ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

!!विशेष सूचना!!
नोट: इस ब्लाग में प्रकाशित कोई भी तथ्य, फोटो अथवा आलेख अथवा तोड़-मरोड़ कर कोई भी अंश हमारे बगैर अनुमति के प्रकाशित करना अथवा अपने नाम अथवा बेनामी तौर पर प्रकाशित करना दण्डनीय अपराध है। ऐसा पाये जाने पर कानूनी कार्यवाही करने को हमें बाध्य होना पड़ेगा। यदि कोई समाचार एजेन्सी, पत्र, पत्रिकाएं इस ब्लाग से कोई भी आलेख अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क कर अनुमती लेकर ही प्रकाशित करें।-ज्योतिषाचार्य पं. विनोद चौबे, सम्पादक ''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका,-भिलाई, दुर्ग (छ.ग.) मोबा.नं.09827198828
!!सदस्यता हेतु !!
.''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के 'वार्षिक' सदस्यता हेतु संपूर्ण पता एवं उपरोक्त खाते में 220 रूपये 'Jyotish ka surya' के खाते में Oriental Bank of Commerce A/c No.14351131000227 जमाकर हमें सूचित करें।

ज्योतिष एवं वास्तु परामर्श हेतु संपर्क 09827198828 (निःशुल्क संपर्क न करें)

आप सभी प्रिय साथियों का स्नेह है..

शनिवार, 5 नवंबर 2011

आज जागेंगे देव, तुलसी विवाह कल

आज जागेंगे देव, तुलसी विवाह कल
निर्मल साहू ,सिटी रिपोर्टर . भिलाई 
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की अलग-अलग तारीखों से न हों भ्रमित 
देवोत्थापनी एकादशी की शुभकामनाओं के साथ मित्रों एक महत्त्वपूर्ण जानकारी मैं आप सभी को देना चाहूंगा, जो आज के सीटी भास्कर समाचार पत्र में प्रकाशित भी हुआ है. आज प्रबोधिनी एकादशी का व्रत रहें और कल करें तुलसी पुजा(शालीग्राम-तुलसी विवाह) देवउठनी एकादशी 6 नवंबर को है और तुलसी विवाह यानी छोटी दिवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी। पंडितों का कहना है कि तिथि को लेकर लोग असमंजस में न रहें। रविवार को एकादशी व्रत रखें और सोमवार को धार्मिक विधि-विधान से तुलसी का विवाह रचाकर नारायण की आराधना करें और धूमधाम से छोटी दिवाली मनाएं। आमतौर पर देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह एक ही दिन मनाते रहे हैं। इस बार दोनों अलग-अलग तिथि को है, इसके कारण लोग भ्रमित हो गए हैं। पंडित विनोद चौबे का कहना है कि असमंजस में न रहें। यह पंचांग भेद नहीं बल्कि शास्त्र सम्मत है। लगभग सभी पंचांगों में रविवार को देवउठनी यानी प्रबोधिनी एकादशी और सोमवार को तुलसी विवाह है। छह घटी तक एकादशी तिथि के पश्चात अगर द्वादशी हो तो उस दिन दोनों उत्सव एक साथ मना सकते हैं। रविवार को एकादशी 4 बजकर 36 मिनट तक है यानी 6 घटी से अधिक है और परिपूर्ण है। चंूकि यहां उदया तिथि की मान्यता है रविवार को द्वादशी नहीं मानी जाएगी। पंडित चौबे का कहना है कि शास्त्र के अनुसार एकादशी के पारणा के बाद यानी द्वादशी को ही तुलसी विवाह होना चाहिए। इसलिए यह तिथि बिलकुल शास्त्र सम्मत है। मान्यता या परंपरा की बात नहीं है। भागवताचार्य उमेश भाई जानी का भी ऐसा ही कहना है। जन्मभूमि पंचांग का हवाला देते हुए वे बताते हैं कि इस बार एकादशी और तुलसी विवाह दोनों अलग-अलग तिथि को है। चार माह से शयन कर रहे नारायण रविवार को जाग जाएंगे। इसके बाद से विवाह, वास्तु पूजा व गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। http://epaper.bhaskar.com/mpcg/epapermain.aspx?eddate=11/6/2011&edcode=119 
- ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे ,भिलाई (छ.ग.)

कोई टिप्पणी नहीं:

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.