ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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बुधवार, 7 दिसंबर 2011

10 दिसंबर को होने वाले पूर्ण चंद्रग्रहण का शुभाशुभ प्रभाव :

10 दिसंबर को होने वाले पूर्ण चंद्रग्रहण का शुभाशुभ प्रभाव :
ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे , 09827198828, भिलाई, दुर्ग (छ.ग.)
मित्रों, मार्गशीर्ष (अगहन)मास की पूर्णिमा पर 10 दिसंबर को पूर्णचंद्रग्रहण होने जा रहा है। इस साल का दूसरा पूर्ण भारत के लोगों को 51 मिनट तक इस खगोलीय नजारे को देखने का अनूठा अवसर मिलेगा। अगर ज्योतिषीय गणना के आधार पर देखा जाय तो चंद्रग्रहण का प्रभाव आगामी छह महीने तक बने रहने की उम्मीद है, जिससे सभी राशियां प्रभावित होंगी लेकिन रोहिणी-मृगशिरा नक्षत्र वृष राशि पर खास प्रभाव छोड़ेगा।
छत्तीसगढ़ के रायपुर (राजधानी) में ग्रहण का स्पर्श समय शाम 6.16 बजे होगा, और मध्य 08:02मिनट पर होगा वहीं ग्रहण का मोक्ष रात 9.48 बजे होगा। शनिवार को दिन में ग्रहण का सूतक 9.15 बजे से लगेगा। ग्रहण काल में भोजन ग्रहण नहीं किया जाता और अन्न-जल इत्यादि खाद्य वस्तुओं में तुलसी के पत्ते या कुशा रखी जाती है। इस काल में मंदिरों में आरती नहीं की जाती।

चंद्रग्रहण से होगी हलचल : - चंद्रग्रहण के कारण बाजारों में हलचल रहेगी। दालें, बाजरा, तिल, सरसों, अलसी, सोयाबीन के भाव बढ़ेंगे। खाद्यान्न महंगे होंगे। सोना की कीमतों में गिरावट आएगी, वहीं चांदी के भाव बढ़ सकते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में उथल-पुथल रहेगी। हालांकि जनता के हित में काम हो सकता है। छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलों में वृद्धी, देश के केंद्रीय सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की मुश्किले बढऩे वाली हैं, वहीं अन्ना हजारे के लोकपाल पर ज्योतिषीय गणना के आधार पर देखा जाय तो आगामी तीन माह तक लोकपाल बील पारीत होने की संभावना नहीं दीख रही है। वहीं यदि व्यापक चर्चा की जाय तो चंद्रग्रहण ज्योतिषीय मतानुसार वृषभ पर लग रहा है. वृषभ राशि पृथ्वी के अद्र्धोन्नत पृष्ठ तल पर पड़ती है. गणना के अनुसार पृथ्वी का लगभग 64 हजार किलोमीटर का क्षेत्रफ ल ग्रहण के दौरान चन्द्रमा के प्रकाश से महरूम रहेगा. ग्रहण के दौरान चन्द्रमा के ठीक पीछे गुरु एवं इससे लगभग 61 अंश क़ी दूरी पर ठीक आगे मंगल है. चन्द्रमा मृगशीरा नक्षत्र, सूर्य ज्येष्ठा, मंगल पूर्वाफ ाल्गुनी, वक्री बुध अनुराधा, वक्री गुरु अश्विनी, शुक्र पूर्वाषाढा, शनि चित्रा, राहू ज्येष्ठा एवं केतु रोहिणी नक्षत्र में रहेगा. विश्व के लिए इसका फ ल निम्न प्रकार प्राप्त होगा।
कुलमिलाकर देश में एक बार फिर बड़ा जनांदोलन होने के योग दिख रहें हैं अभी अभी सरकार को विदेशी निवेश पर अपनी अनुमती देने के बाद काफी विरोध झेलना पड़ा है, अंतत: अपना पैर पिछे करने को मजबूर हो गयी जिससे राजनितिक बहुत छिछालेदर झेलना पड़ रहा है, जो आगामी छ: माह तक अभी जारी रहने के आसार हैं...मध्य भारत पर अत्यधिक प्रभाव पडऩे वाला है, जिससें मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ दोनों ही भाजपा शासीत राज्य हैं, और दोनो ही राज्यों के सत्ताधारी पार्टी पर कु-प्रभाव पड़ेगा अत: घोटाले जैसे संगीन आरोप बड़े पदों पर बैठे प्रदेश के शिर्षस्थ नेता इन आरोपों के चपेट में रहेंगे। बाकी देश के कुछ हिस्सों में भी इसका कु-प्रभाव देखने के मिलेगा जैसे उ.प्र., उड़ीसा आदि। विश्व मानचित्र पटल पर इस चंद्रग्रहण का प्रभाव कुछ इस प्रकार रहेगा.. सम्पूर्ण यवन प्रदेश (मुस्लिम शासित देश जैसे इरान, इराक, बहरीन, कुवैत, ओमान, जेद्दा, दोहा, अल्जीरिया, लीबिया, इजराईल आदि), अफ्रि का का मध्य भाग जैसे जाम्बिया, घाना, इथोपिया, सोमालिया तथा केमरून आदि प्रदेश, तथा उत्तरी अमेरिका के दक्षिणी पश्चिमी प्रांत, चीन के सूदूरवर्ती पूर्वी प्रदेश अज्ञात बीमारी, नरसंहार एवं उग्र प्राकृतिक विपदा से गुजरेगें।


ग्रहण में क्या करें क्या ना करें :
शास्त्रोक्त मतानुसार ग्रहण के स्पश के पूर्व तीर्थ स्नान करना चाहिए, और ग्रहण मोक्ष के पश्चात श्वेत वस्त्र, गर्म कपड़े, काला कंबल, छाता, उड़द, इमरती, तिल, गुड दान करने और पवित्र नदी में स्नान करने से ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। धर्म सिन्धु के अनुसार, ग्रहण मोक्ष उपरान्त पूजा पाठ, हवन- तर्पण, स्नान, छाया-दान, स्वर्ण-दान, तुला-दान, गाय-दान, मन्त्र- अनुष्ठान आदि श्रेयस्कर होते हैं। ग्रहण मोक्ष होने पर सोलह प्रकार के दान, जैसे कि अन्न, जल, वस्त्र, फल आदि जो संभव हो सके, करना चाहिए।ग्रहण के समय स्नानादि करने के पश्चात अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए. चन्द्र ग्रहण पर भगवान चन्द्र की पूजा करनी चाहिए. चन्द्र के मंत्रों का जाप करना चाहिए. जिसकी जो श्रद्धा है उसके अनुसार पूजा-पाठ, वैदिक मंत्रों का जाप तथा अनुष्ठान आदि करना चाहिए. ग्रहण के दौरान ही अन्न, जल, धन, वस्त्र, फल आदि का अपनी सामथ्र्य अनुसार दान देना चाहिए. ग्रहण समय में पवित्र स्थलों पर स्नान करना चाहिए. इस दिन प्रयाग, हरिद्वार, बनारस आदि तीर्थों पर स्नान का विशेष महत्व होता है.
धर्मसिन्धु के अनुसार ग्रहण काल में स्पर्श के समय स्नान, ग्रहण काल में मध्य समय में होम तथा देवपूजन करना चाहिए. ग्रहण मोक्ष के समय में पितरों का श्राद्ध करना चाहिए. अन्न, वस्त्र, धन आदि का अपनी क्षमतानुसार दान करना चाहिए. ग्रहण जब पूर्ण रुप से समाप्त हो जाए तब फिर स्नान करना चाहिए. यह सभी क्रम से करना चाहिए.
सूतक व ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, निद्रा, तैल, श्रंगार आदि करना वर्जित होता है. झूठ-कपटादि, वृ्था- अलाप आदि से परहेज करना चाहिए. वृ्द्ध, रोगी, बालक व गर्भवती स्त्रियों को यथानुकुल भोजन या दवाई आदि लेने में दोष नहीं लगता है.भारतीय शास्त्रों में ग्रहण काल में कुछ कार्यों के बारे में बताया गया है जिन्हें ग्रहण समय में नहीं करना चाहिए. इस समय गर्भवती महिलाओं को चाकू का उपयोग नहीं करना चाहिए. सब्जी तथा फलों को नहीं काटे. पापड़ भी नहीं सेंकना चाहिए. उत्तेजित पदार्थों से दूर रहना चाहिए. इस दौरान संभोग नहीं करना चाहिए. माँस तथा मदिरा का परहेज करना चाहिए.
मित्रों व प्रबुद्ध पाठकों . ग्रहण का प्रभाव ग्रहण लगने के 15 दिन तक देखा जा सकता है. सभी राशियों पर इस खग्रास चन्द्र ग्रहण का प्रभाव निम्न होगा :-
मेष राशि—
आपके राशि के दूसरे स्थान में चंद्र ग्रहण हो रहा है। जातकों को धन हानि उठानी पड़ सकती है. घर में कलह-क्लेश का सामना करना पड़ सकता है. घर के सुख में अथवा माता के सुख में कमी रह सकती है.
वृष राशि —
आपके राशि पर ही यह ग्रहण पूर्ण रूप से हो रहा है। यह ग्रहण वृष राशि में लगने के कारण इन जातकों को शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है. स्वास्थ्य खराब अथवा चोट आदि भी लग सकती है.
मिथुन राशि —
इस राशि के जातकों को धन हानि हो सकती है. लाभ में कमी बनी रह सकती है. अकारण खर्चों में बढोतरी हो सकती है. आमदनी कम तो व्यय अधिक होगा.
कर्क राशि —
कर्क राशि के जातकों को निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह ग्रहण उनके लिए धन लाभ देने वाला है. उन्हें आकस्मिक लाभ हो सकता है.
सिंह राशि—-
सिंह राशि के जातकों को गुप्त चिन्ता बनी रह सकती है. इन्हें अपनी चिन्ताओं को किसी के साथ अवश्य बाँटना चाहिए.
कन्या राशि—-
कन्या राशि के जातकों को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि उन्हें अपमान का सामना करना पड़ सकता है. इन्हें शत्रु भय भी सता सकता है.
तुला राशि—
इन जातकों को सुख की प्राप्ति होगी. गुप्त रुप से लाभ में वृद्धि होगी. राह की बाधाएँ दूर होगीं.
वृश्चिक राशि —-
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण कुछ कष्टकारी हो सकता है. इस ग्रहण का प्रभाव इनके दाम्पत्य जीवन पर पड़ेगा. घर में कलह अथवा जीवनसाथी का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय बन सकता है.
धनु राशि—-
इस राशि के जातकों को शारीरिक रोगों का सामना करना पड़ सकता है. इससे मन भी दुखी रहेगा.
मकर राशि —–
मकर राशि के जातकों को संतान से कष्ट अथवा संतान को कष्ट हो सकता है. इन्हें सभी क्षेत्रों में सावधान रहना चाहिए, क्योंकि इन्हें मानहानि का सामना करना पड़ सकता है.
कुम्भ राशि—-
इन जातकों के सभी मनोरथ पूर्ण होने की संभावना बनती है. मनोवांछित कार्य सिद्ध होगें.
मीन राशि —-
मीन राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण शुभफलदायी रहेगा. इन्हें धन लाभ होगा. छोटे भाई-बहनों की ओर से सुख की प्राप्ति हो सकती है.
व्यक्तिगत रूप में जिनका जन्म रोहिणी एवं मृगशिरा नक्षत्र में हुआ है तथा कुंडली में विंशोत्तरी महादशा किसी प्रबल षष्ठेश, अष्टमेश या द्वादशेश क़ी चल रही हो तो कृपया मानसिक रूप से भयंकर हानि एवं कष्ट का सामना करने के लिए तैयार रहे. किन्तु यदि शुभ लग्नेश, पंचमेश, नवमेश या द्वादशेश क़ी महादशा चल रही हो तो थोड़ी बहुत परेशानी ही होगी. उत्तरा फाल्गुनी एवं हस्त नक्षत्र में जन्म लेने वालो को पारिवारिक क्लेश का सामना करना पडेगा. चित्रा एवं स्वाती नक्षत्र वालो को अपमान एवं पदावानती झेलनी पड़ेगी. ज्येष्ठा नक्षत्र जातको को पति/पत्नी तथा बच्चो से घृणा या अपमान मिलेगा. शेष नक्षत्र में जन्म लेने वाले सामान्य रूप से ही रहेगें. पुष्य एवं अश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वालो को शुभ सन्देश एवं सफलता के अलावा धन लाभ का भी बहुत बड़ा अवसर मिलेगा. उत्तरभाद्रपद, रेवती, पूर्वाफाल्गुनी एवं मघा नक्षत्र में जन्म लेने वाले सुख एवं उन्नति प्राप्त करेगें. कुंडली में जिसकी बुध एवं चन्द्रमा क़ी दशान्तार्दाशा चल रही होगी उन्हें भी विशेष सावधानी क़ी ज़रुरत है.
ऊपर जिनके लिए ग्रहण का फल अशुभ बताया गया है उन्हें चाहिए कि ग्रहण के दौरान समूल कुश, मंजरी समेत तुलसी के पत्ते, लाल चन्दन क़ी एक छोटी लकड़ी, हाथी के पूंछ का एक या दो बाल, अरोघ्नी, देवरस एवं निवारू साथ में रखे. इसे शास्त्रों में "सप्तार्क" कहा गया है. जब तक जगे है तब तक तो इन सब को पाकिट में ग्रहण के दौरान रखें. जब ग्रहण समाप्त हो जाय तो इन सब को स्वच्छ शुद्ध जल में ड़ाल कर स्नान कर लें. अगले दिन सूरज निकलने पर फिर इन सब को कही ज़मीन में दबा दें या कही बहते जल में ड़ाल दें. इससे ग्रहण का कुप्रभाव दूर होता है।
ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे , 09827198828, भिलाई, दुर्ग (छ.ग.)

1 टिप्पणी:

Ramesh chnadra ने कहा…

aapne bahut achhi jankari di iske liye dhanywad.

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