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मंगलवार, 9 अगस्त 2011

बंधक प्रधानमंत्री “बंधन” तोड़ो !!

Author:   कुशल सचेती

अलवर

बंधक प्रधानमंत्री “बंधन” तोड़ो !!



क्या इस मुल्क की किस्मत में बंधक प्रधानमंत्री लिखा हुआ है जिसे अपने मंत्रियो से लेकर उनके विभागों तक का फैसला करने का अधिकार ना हो ! क्या यह मुल्क ऐसे गृहमंत्री की रहनुमाई में खुद को महफूज़ रख सकता है जो सीना तान कर यह कहे कि मुम्बई में हुआ आतंकवादी हमला खुफिया तंत्र की चूक इसलिए नही है क्यों कि गुप्तचर एजेंसियों को ऐसे किसी हमले की पहले से कोई जानकारी ही नही थी ? क्या यह मुल्क ऐसे नोसिखिये सियासत दां होने का दावा करने वाले नई पीढ़ी के नुमाइंदों की सरपरस्ती कबूल कर सकता है जो छाती चौडी करके यह कहते है कि आतंकवादी हमलों के साथ जीना सीखना होगा क्योकि इन्हें पूरी तरह खत्म नही किया जा सकता ? क्या यह मुल्क ऐसे कांग्रेसियों के भरोसे अपना रास्ता तय कर सकता है जो यह कहे कि हिन्दोस्तान में दहशतगर्दी पाकिस्तान से कम है ! मै इन  कांग्रेसियों को चेतावनी देता हूँ कि वे अब इस नई सदी में खानदानी विरासत की राजनीति का लोभ छोड़ कर खुद को भीतर से मजबूत करे और इस देश के लोगो को वो लोकतंत्र दे जिसका वायदा आजादी हासिल करते समय महात्मा गांधी और पं.नेहरू ने लोगो के साथ किया था | आखिरकार इस मुल्क के लोग कब तक पं नेहरू की देश सेवा और कुर्बानियों के ‘मूलधन’ का ‘ब्याज’ चुकाते रहेंगे और मुगलिया सल्तनत की तर्ज़ पर बादशाह के बेटे को बादशाह बनाते रहेगे ? इस देश का पट्टा किसी खास खानदान के नाम लोगो ने नही लिख दिया है कि वे अपने उन हकूको को गिरवी रख दे जो उन्हें इस मुल्क के संविधान ने दिए है | सरकार का ठेका किसी खास पार्टी या खानदान को लोकतंत्र में नही दिया जा सकता | बेशक डा. मनमोहनसिंह लोगो द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री नही है मगर वह हमारे देश के संविधान के अनुरूप पूरे वजीरे आजम है | उनके इस इस अधिकार को दुनिया का कोई भी व्यक्ति चुनौती नही दे सकता कि वः किस व्यक्ति को अपने मंत्रमंडल में शामिल करे और किसे बाहर करे | सरकार चलाना पार्टी अध्यक्ष का काम बिलकुल नही है और ना ही प्रधानमंत्री के सरकारी कामो में किसी प्रकार का दबाव बनाना उसके अधिकार क्षेत्र में आता है मगर देखिये मनमोहन सरकार को कैसे परदे के पीछे से हांका जा रहा है |
आखिरकार इस देश के प्रधानमंत्री को बेअख्तियार दिखा कर कांग्रेसी क्या पूरी दुनिया को यह पैगाम नही दे रहे है कि हुकूमते हिन्दोस्तान केवल उनकी कठपुतली है और परदे के पीछे से वे जैसे चाहेगे उसे नाचायेगे | सोचना मनमोहन सिंह को है कि वह निजी तौर पर एक ईमानदार व्यक्ति होते हुए किस तरह बेईमानों के हित साधने के लिए मोहरा बना दिए गए है | सोचना इस देश के संवैधानिक प्रधानमंत्री को है कि किस तरह कुछ लोग उन्हें अपने अहसानो के साये तले दबा कर पूरे मुल्क को अँधेरे में डुबोना चाहते है | इसकी बागडोर ऐसे नौसिखए के हाथ में देना चाहते है जिसे यह तक मालूम ना हो कि दहशतगर्दी हिन्दोस्तान के वजूद में शुरू से कभी नही रही | मगर देखिये क्या क़यामत है कि इस मुल्क में दहशतगर्दी फैलाने वालो के इलाके आजमगढ़ को नवजात कांग्रेसी दिग्विजय सिंह ने तीर्थ स्थल बना दिया | आखिरकार कोई तो सीमा होगी वैचारिक खोखलेपन की कि भारत की तुलना उस पाकिस्तान से की जाए जो पूरी दुनिया में दहशतगर्दी की खेती करने वाला उपजाऊ मुल्क बना हुआ है | क्या इस मुल्क की सियासत को पाकिस्तान की तर्ज पर चलाने की ये कांग्रेसी सोच रहे है जंहा मज़हब के नाम पर लोगो का क़त्ल किया जाता हो, उससे भारत की तुलना की जा रही है | यह दहशतगर्दी फैलाने वालो के मन-माफिक बात होगी क्यों कि उनका इरादा ही यह है कि भारत की गंगा-जमुनी गुलदस्ता तहजीब को खून की नदियों से सींचे मगर इसे रोकेगा कौन ?? यह काम मनमोहन ही कर सकते है और ‘बाँसुरी’ छोड़ कर आज के इस राजनीतिक महाभारत के ‘कुरुक्षेत्र’ में अपना ‘विराट’ स्वरूप दिखा कर सुतार्शन चक्र धारण करके अपने ही ‘परिवार’ के कौरवो का विनाश करने प्रण ले सकते है | हिम्मत है तो उठो औए पांचजन्य फूंक कर सत्ता के कौरवो का विनाश करो |
“मत पूछ क्या हाल है मेरा तेरे आगे,
तू देख क्या रंग है तेरा मेरे पीछे”

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