ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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गुरुवार, 3 अगस्त 2017

फलित ज्योतिष में 'काहल योग' और 'एनडीए क्वालिफॉई के बावजूद सलेक्शन न होना' और अब 'आईएस' की तैयारी.......

फलित ज्योतिष में 'काहल योग' और 'एनडीए क्वालिफॉई के बावजूद सलेक्शन न होना' और अब 'आईएस' की तैयारी.......

 

भारी उमस भरी ऊफ्फ ये गर्मी, दूर दूर तक बारीष की कोई उम्मीद नहीं शाम के ७ बजे का वक्त था ! कल यानी ३ अगस्त २०१७ को शांतिनगर, भिलाई स्थित अपने निवास पर 'मां बगलामुखी पीठ' पर आसन जमाये बैठा था ! तभी रोज की भांति ज्योतिष परामर्श हेतु भींड़ बढती ही जा रही थी, उसी दौरान सहसा एक सज्जन बालोद से पहुंचे मैंने उनको सबसे पहले बुलाया, जबकी वरीयता क्रम में उनका सातवां नम्बर था! किन्तु मुझे उनकी व्याकुलता मुझे बरबस आकर्षित कर रही थी, अन्तत: मैने उन्हीं को बुलाया और चर्चा आरंभ हुई, वे सेना से रिटायर्ड ऑफिसर थे वे अपने बच्चे 'नीरज' की जन्मपत्रिका समीक्षा हेतु लाये थे !  मैंने नीरज के जन्मांक में 'अनुदित कालसर्प दोष' तो देखा जो अप्रभावी था,  साथ ही उच्च राशि का सूर्य तीसरे भाव में देख हमारी वांछे खिल उठीं क्योंकि एकबारगी मुझे लगा कि ''मैं भावी आईएस अधिकारी की कुण्डली का समीक्षा" कर रहा हुं... तभी नज़र पड़ी वॄहस्पति पर .....जो क्षीण चंद्र की युती कर पंचमस्थ है, साथ ही उसकी कुण्डली में बनने वाले 'काहल योग' पर जाकर हमारी नज़र टीक गई...आखिरकार 'नीरज' एनडीए क्वालिफाई करने के बावजूद ऐन वक्त पर वहां सलोक्शन क्यों नहीं हो सका..? और अब दिल्ली के किसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में 'आईएस की तैयारी: कर रहा है किंतु सफलता क्यों नहीं मिल पा रही है...? तब मुझे लगा कि इसके जन्मपत्री में बनने वाले 'काहल योग' को टारगेट कर आगे के फलादेश सुनिश्चित करने चाहिये !

फलित ज्योतिष में 'काहल योग' के बारे सुना होगा वैदिक ज्योतिष में काहल योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार यदि किसी कुंडली में तीसरे घर का स्वामी ग्रह तथा दसवें घर का स्वामी ग्रह एक दूसरे से केन्द्र में स्थित हों अर्थात् एक दूसरे से यानी 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में स्थित हों तथा कुंडली के पहले घर का स्वामी अर्थात लग्नेश प्रबल हो तो ऐसी कुंडली में 'काहल योग' बनता है जो जातक को साहस, पराक्रम आदि जैसे गुण प्रदान करता है जिसके चलते ऐसे जातक पुलिस बल, सेना बल तथा अन्य प्रकार के सुरक्षा बलों में सफल देखे जाते हैं। लेकिन इस विषय पर मेरा (ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे 9827198828 in Bhilai) मानना है कि यदि किसी कुंडली में तीसरे घर का स्वामी ग्रह बृस्पति से केन्द्र में स्थित हो, तो भी कुंडली में 'काहल योग' का निर्माण होता है। किन्तु वास्तविकता में बहुत सी कुंडलियों में इस प्रकार का 'काहल योग' बनने के पश्चात् भी इसके साथ जुड़े शुभ फल देखने को नहीं मिलते बल्कि कुछ कुंडलियों में तो बिल्कुल विपरीत फल भी देखने को मिलते हैं जैसा की मुझे कल एक बालोद से आये सज्जन की कुुुुण्डली में देेेेखने को मिला ! जब मैंने उनके कुण्डली के मुताबिक उनकी असल जिंदगी के बारे पूछना तथा कुछ घटनाओं के होने की बात बताना प्रारंभ किया तो इस 'काहल योग' के फलानुसार सारी स्थितियां विपरित थीं, मैं हतप्रभ था तब मुझे लगा की इसके चलते इस योग की परिभाषा में भी संशोधन की आवश्यकता है। अन्य सभी शुभ योगों की भांति ही 'काहल योग' के निर्माण के लिए भी कुंडली में तीसरे घर के स्वामी ग्रह तथा दसवें घर के स्वामी ग्रह दोनों का ही शुभ होना अति आवश्यक है क्योंकि इन दोनों ग्रहों में से किसी एक के अथवा दोनों के ही अशुभ होने की स्थिति में कुंडली में काहल योग न बनकर किसी प्रकार का अशुभ योग बन जाएगा जिसके कारण जातक को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए किसी कुंडली में तीसरे घर के स्वामी ग्रह तथा दसवें घर के स्वामी ग्रह के अशुभ होकर एक दूसरे से केन्द्र में स्थित हो जाने पर कुंडली में शुभ काहल योग न बनकर अशुभ योग बनेगा जिसके प्रभाव में आने वाला जातक अपराधी भी बन सकता है। इसलिए अमल योग की भांति ही किसी कुंडली में काहल योग के निर्माण का निश्चय करने से पूर्व भी इस योग को बनाने वाले ग्रहों के कुंडली में स्वभाव, बल तथा स्थिति आदि का भली भांति निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा तत्पश्चात ही कुंडली में 'काहल योग' का निर्माण तथा इसके शुभ फल निर्धारित करने चाहिएं...!

साथियों "ज्योतिष" विषय अथाह सागर है चाहे जितना गोते लगाओ फिर भी समुद्र के हजारवें हिस्से को भी समझ नहीं पायेंगे ! साधारणतया "बुक-स्टॉल-ज्योतिष-मर्मज्ञों" या "झाड़-फूंक, टोना-टोटका को ही ज्योतिष मानने वाले" ज्योतिषीयों को ज्योतिष शास्त्र में जो दिखता है वह फलित नहीं होता और जो फलित होते हैं उन ग्रहों के अन्तस में पैठकर उनके फल को समझना इतना आसान नहीं है ! हमारी शुभकामना 'नीरज' सैन्य उच्चाधिकारी अवश्य बनेगा !

ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक- "ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, शांतिनगर, भिलाई
Mob.no.9827198828

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