ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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मंगलवार, 27 नवंबर 2012

क्यों मनाते हैं कार्तिक पुर्णिमा...???

Pandit Vinod Choubey

ज्योतिषाचार्य पं. विनोद चौबे, संपादक, ''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, भिलाई..।27/11/2012
मित्रों नमस्कार, कल कार्तिक पुर्णिमा है, आप सभी को ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ....आईए थोड़ी बहुत भगवद् चर्चा की जाय...।

क्यों मनाते हैं कार्तिक पुर्णिमा...???

कार्तिक पूर्णिमा
हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष पंद्रह पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर १६ हो जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है । इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फाल मिलता है।

पौराणिक और लोककथाएँ
पुराणों में

इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए तथा सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।
महाभारत में

महाभारत काल में हुए १८ दिनों के विनाशकारी युद्ध में योद्धाओं और सगे संबंधियों को देखकर जब युधिष्ठिर कुछ विचलित हुए तो भगवान श्री कृष्ण पांडवों के साथ गढ़ खादर के विशाल रेतीले मैदान पर आए। कार्तिक शुक्ल अष्टमी को पांडवों ने स्नान किया और कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी तक गंगा किनारे यज्ञ किया। इसके बाद रात में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दीपदान करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का और विशेष रूप से गढ़मुक्तेश्वर तीर्थ नगरी में आकर स्नान करने का विशेष महत्व है।
मान्यता

मान्यता यह भी है कि इस दिन पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में वृषदान यानी बछड़ा दान करने से शिवपद की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति इस दिन उपवास करके भगवान भोलेनाथ का भजन और गुणगान करता है उसे अग्निष्टोम नामक यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस पूर्णिमा को शैव मत में जितनी मान्यता मिली है उतनी ही वैष्णव मत में भी।
वैष्णव मत में

इसमें कार्तिक पूर्णिमा को बहुत अधिक मान्यता मिली है इस पूर्णिमा को महाकार्तिकी भी कहा गया है। यदि इस पूर्णिमा के दिन भरणी नक्षत्र हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। अगर रोहिणी नक्षत्र हो तो इस पूर्णिमा का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। इस दिन कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और बृहस्पति हों तो यह महापूर्णिमा कहलाती है। कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो "पद्मक योग" बनता है जिसमें गंगा स्नान करने से पुष्कर से भी अधिक उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। इस दिन किये जाने वाले अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन जो भी दान किया जाता हैं उसका कई गुणा लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में उसे पुनःप्राप्त होता है।

शास्त्रों में वर्णित है कि कार्तिक पुर्णिमा के दिन पवित्र नदी व सरोवर एवं धर्म स्थान में जैसे, गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
स्नान और दान विधि

महर्षि अंगिरा ने स्नान के प्रसंग में लिखा है कि यदि स्नान में कुशा और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फल की प्राप्ति नहीं होती है। शास्त्र के नियमों का पालन करते हुए इस दिन स्नान करते समय पहले हाथ पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें, इसी प्रकार दान देते समय में हाथ में जल लेकर दान करें। आप यज्ञ और जप कर रहे हैं तो पहले संख्या का संकल्प कर लें फिर जप और यज्ञादि कर्म करें।

सोमवार, 5 नवंबर 2012

इख लख पुत सवालख नाती ता रावण घर दिया न बाती...

इख लख पुत सवालख नाती ता रावण घर दिया न बाती...
लगता नितीन गडकरी जी का समय खराब चल रहा है...या मीडिया उनके पिछे पड़ी है ये साफ नहीं है...। परन्तु इतना जरूर है कि भगवा आतंक कहने वाली कांग्रेस अब उसी भगवा धारी स्वामी विवेकानन्द जी के भक्त बन गई है..। इतना परिवर्तन कांग्रेस का बगुला भक्ति ही कहा जा सकता है..। बाकि कभी कांग्रेसी भगवा आतंक कह कहकर देश के छोटे बड़े सभी सन्तों को एक लाईन में खड़ी कर दिये थे। और यह तब हुआ था जब देश के गृहमंत्री श्रीमान पी.चिदम्बरम जी थे। उस समय तो भगवा आतंक कहने के पहले यह बयान जारी नहीं किया कि स्वामी विवेकानन्दजी को छोड़कर बाकि सभी भगवा धारी आतंकी गतिविधियों में संलिप्त हैं। देश की जनता सब जानती है...श्री मनीष तिवारी जी आप लोगों का घमंड शिर चढ़कर बोल रहा है...लेकिन बोलने और गरजने में अन्तर होता है ..जैसे की इस समय नरेन्द्र मोदी जी हमेशा गरजते रहते हैं...। शायद ऐसी गर्जना कांग्रेस के किसी अन्य नेता में हो। अभी तो अरविन्द-अमोघ अस्त्र, स्वामी सुब्रह्मण्यम स्वामी का आग्न्येयास्त्र, बाबा रामदेव का वरुणास्त्र, अन्ना हजारे जी का इकतीस फणीश बांण कब तक बर्दाश्त कर पाओंगे। वह दिन दूर नहीं कि ''इख लख पुत सवालख नाती ता रावण घर दिया न बाती''..की प्रांसंगिकता कांग्रेस पर फिट बैठ जाये।

शनिवार, 3 नवंबर 2012

मुहूर्त- मंगल-पुष्य नक्षत्र, धनतेरस एवं दीपावली के सभी मुहूर्त



''   मित्रों, प्रिय पाठकों एवं ज्योतिष का सूर्य राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के नियमीत पाठकों हालाकि इस बार का अंक दीप-पर्व विशेषांक था जिसमें महालक्ष्मी-पूजन व शुभ मुहूर्तों के बारे में विस्तृत चर्चा की गई है, किन्तु जिन पाठकों तक यह अंक नहीं पहुँच पाया है उन्हें इस ब्लाग के माध्यम से आप सभी को सादर समर्पित है। सर्व प्रथम आप सभी को दीप पर्व पर ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ....। और अब चर्चा करते हैं महा लक्ष्मी जी के प्रसन्नार्थ पूजन के लिए शुभ मुहूर्तों के लिए, मुझे विश्वास है, आप इससे अवश्य लाभान्वित होंगे।''


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