ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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बुधवार, 15 जून 2011

सोया भाग्य जगाएँ, भाग्यशाली बन जाएँ


भाग्यशाली बन जाएँ
                                   -पण्डित विनोद चौबे

भाग्य को कई नामों से जाना जाता है जैसे लक तकदीर आदि। लक शब्द अंग्रेजी का है उर्दू में हम इसे तकदीर कहते है, हिन्दी में हम इसे भाग्य कहते है। जब इंसान का भाग्य बदलता हैं तो कोई भी ताकत उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। 
हमें याद रखना चाहिए कि बच्चे के जन्म से ही ग्रहों का खेल शुरू हो जाता है। बच्चा जब जन्म लेता है तो उस समय स्थित ग्रह ही उसे जीवन भर फल देते रहते हैं। चाहे वो किसी भी धर्म का क्यों न हो, उसे ग्रहों के अनुसार परिणाम मिलते हैं। 
ये तो सभी मानते हैं कि ग्रहों का प्रभाव सभी समान रूप से पड़ता है। अगर नहीं होता तो समुद्र में ज्वार भाटा नहीं आता, अमावस्या को हत्या, आत्महत्या अधिक नहीं होती, ना ही पागलपन का दौरा पूर्णिमा को न होता। कामवासना भी पूर्णिमा को अधिक प्रबल न होती।
भाग्य का स्थान नवम भाव है, नवम भाव को धर्म, यश, प्रतिष्ठा से भी जानते हैं। इस भाव का शुभ होना व भावेश का भी शुभ होना उस जातक को भाग्यशाली बनाने हेतु प्रभावी होता है। इस भाव का स्वामी व इस भाव में बैठा ग्रह व उस पर पड़ने वाली दृष्टि ही उस जातक को भाग्यशाली या भाग्यहीन बनाती है। 
इस भाव को उस जातक की जन्म पत्रिकानुसा सुधारा जाए तो उसके भाग्य में बहुत कुछ सुधार किया जा सकता है। पूरी तरह बदलना है तो उसको बालक के जन्म लेने से पहले शुभ ग्रहों की स्थितिनुसार जन्म करवाकर बदला जा सकता है।
कई दम्पत्ति शुभ मुहूर्त में सिजेरियन ऑपरेशन करवाकर प्रसव करवा लेते हैं जो पूर्णत: गलत ही है। नवम भाव अशुभ प्रभाव में हो तो सबसे पहले उस प्रभाव को दूर करने के उपाय करना चाहिए। उस भाव के ग्रह को शुभ स्थान में लाने के लिए उन ग्रहों से संबंधित वस्तुआें को शुीा भाव में स्थापित करना चाहए।
जैसे किसी ग्रह को लग्न में लाना हो तो उससे संबंधित रत्न को शुभ मुहूर्त में गले में धारण करना चाहिए, उसी प्रकार भाग्य में लाना हो तो उससे संबंधित वस्तु को किसी मंदिर मेें दान करें, उस ग्रह से संबंधित वार को रखना चाहिए फिर दो दिनोंे तक उस स्थान पर नहीं जाना चाहिए। इस प्रकार उपाय करने से शुभ संतान होगी व अशुभ ग्रहों को दूर किया जा सकता है। 

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