी विसर्जन किया जा सकता है।

विसर्जन की विधि : 
गणेश गायत्री मंत्रों से 108 बार आहुति करना चाहिए, और अनन्त (धागा का बना हुआ) को वेदी पर रखकर भगवान विष्णु के स्वरुप का ध्यान करते हुए षोडसोपचार पूजन अर्चन करना चाहिए। महरविवार व्रत करते समय भुवनभास्कर सूर्य के स्तोत्र का पाठ करते हुए अघ्र्यदान करना चाहिए, इस व्रत में सेंधा अथवा सामान्य दोनों नमक वर्जित है। अपराह्न काल में भगवान गणेश जी गाजे बाजे के साथ विसर्जन करना चाहिए। पूजा में  मिट्टी के गणेश प्रतिमा ही ग्राह्य हैं, और उन्हीं का विसर्जन भी करें अन्य रासायनिक पदार्थो की प्रतिमाओं का पूजन अथवा विसर्जन आदि वर्जित है। हमारे धर्म ग्रंथों में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए केवल मिट्टी से निर्मित प्रतिमाओं का ही पूजन व विसर्जन का विधान बताया गया है।

राशियों के अनुसार हवन सामग्री (औषधियाँ) :
मेष : जटामसी तथा गुगल
वृषभ : बेल की गुद्दी
मिथुन : सतावर
कर्क : इन्द्र जव
सिंह : ब्राह्मी
कन्या : लक्ष्मणा
तुला : कपूर
वृश्चिक : तीना का चावल
धनु : आंवला
मकर : नीली फल
कुंभ: नीलमणी रस
मीन: हल्दी
आदि होम द्रव्यों से हवन करना चाहिए।

-ज्योतिषाचार्य  पण्डित विनोद चौबे, शांतिनगर, भिलाई

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

जरुरत है एक सन्दिपनी गुरु तथा कृष्ण जैसे शिष्य की.........

जरुरत है एक सन्दिपनी गुरु तथा कृष्ण जैसे शिष्य की.........

शिक्षक दिवस पर आप सभी मित्रों को सादर शुभकामनाएँ
मित्रों, हमारे भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य परम्परा वास्तव में एक विलक्षण परम्परा है, हिन्दू धर्म ग्रंथों में तो गुरु अपने शिष्य को पुत्र से भी अधिक महत्त्व देता है, यहाँ तक की शस्त्र तथा शास्त्र दोनों विद्याओं में गुरु अपने  शिष्य को सभी कौशलों के साथ प्रायोगिक तौर पर विद्या में पारंगत बनाता है। वैसे तो हमारे धर्म ग्रंथों में अनेक प्रसंग मिलते हैं परन्तु, गुरु सन्दिपनी का शिष्य योगेशवर श्री कृष्ण की गीता पूरे विश्व में मानव-दर्शन का अद्भुत ग्रंथ है जो लगभग अन्य कई देशों में बड़े चाव से पढ़ा जाता है और उसे जीवन में उतारा भी जाता है। शिष्य ऐसा हो जो अपने गुरु के शिक्षा का पूरे संसार में इस प्रकार प्रचार-प्रसार करें कि समस्त भूलोक में उस शिष्य के गुरु के महिमा का गुणगान हो।
मित्रों जरा अब हम चर्चा करें आज के कुछ तथाकथित गुरुओं की जो गुरु के नाम पर शिक्षा को व्यावसायिकरण के गर्त में ढ़केल दिये हैं। आगे कुछ कालेजों में तो एकस्ट्रा कालेज के नाम पर तथाकथित शिक्षकों के द्वारा मासूम बच्चों तथा बच्चियों से शिक्षकों द्वारा वहसियाना हरकतें करने के मामले समाने आ रहे हैं, जो अत्यन्त घृणित है। कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर अपने शिष्य के प्रगति में सहर्ष कर देता है, वास्तव में ऐसे शिक्षकों का समामान होना चाहिए। तथा शिक्षा के नाम पर व्यवसाय करने वालों पर नकेल कसना चाहिए इसके साथ ही जो शिक्षक वहसियाना हरकत करते हैं उन्हें सामन्य सजा के 10 गुना त्वरित सजा दिया जाना चाहिए। ताकि स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।
उपरोक्त कुछ ही बिन्दुओं को मैने स्पर्श किया है, हो सकता है किसी सज्जन को बुरा भी लगे वो हमें क्षमा करेंगे। लेकिन सच हमेशा कड़वा होता है। मैं आदरणीय सन्दिपनी जैसे गुरुजन वृन्दों का चरण स्पर्श करता हुँ, साथ ही भगवान कृष्ण जैसे शिष्यों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हुँ।
वन्दे मातरम् भारत माता की जय।।

- ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, भिलाई

सोमवार, 21 अप्रैल 2014

हनुमानजी के 'अतुलित बलधामं' बनने का क्या है सबसे बड़ा राज ??

मित्रों, सुप्रभात आईए आज मंगलवार को श्रीराम भक्त श्री हुनमानजी के जीवन चरित्र से एक सीख लें। एक साधारण राज्य किष्किन्धा नरेश केसरी के यहाँ अवतरीत हुए परम भक्त हनुमान जी ने अपने उत्साह के बदौलत, देवासुर संग्राम विजयी दिलाने वाले राजा दशरथ
के पुत्र तथा स्वयं विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम जैसे संप्रभुत्वशाली तथा ताकतवर राजकुमार को रावण जैसे महान योद्धा से हुये युद्ध मे हनुमान जी उत्साह रुपी शौर्य ने विजय हासिल कराया। हुन्मानजी के पराक्रम का सिलसिला यहीं तक नहीं रुका, आगे इन्होंने अपनी माँ अन्जना का शरणागत त्रिविक्रम नामक ब्राह्मण के मर्यादा के लिए प्रभु श्रीराम से ही युद्ध किये। वास्तविक में इसी साहस को देखकर गोस्वामी तुलसीदासजी ने कहा है..अतुलित बल धामं..यानि अतुलनीय बलवान हनुमान जी थे। और इस महान पराक्रमी को शौर्यवीर बनाने में सबसे बड़ी भूमिका रही है, हनुमानजी के उत्साह की। आईये जरा इस श्लोक के माध्यम से भी इसे समझने का प्रयास करते हैं-
उत्साहो बलवानार्य
नास्त्युत्साहात्परं बलम्।
सोत्साहस्य च लोकेषु
न किंचिदपि दुर्लभम्॥

उत्साह श्रेष्ठ पुरुषों का बल है, उत्साह से बढ़कर और कोई बल नहीं है। उत्साहित व्यक्ति के लिए इस लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं है॥
अतः मित्रों किसी भी कार्य को करने का मन में उत्साह हो तो निश्चित ही वह व्यक्ति उस हर ऊँचाईयों को स्पर्श करता है, जहाँ तक पहुँचना सर्वजन सामान्य के लिए आसान नहीं रहता। आप सभी से निवेदन है आपलोग किसी भी कार्य को उत्साहपूर्वक करें।
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक 'ज्योतिष का सूर्य' राष्ठ्रीय मासिक पत्रिका भिलाई, जिला- दुर्ग (छ.ग.)

सोमवार, 14 अप्रैल 2014

भारत का अद्भुत व विलक्षण दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर.....छत्तीसगढ़ के भिलाई में

भारत का अद्भुत व विलक्षण दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर.....छत्तीसगढ़ के भिलाई में


श्री हनुमान जयंती के पावन पर्व पर आप सभी देश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ...


आज भिलाई के कुरुद रोड स्थित हनुमान चौक पर ...दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर में दक्षिणमुखी सिद्ध श्री हनुमान जी का दर्शन हुआ। मित्रों मैं इस मंदिर में बतौर पुजारी के रुप में 2001 से 2006 तक पाँच वर्ष अपनी सेवा दी है , साथ ही इस चमत्कारिक हनुमान मंदिर का प्रत्यक्ष गवाह मैं स्वयं हुँ .क्योंकि डेढ़ वर्ष अनवरत सुन्दरकाण्ड का नियमित पाठ करता था। और मुझे मंदिर कमेटी से मात्र 400 रु. प्रति माह वेतन के रुप में 1 वर्ष तक मिला बाद में मैंने स्वयं उस मासिक वेतन को लेने से मना कर दिया और निःस्वार्थ सेवा करना प्रारंभ किया। परम सद्गुरु परम संत श्री दक्षिणेश्वर हनुमान जी के कृपा से आज लगभग चतुर्दिक बहुत बढ़ियाँ अर्थात्  सम्मान एवं संतुष्टिजनक स्थिति में हुँ। श्री हनुमान जी ने मुझे सबकुछ दिया और हमेशा एक पारीवारिक वरिष्ठ जन तथा मार्गदर्शक के रुप में हमेशा साथ में रहते हैं। भिलाई के आस पास के लोग इस सिद्ध हुनुमान मंदिर में दर्शन करने अवश्य जायें।

क्या है ख़ास इस मंदिर में...
1. वास्तु अनुसार त्रिकोणात्मक दक्षिणमुखी श्री हनुमान जी की प्रतिमा है, जो स्वयं अपने आप में शक्ति-पीठ है।
2. प्रायः मंदिरों में उपरी हिस्सा गुंबद (पीरामीड के आकार का) होता है परन्तु यहाँ  हनुमान जी के ठिक उपर छत पर उनके स्वामी तथा आराध्य श्रीराम, जानकी तथा लक्ष्मणजी की प्रतिमा स्थापित है, जो देश का यह दूसरा मंदिर श्री राम जानकी लक्ष्मण जी दक्षिणमुखी विराजीत हैं, जिनका स्थापना भी मैने ही करवाई थी। इसलिए इस मंदिर के नामकरण के समय कालाराम जानकी मंदिर रखा गया।
3. कोहका अवंती बाई चौक से सीधा कुरुद रोड की ओर जायेंगे तो श्री हनुमान जी का दर्शन सहज ही हो जाता है, अर्थात् वास्तु के अनुसार जिस मंदिर अथवा घर के सामने गमनागमन अधिक हो वह अत्यन्त शुभ माना गया है।
4.श्री हनुमान जी के साथ ही भगवान शिव, पार्वती तथा गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है जहाँ आध्यात्मिक तौर पर भक्त और भगवान का बेहतरीन संतुलन है। श्री हनुमान जी के आराध्य प्रभु श्रीराम हैं, तथा श्री राम जी के आराध्य भगवान शिव हैं, जो त्रिकाणात्मक शक्तियों का अनुनाश्रय संबंध स्वमेव स्थापित होता है।
5. यहाँ प्रत्येक वर्ष हनुमान जयंती के दिन अखण्ड श्री राम चरित मानस का पाठ तथा श्री हनुमान चालीसा का 24 घंटे पाठ होता है। जो कल से 14 अप्रैल 2014 से आरंभ होकर आज 15 अप्रैल 2014 को पूर्णाहूति एवं महा प्रसाद का वितरण होगा।

मित्रों, मैने इस बात अहसास किया है जो भी श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी का तन्मयता से पूजन अर्चन किया उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हुईं। यहाँ तक की मैंने स्वयं कई ऐसे कई लोगों के यज्ञादि- अनुष्ठान इस मंदिर में कराये जो काल के मुख से पुनः वापस आये हैं, और वे लोग आज भी हुनामजी के शरण में सुखी, संपन्न तथा सौभाग्य से युक्त खुशहाल जीवन यापन कर रहें हैं।
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक-'' ज्योतिष का सूर्य '' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका भिलाई, जिला- दुर्ग (छ.ग.)
भिलाई के कुरुद रोड में स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में मेरा बेटा अक्षत पूजन करते हुए

भिलाई के कुरुद रोड में स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में श्री हनुमत् शरणम्...मैं स्वयं

रविवार, 30 मार्च 2014

स्वागत है नव सम्वत् 2071 का....राजा एवं मंत्री चन्द्र और वित्तमंत्री मंगल

मित्रों, आप सभीको नूतन हिन्दू नववर्ष 2071 (प्लवंग) सम्वत् की हार्दिक शुभकामनाएँ....माँ शक्ति आपको पूरे वर्ष खुशियाँ देती रहें....ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै - 

राजा एवं मंत्री चन्द्र और वित्तमंत्री मंगल

विक्रम संवत 2070 'पराभव' 30 मार्च को समाप्त होगा। नववर्ष 30 और 31 मार्च की रात 12.14 बजे लगेगा। गुरु सप्तम भाव में रहेगा। मीन लग्न और मीन राशि में नवसंवत्सर का प्रवेश हो रहा है। व्यापारी और किसानों को जून के बाद शुभ समाचार मिलेंगे। शुक्र कुंभ राशि और सूर्य रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इसके चलते महंगाई बढ़ने से जनता में असंतोष के योग बन रहे हैं। चंद्र के राजा और मंत्री होने से शासक वर्ग नैतिकता पूर्ण कार्य करेगा। सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूती आएगी। धान्येश मंगल होने से महंगाई बढ़ सकती है। मेघेश सूर्य हैं, इसलिए इस वर्ष वर्षा में कुछ कमी रहेगी

मंगलवार, 18 मार्च 2014

..........काहें कि नरेन्द्र मोदी के सम्हने उऽऽ(केजरीवाल) न टिक पईंहऽऽ....

दशाश्वमेध घाट के मान मंदिर के पान ठेला पर संवाद चल रहा था (वाराणसी)

 काहें कि नरेन्द्र मोदी के सम्हने उऽऽ(केजरीवाल) न टिक पईंहऽऽ....

गुंजन महाराज जीतू सरदार से कहलन की - का गुरु आजकल नरेन्दर मोदी क जब से नाम बनारस से चुनाव लड़ले क आयेल ह तबसे सब्बो टीबी वाला इहां आवत हउवँ..

जीतू सरदार- हाँ, गुरु नरेन्दर मोदी कै हम देखली अईसन भाषन देहेलस की हम्मे लगल की जरुर महादेव एकरे कपारे पर सवार हो गयेल हउवँ...नरेन्दर मोदी बदे ही इहाँ सब टीबी वाला लाईव देखावत हउवँ।

गुंजन महाराज - का जीतू , ईइइ...केजरीवाल कवन हऽऽव गुरु , इहैँ तऽऽ लंगोट पक्का पहलवानन् क जरुरत हऽऽव, सुनत हईंऽऽ वोहू इहाँ से चुनाव लड़े बदे आवत हौंऽऽव..।

जीतू सरदार - हाँ, गुरु, घाट पर सुबैहैये आखाड़ा में दण्ड पेलत रहलीं तऽऽ लईकन मन कहत हौंव, ईऽऽ केजरीवाल कहीं नौकरी करत रहल, अब राजनीति में आऽऽ के फँस गयेल हऽऽव।
अऽऽऊर बनारस में ठण्डई पीये बदे आऽऽवत हऽऽव ,  गौदवलिया वाले गामा पान वाले क एक ठे बीड़ा खाके मन-मन्साईन करे के बाद रफू चक्कर हो जाही..

गुंजन महाराज- जीतू, तोहें एक काम करेके पड़ी ..एक दिन केजरीवाल के अखाड़ा पर ले जाके उन्हें धोबिया पाठ सिखावे के पड़ी, काहें कि नरेन्द्र मोदी के सम्हने उऽऽ न टिक पईंहऽऽ।

अब थोड़ा इधर भी........
ईऽऽ टबलेट आदरणीय चकाचक बनारसी जी क हऽऽव...खाँसी माकूल दवाई खाऽऽल...राजा..................................................................................
चेत गइल जनता त बोलऽ हे मंत्री जी फिर का करबऽ ।

दरे दरे गोड़ धरिया कइलऽ दाँत निपोरत रहलऽ मालिक,
भिखमंगई, चन्दा व्यौरा पर सच्चा जीयत रहलऽ मालिक,
कांगरेसी तू रहलऽ नाहीं झटके में बन गइलऽ मालिक,
बाप दादा भीख मंगलन, तू एम०एल०ए० हो गइलऽ मालिक,
कुर्सी निकल गइल त बोलऽ फिर केकर तू चीलम भरबऽ ॥१॥

सत्ता में अउतै तू मालिक दिव्य डुबइलऽ देश कऽ लोटिया,
दरे दरे उदघाटन कइलऽ पेड़ लगउलऽ रखलऽ पटिया,
घूसो लेहलऽ टैक्स बढ़इलऽ सबै काम तू कइलऽ घटिया,
आज देश कंगाल हो गयल, कइलऽ खड़ी देश कऽ खटिया,
खूँटा में बँधलेस जनता त कइसे खेत देस क चरबऽ ॥।२॥

पाँच बरस अस्वासस्न छोड़ के जनता के कुछ देहलऽ नाहीं,
अउर तू का देतऽ जनता के रासन तक त देहलऽ नाहीं,
सेतै देहलऽ परमिट, कोटा, लाइसेंस का लेहलऽ नाहीं ?
सच बोले का खानदान के सरकारी पद देहलऽ नाहीं ?
यदि हिसाब लेहलेस जनता त फिर केकर सोहरइबऽ धरबऽ ॥३॥

वादा पर वादा कइलऽ पर वादा पूरा कइलऽ नाहीं,
बेइमानन क साथ निभइलऽ बेइमानन के धइलऽ नाहीं,
हौ सेवा करतब हमार का भाषन में तू कहलऽ नाहीं ?
बोलऽ बे मतलब तू का दौरा पर दौरा कइलऽ नाहीं ?
मर के तू शैतानै होबऽ मरले पर तू नाहीं मरबऽ ॥४॥

जनता के भूखा मरलऽ पर हचक हचक के खइलऽ सच्चा,
कभी बाजरा कांड, कभी लाइसेंस कांड तू कइलऽ सच्चा,
तू चुनाव के जीतै खातिर तस्करवन के धइलऽ सच्चा,
सबके धर के लोकतंत्र खतरे में हौ समझउलऽ सच्चा,
सोझे संसद भंग न होई सोझे तू सब नाहीं टरबऽ ॥५॥

सोचत होबऽ अपने मन में की सब जूता नाप क हउवै,
सोचत होबऽ अपने मन में की मंत्री पद टाप क हउवै,
तनिको नाहीं सोचत होबऽ की ई कुल धन पाप क हउवै,
छोड़तऽ काहे नाहीं कुर्सी का ऊ तोहरे बाप क हउवै,
कइले चालऽ पाप एकजाई यही जनम में सब कुछ भरबऽ ॥६॥

सब कुछ छोड़बऽ सीधे-सीधे तोप चली न चली तमंचा,
जाग रहल हौ देस चकाचक रोजै होई खमची खमचा,
गिनवाई जौने दिन जनता दिव्य लगइबऽ ओ दिन खोमचा,
निश्चित भुक्खन मर जइहैं ओ दिन तोहार कुल चमची चमचा,
पाँच बरस तू रह गइलऽ त अबकी मालिक देश के गरबऽ ॥७॥

--चकाचक बनारसी

रविवार, 16 मार्च 2014

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

ब्लॉग के सभी उपस्थित जनों एवं यथायोग्य आदरणीय जनों को नमन करते हुए देश के सभी
प्रिय मित्रों सहित 'ज्योतिष का सूर्य' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के सुधी पाठकों  को..होली की हार्दिक शुभकामनाएँ   
.........................  होली आयी सतरंगी रंगों की बौछार लाई, ढेर सारी मिठाई और मीठा मीठा प्यार लाई, आप की ज़िंदगी हो मीठे प्यार और खुशियों से भरी....पुनश्च .... होली के महपर्व पर ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ.....

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

होली का शुभ मुहूर्र्त एवं होली में कौन सा रंग आपके लिए है शुभ

होली का शुभ मुहूर्र्त एवं होली में कौन सा रंग आपके लिए है शुभ 

साथ ही ग्रहों की शांति भी 

मित्रों, आप सभी को सपरिवार रंग बिरंगी होली महापर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ....

होली दहन 16 मार्च को सर्वार्थसिद्धि योग में प्रदोषकाल के दौरान होगा। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (रविवार) को रात 10 बजकर 16 मिनट के पहले होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है, क्योंकि इसके बाद पुर्णीमा समाप्त हो जायेगा। पूर्णिमा में ही होलिकादहन शास्त्र सम्मत है। होलिकोत्सव चैत्र कृष्ण प्रतिपदा सोमवार (17 मार्च) को परम्परागत रूप से मनाया जाएगा।
क्या है दुर्लभ संयोग:
होली का पर्व इस बार 17 मार्च को कई संयोग लेकर आ रहा है। होली पर चार ग्रह एक साथ वक्री होंगे। राहु और केतु सदैव वक्री रहते है। ऐसे में वतर्मान स्थिति में शनि वक्री होने के साथ-साथ राहु के साथ तुला राशि में स्थित है। शनि के अलावा मंगल भी वक्री हो गए हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो होली पर चार ग्रह शनि, मंगल, राहु और केतु वक्री रहेंगे। तुला राशि में मंगल के साथ शनि और राहु का एक साथ वक्रगति में मिलन होना शताधिक वर्षों बाद एक दुर्लभ संयोग है। होली पर इस बार मंगल, शनि और राहु की युति राजनीति के शुभ संकेत दे रही है। यह संयोग जहां एक ओर अर्थव्यवस्था में सुधार होगा वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिलेगा।
पुराणों के अनुसार:
सती से मोहभंग के बाद शास्वत शिव अखण्ड समाधि में लीन थे और इधर हिमांचल पुत्री पार्वति का शिव से विवाह और स्कन्द का पुत्र रुप में प्रकट होना तय था, ताकि उसी पुत्र स्कन्द से राक्षसों का वध हो और स्वर्गादि लोकों में राक्षसों का आधिपत्य समाप्त हो सके। शिव के अखण्ड समाधि को तोड़ने के लिए कामदेव को भेजा गया, कामदेव ने शिव पर कामबांण से शिव पर प्रहार किया। भगवान शिव का तिसरा नेत्र खुल गया जिससे सामने खड़े कामदेव भस्म हो गया तबसे होली को काम दहन दिवस के रुप में भी मनाया जाता है। नृसिंह भगवान ने असुर भक्त हिरण्यकश्यप का संहार किया था। होलाष्टक में शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं।
प्राकृतिक रंगो से ही मनायें होली :
आयुर्वेद ने प्राकृतिक रंगों में पलाश के फूलों के रंग को बहुत महत्वपूर्ण माना है। यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है। यह प्राकृतिक नारंगी रंग रक्तसंचार की वृद्धि करता है, मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक शक्ति व इच्छाशक्ति को बढ़ाता है। अत: पानी का अपव्यय न करें।
होली के रंगों के साथ ग्रहों की शांति भी:
मेष और वृश्चिक राशि वालों के लिए सूखा लाल रंग:
लाल गुलाल के स्थान पर लाल चंदन (रक्त चंदन) के पाउडर का उपयोग किया जा सकता है। व्यापार में वृद्धि और नौकरी में प्रमोशन के अलावा शिक्षण कार्य में प्रगति के लिए शुभदायक रहेगा।
वृषभ और तुला राशि वालों के लिए भूरा रंग: आँवला चूर्ण और मुलतानी मिट्टी के मिश्रण से तैयार रंग से होली खेलें और तरक्की के मार्ग को प्रशस्त करें।
मिथुन और कन्या राशि वालों के लिए सूखा हरा रंग: केवल मेंहदी पाउडर या उसे आटे में मिलाकर बनाये गये मिश्रण से होली खेलें ताकि चार ग्रहों के वक्रगति से उत्पन्न अशुभ फलों से निजात मिलेगा।
कर्क राशि वालों के लिए सफेद गुलला से हली खेलनी चाहिए, सिंह राशि वालों को सुनहले रंगों का प्रयोग करना शुभदायक रहेगा।
धनु और मीन राशि वालों के लिए सूखा पीला रंग:
चार चम्मच बेसन में दो चम्मच हल्दी पाउडर मिलाने से अच्छा पीला रंग बनता है, जो त्वचा के लिए साथ ही विवाह में विलंब अथवा दाम्पत्य जीवन में आ रहीं बाधाओं को समाप्त करता है।
मकर और कुंभ राशि वालों के लिए जमुनी रंग: चुकंदर को पानी में उबालकर पीस के बढ़िया जामुनी रंग तैयार होता है। इस रंग से होली खेलने से निश्चित ही शनि के ढ़ैया अथवा साढ़ेसाती के अलावा रुके हुए कार्य को बल मिलता है।
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक ''ज्योतिष का सूर्य'', राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, भिलाई  

शुक्रवार, 7 मार्च 2014

हे नारी तू नारायणी .......................आईए आज एक संकल्प लें

आज ८ मार्च है, और सारा विश्व नारी सशक्तीकरण का प्रतीक “अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस” मना रहा है | सर्वप्रथम तो आप सभी को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ |

हे नारी तू नारायणी .......................आईए आज एक संकल्प लें

कभी दुष्टों का संहार करने वाली माँ दुर्गा के रूप में, तो कभी ज्ञान का प्रसार करने वाली माँ सरस्वती के रूप में और कभी धन की वर्षा करने वाली माँ लक्ष्मी के रूप में – उसी नारी शक्ति को हम संसार में आने से पूर्व ही मार डालते हैं | आज उसी “देवी” को अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ाई लड़नी पड़ रही है | आज का पाखण्डी समाज अपनी “जन्मदात्री” को ही जड़ से उखाड़ फेंकने में लगा हुआ है – जो कि खुद इस समाज की जड़ है, नींव है | बेटी के नाम पर सौ-सौ कसमें खाने वाले ही आज उसे कष्ट पहुँचाने में लगे हुए हैं | और उससे भी बड़ी सच्चाई यह है कि बेटी को “पराया धन” मानने वालों ने उसे कभी ह्रदय से “अपना” माना ही नहीं | वह तो अपने माता पिता के घर तक में “दूसरे की अमानत” ही बनकर रही सदा | उनके होश सँभालते ही उन्हें बताया जाने लगता है कि उन्हें दूसरे घर जाना है | यहाँ तक कि बहुत से परिवारों में तो लड़की को उच्च शिक्षा भी केवल इसीलिये दिलाई जाती है कि वह एक योग्यता होगी अच्छा घर वर प्राप्त करने के लिये | और जैसा कि ऊपर भी लिखा है, ऐसा केवल अशिक्षित अथवा निम्न वर्ग में ही नहीं होता | बल्कि उच्च तथा शिक्षित वर्ग के लोग भी इसी परम्परा का वहन कर रहे हैं | यदि इस समस्या से मुक्ति पानी है तो सबसे पहली आवश्यकता है इस विषय में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की | भ्रूण हत्या अथवा गर्भ का लिंग परीक्षण करने वालों के क्लीनिक सील किए जाने, उनका लाइसेंस निरस्त किये जाने तथा उन पर जुर्माना किए जाने के प्रावधान की आवश्यकता है । साथ ही आवश्यकता है प्रसव पूर्व जाँच तकनीक अधिनियम १९९४ को सख्ती से लागू किए जाने की । क्योंकि हमारे देश में तो हर कानून, हर सुविधा को अपने स्वार्थ के अनुसार तोड़ना मरोड़ना लोगों को अच्छी तरह आता है | यह विडंबना ही है कि जिस देश में कभी नारी को गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाओं के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ, वहीं अब कन्या के जन्म पर उसके परिवार और समाज में दुख व्याप्त हो जाता है l सिर्फ बेटे की चाह में अनगिनत मांओं की कोख उजाड़ दी जाती है l पर क्या इस क्रूरता के लिए केवल डॉक्टर ही उत्तरदायी है जो प्रसवपूर्व लिंग जाँच करके इस हत्या को अंजाम देता है ? क्या वे माता पिता इस अपराध के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं जो सिर्फ़ और सिर्फ़ बेटा ही पाना चाहते हैं ? केवल कड़े क़ानून बनाकर ही इस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता | जब तक हम अपनी संकीर्ण मानसिकता का त्याग नहीं करेंगे तब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता l बेटी के जन्म लेते ही हम इस सोच में तो पड़ जाते हैं कि कल यह बड़ी होगी तो इसके हाथों में मेंहदी भी रचानी पड़ेगी, इसके लिए “योग्य वर खरीदने” के लिये दहेज़ का प्रबंध भी करना होगा | किन्तु उसे स्वावलम्बी और शिक्षित भी बनाना है इस विषय में बहुत कम लोग सोचते हैं | लड़कियों को घर की लक्ष्मी या देवी कह देने भर से उसे उसके अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाते l महिलाओं के सामजिक बहिष्कार के रूप में कन्या भ्रूण हत्या की समस्या आज भारत में विकराल रूप ले चुकी है और आज यह हज़ारों करोड़ रुपयों का व्यापार बन चुका है | जबकि १९९४ में लिंग जाँच करके कन्या भ्रूण को समाप्त करना सरकार की ओर से गैर कानूनी क़रार दे दिया गया है |
पर इस भयावह सत्य को झुठलाया जा सकता है, बशर्ते कि हम सब मिलकर संकल्प लें कि न तो हम गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जाँच कराएँगे और न अपने किसी परिचित या रिश्तेदार को ऐसा करने देंगे | साथ ही यह भी कि जो डाक्टर गर्भस्थ शिशु की लिंग जाँच करके कन्या भ्रूण की हत्या जैसा जघन्य अपराध करेंगे उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवाने का प्रयास करेंगे |
-पण्डित विनोद चौबे, भिलाई

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

शनि अमावस्या पर पिता (सूर्य)-पुत्र (शनि)का दुर्लभ मिलन....

शनि अमावस्या पर पिता (सूर्य)-पुत्र (शनि)का दुर्लभ मिलन....

मित्रों, नमस्कार कल शनिचरी अमावस्या है सर्वप्रथम आप सभीको ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ.....और आईए अब चर्चा करते हैं कल के महापर्व की। 
1 मार्च 2014 को शनिचरी अमावस्या है। अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव हैं और पितृदेव विश्वेदेव अर्थात सूर्य को माना गया है, आज कुंभ राशि पर सूर्य हैं साथ ही अमावस्या को भी शतभिषा नक्षत्र यानी बनती है कुंभ राशि, जिसका स्वामी शनि जो सूर्यपुत्र है, अत: आज पिता पुत्र का दुर्लभ मिलन हो रहा है, जो मिथुन, सिंह तथा तुला राशि के लिए बेहद शुभ फल देने वाले साबित होंगे। वहीं धनु, मेष तथा कर्क राशि वाले लोगों को सूर्यपुत्र शनिदेव के शरण में जाना उचित होगा साथ ही सावधानी भी बरतें।

कैसे करें शनिचरी अमावस्या पर पूजन अर्चन:

प्रात: स्नान आदि से निवृत्त हो कर भगवान शनिदेव के मंदिर जायें और काला कपड़े में बंधा हुआ नारीयल, कुछ छुट्टे पैसे, प्रसाद, सूखा फल मेवा आदि का भोग लगाकर,अगरबत्ती (धूप), दीप से पूजन करने के बाद शनि सोतोत्र का पाठ करना चाहिए। तत्पश्चात् सरसों के तेल का दान करना चाहिए। तैलाभिषेक का महत्त्व काफी महत्त्वपूर्ण बताया गया है धर्म शास्त्रों में। इससे कुण्डली में शनि जनित दोष, साढ़ेसाती, ढ़ैय्या अथवा शनि से उत्पन्न शारीरिक विकलांगता, शिक्षा में अरुचि, भत पिशाचादि बाधा, पति-पत्नि में पारस्परीक मतभेद, व्यापारिक नुकासान तथा नशे की लत से पागलपन आदि में राहत मिलती है।

इसके अलावा हनुमानजी के मंदिर में 49 बार हनुमान चालिसा का पाठ करना भी शनि जनित दोषों से मुक्ति मिलती है। सूर्यपुत्र शनि के इस दुर्लभ मिलन और परस्पर नवपंचम योग से प्रभावित राशि वालों को एकादशमुखी हनुमत्कवच का पाठ करने के बाद हनुमानजी को गुड़, देशी से बना हुआ रोट का भोग लगाना चाहिए।
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, शांतिनगर, भिलाई

सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

कई दुर्लभ संयोग बन रहा है महाशिवरात्रि पर्व पर....शिवसंकल्पमस्तु

कई दुर्लभ संयोग बन रहा है महाशिवरात्रि पर्व पर....शिवसंकल्पमस्तु

इस बार महाशिवरात्रि 27 फरवरी 2014 को शनि तथा सूर्य परस्पर नवपंचम योग बना रहा है, साथ ही श्रवण नक्षत्र, और त्रयोदशी के उपरान्त गुरुवार को ही सायं 6 बजकर 20 मिनट से चतुर्दशी तिथि आरंभ हो रही है, जो आगामी यानी 28 ता. के अपराह्न 4बजकर34 मिनट तक अतः इसबार 27 फरवरी को कई दुर्लभ संयोग समेटे त्योहार (महापर्व) है। शिव सानिध्य की पूर्णता की ओर इशारा कर रहा है। आईए विस्तृत चर्चा करते हैं....

नमस्ते हरसे शोचिषे नमस्तेऽअस्वचिषे।
अन्यौस्तेऽअस्मन्तपन्तु हेतय: पावकोऽअस्मभ्य ॐ शिवो भव।।

हे परमेश्वर। आपके दुखहर्ता स्वरूप को नमन है, आपके ज्ञाता स्वरूप को नमन है, आपके प्रकाशदाता स्वरूप को नमन है। आपकी दंड व्यवस्था हमसे भिन्न दूसरे दुष्ट पुरुषों के लिए तपाने वाली हो और आपका पवित्र स्वरूप हमारा कल्याण करें।।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इस संबंध में एक पौराणिक कथा भी है। उसके अनुसार-
भगवान विष्णु की नाभि से कमल निकला और उस पर ब्रह्माजी प्रकट हुए। ब्रह्माजी सृष्टि के सर्जक  हैं और विष्णु पालक। दोनों में यह विवाद हुआ कि हम दोनों में श्रेष्ठ कौन है? उनका यह विवाद जब बढऩे लगा तो तभी वहां एक अद्भुत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। उस ज्योतिर्लिंग को वे समझ नहीं सके और उन्होंने उसके छोर का पता लगाने का प्रयास किया, परंतु सफल नहीं हो पाए। जब दोनों देवता निराश हो गए तब उस ज्योतिर्लिंग ने अपना परिचय देते हुए कहां कि मैं शिव हूं। मैं ही आप दोनों को उत्पन्न किया है।
तब विष्णु तथा ब्रह्मा ने भगवान शिव की महत्ता को स्वीकार किया और उसी दिन से शिवलिंग की पूजा की जाने लगी। शिवलिंग का आकार दीपक की लौ की तरह लंबाकार है इसलिए इसे ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। एक मान्यता यह भी है कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही शिव-पार्वती का विवाह हुआ था इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

कारोबार वृद्धि के लिए
महाशिवरात्रि के सिद्ध मुहर्त में पारद शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठित करवाकर स्थापित करने से व्यवसाय में वृद्धि व नौकरी में तरक्की मिलती है।

बाधा नाश के लिए
शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर निम्न मंत्र का जाप करने से समस्त बाधाओं का शमन होता है। ॥ ॐ तुत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात्॥

बीमारी से छुटकारे के लिए
शिव मंदिर में लिंग पूजन कर दस हज़ार मंत्रों का जाप करने से प्राण रक्षा होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला पर करें।

शत्रु नाश के लिए
शिवरात्रि को रूद्राष्टक का पाठ यथासंभव करने से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। मुक़दमे में जीत व समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।

मोक्ष के लिए
शिवरात्रि को एक मुखी रूद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करवाकर धूप-दीप दिखा कर तख्ते पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। शिव रूप रूद्राक्ष के सामने बैठ कर सवा लाख मंत्र जप का संकल्प लेकर जाप आरंभ करें। जप शिवरात्रि के बाद भी जारी रखें। ॐ नम: शिवाय। 

चार प्रहर की पूजा 
''प्रथम प्रहर संध्या 6:30 से 7:30 तक।। द्वितीय प्रहर 09:20 से 10:20 तक।। तृतीय प्रहर अद्र्धरात्रि 12:10 से 01:10 तक।। चतुर्थ प्रहर 04:30 से 05:30 तक।।''
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