ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

!!विशेष सूचना!!
नोट: इस ब्लाग में प्रकाशित कोई भी तथ्य, फोटो अथवा आलेख अथवा तोड़-मरोड़ कर कोई भी अंश हमारे बगैर अनुमति के प्रकाशित करना अथवा अपने नाम अथवा बेनामी तौर पर प्रकाशित करना दण्डनीय अपराध है। ऐसा पाये जाने पर कानूनी कार्यवाही करने को हमें बाध्य होना पड़ेगा। यदि कोई समाचार एजेन्सी, पत्र, पत्रिकाएं इस ब्लाग से कोई भी आलेख अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क कर अनुमती लेकर ही प्रकाशित करें।-ज्योतिषाचार्य पं. विनोद चौबे, सम्पादक ''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका,-भिलाई, दुर्ग (छ.ग.) मोबा.नं.09827198828
!!सदस्यता हेतु !!
.''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के 'वार्षिक' सदस्यता हेतु संपूर्ण पता एवं उपरोक्त खाते में 220 रूपये 'Jyotish ka surya' के खाते में Oriental Bank of Commerce A/c No.14351131000227 जमाकर हमें सूचित करें।

ज्योतिष एवं वास्तु परामर्श हेतु संपर्क 09827198828 (निःशुल्क संपर्क न करें)

आप सभी प्रिय साथियों का स्नेह है..

बुधवार, 15 जून 2011


                                काल सर्प योग हमेशा अशुभ  नही होता 
                                            -पण्डित विनोद चौबे
 कुछ लोग कालसर्प योग को नहीं मानते। देखा जाए तो शास्त्रों में कालसर्प योग नाम का कोई भी योग नहीं है। कुछ विद्वानों ने अपने अनुभव के आधार पर राहु और केतु के मध्य सारे ग्रह होने की स्थिति को कालसर्प योग की संज्ञा दी हैं हमनें भी यह हजारों पत्रिका को देखकर जाना कि ऐसी ग्रह स्थिति वाला व्यक्ति परेशान रहा। राहु व केतु के मध्य सारे ग्रह आ जाने से कालसर्प योग विशेष प्रभावशाली नहीं होता जबकि केतु व राहु के मध्य ग्रहों का आना अधिक प्रभावशाली होता है। शनि की साढ़ेसाती भी उसी अवस्था में परेशान करती है जब जन्म-पत्रिका में शनि की प्रतिकूल स्थिति हो। राजा नल, सत्यवादी राजा हरिशचंद्र, महाराजा विक्रमादित्य जैसे पराक्रमी भी शनि की साढ़ेसाती के फेर से नहीं बच सके तो आम आदमी कैसे बच सकता है? जन्म-पत्रिका में शनि की अशुभ स्थिति से साढ़ेसाती अशुभ फलदायी रहती है। यदि शनि उच्च राशि तुला में हो या मकर अथवा कुंभ में हो तो हानिप्रद नहीं होता। शनि नीच राशि मेष में हो या सूर्य की राशि सिंह में हो व लोहे के पाद से हो तो फिर स्वयं भगवान ही क्यों न हो, फल भोगना ही पड़ता है। जब शनि अष्टम में नीच का हो या षष्ट भाव अथवा द्वादश में हो तो अशुभ फल देखने को मिलते हैं।
शनि की साढ़े साती : लक्षण और निवारण
  • दक्षिणमुखी मकान अनिष्टकारक हो सकता है, इससे बचने का प्रयास करें।
  • बबूल के पेड़ की डंडी से सुबह-शाम दातुन करें।
  • लोहे का चिमटा, लोहे का तवा, लोहे की सिगड़ी, किसी साधु-फकीर को दान करें, जिसका प्रयोग वह नित्य प्रति कर अपना भोजन बाए।
  • शनिवार के दिन काले उड़द के लड्डू एवं तिल्ली के लड्डू बनाकर वीराने में, जहां हल न चला हो, ऐसी जमीन में गड्ढा खोदकर दबा आएँ।
  • बीमारी की दशा में बड़ के पेड़ में (जड़ में) दूध चढ़ाकर वहाँ की गीली मिट्टी से तिलक लगाएँ। 
  • खड़े काले उड़द, बादाम, नारियल नदी में प्रवाहित करें।
  • पूरे डेढ़ माह (४५ दिन) नियमित रूप से नंगे पैर धर्मस्थान पर पूजा-पाठ करें। अपने दुष्कर्मों को स्वीकार करते हुए क्षमा याचना करें। 
  • अपने पूर्वजों के मकान में, पुराने मकान में ताँबा, चाँदी एवं स्वर्ण एकत्रित कर एक जगह पर रखें। 
  • दूध, गुड़, सौंफ से घर में हवन करें।
  • शुद्ध शहद घर में रखने से संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। इसे घर के प्रयोग में कतई न लाएँ। पूजा स्थान पर रखें।
  • धन सम्पत्ति के लिए अपनी थाली की रोटी में लगातार डेढ़ माह तक रोटी निकालकर कौवों को डालें।
  • शनिवार के दिन अथवा अमावस्या के दिन खड़े काले उड़द, तेल, तिल्ली, बादाम, लोहा इत्यादि शनि की वस्तु का यथाशक्ति दान करें (काले कपड़े में बांधकर)।
  • संतान के हित के लिए कुत्तों का भरण-पोषण करें। नियमित तीन कुत्तों को रोटी खिलाएँ।
  • काली गाय की यथाशक्ति सेवा करें। गाय को रोटी खिलाएँ।
  • शिव मंदिर में जाकर जहाँ शिवलिंग पर नागदेव (प्रतिमा) हो, उन पर दूध चढ़ाकर (दूध पिलाने की मुद्रा में) अभिषेक करें।
  • वाद-विवाद, दुश्मनी की स्थिति में बाँसुरी में खांड (बनारसी शक्कर) भरकर वीराने में जाकर गड्ढा खोदकर गाड़ दें। 
  • चाँदी का चोकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें।
  • नहाते वक्त पानी में थोड़ा सा दूध डालकर लकड़ी के पटिए पर आलकी-पालकी मारकर बैठे हुए स्नान करें। नहाते वक्त पैर जमीन पर न लगे।
  • जन्म-कुण्डली में चौथा या दसवाँ शनि अशुभ होने की दशा में सूर्यास्त के बाद अथवा सूर्योदय के पूर्व दूध पीना अनिष्टकारक है।
  • जन्म कुण्डली में शनि यदि मेष का हो अथवा लग्न में हो तो पश्चिम की ओर खुलने वाला हो तो मकान समस्या खड़ी कर सकता है। इस हेतु जमीन में सुरमा गाड़ना फलदायी हो सकता है।
  • नशे से परहेज, सट्टे-जुए से दूरी, अवैध-अनैतिक संबंधों का त्याग शनि के अशुभत्व एवं अनिष्ट को दूर करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। परेशानी की स्थिति में बुजुर्ग, शुभचिंतकों की राय पर चलना, झूठ से परहेज करना, अशुभ शनि के दुष्प्रभाव को दूर करने में बड़ा सहायक होगा।

कालसर्प दोष दूर करने के कुछ उपाय
  • यदि पति-पत्नी में क्लेश हो रहा हो, आपसी प्रेम की कमी हो रही हो तो भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या बालकृष्ण की मूर्ति जिसके सिर पर मोरपंखी मुकुट धारण हो घर में स्थापित करें एवं प्रतिदिन उनका पूजन करें एवं ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय अथवा ऊँ नमो वासुदेवाय कृष्णाय नम: शिवाय का यथाशक्ति जाप करें। 
  • यदि आपको रोजगार में तकलीफ आ रही है अथवा रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा है तो पलाश के फूल गोमूत्र में डूबाकर उसको बारीक करें। फिर छाँव में रखकर सुखाएँ। उसका  चूर्ण बनाकर चंदन के पावडर में मिलाकर शिवलिंग पर त्रिपुण्ड बनाएँ। २१ दिन या २५ दिन में रोजगार की अवश्य प्राप्ति होगी।
  • यदि आपकी कुण्डली में कालसर्प है तो आप नित्य प्रति भगवान भोलेनाथ के परिवार का पूजन करें। आपके प्रत्येक कार्य होते चले जाएेंगे।
  • यदि आपको शत्रु से भय है तो चाँदी के अथवा ताँबे के सर्प बनाकर उनकी आँखों में सुरमा लगा दें, फिर किसी भी शिवलिंग पर चढ़ा दें, आपका भय दूर हो जाएगा।
  • शिवलिंग पर आप प्रतिदिन मीठा दूध (मिश्री मिली हो तो बहुत अच्छा) उसी में भाँग डाल दें, फिर चढ़ाएँ आपको पूर्ण शांति मिलेगी।
  • नारियल के गोले में सप्त धान्य, गुड, उड़द की दाल एवं सरसों भर लें व बहते पानी में बहा दें अथवा गंदे पानी में (नाले में) बहा दें। आपका गुस्सा चिड़चिड़ापन दूर हो जाएगा। यह प्रयोग शूद्रकाल में करें।
  • सबसे सरल उपाय कालसर्प योग वाला व्यक्ति श्रावण मास में प्रतिदिन रूद्र अभिषेक कराए एवं महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज करें। अवश्य जीवन में सुख शांति आएगी।

कोई टिप्पणी नहीं: