ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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बुधवार, 15 जून 2011

मूलांक से जानिए आपका स्वास्थ्य एवं निदान


हमारी पृथ्वी के सौरमण्डल में नौ ग्रह चक्कर लगा रहे है। जिससे सम्पूर्ण पृथ्वी का जीवन संचालित हो रहा है। ज्योतिष की सम्पूर्ण गणना पृथ्वी को स्थिर केन्द्र मानकर की जाती हैं।
नवग्रहों की परिकल्पना के आधार पर ही प्राचीन अंकशास्त्रियों ने नौ तक के अंक ही गणित में निर्धारित किए हैं।
प्राचीन समय में नंगी आंखों से देखें जाने वाले सात ग्रहों का ज्ञान था। बाद में वैज्ञानिकों ने तीन ग्रह और खोज निकाले है- जिसमें यूरेनस, नेप्चून को शामिल किया है।
हमारे भारतीय ज्योतिष में दो छायाग्रह राहू-केतु को शामिल किया है।
भारतीय ज्योतिष ‘सायन पद्धति’ के अनुसार गणना करते और पाश्चात्य ज्योतिष ‘निरयन पद्धति’ के अनुसार गणना करते है।
हर सौरमास 1 ग्रह के प्रभाव में आता है। सूर्य और चन्द्र एक-एक मास को प्रभावित करते है। तथा मंगल, बुध, गुरू, शुक्र ओर शनि दो-दो मासों को प्रभावित करते है। किन्तु यूरेनस को सूर्य के और नेप्चून को चन्द्र के साथ संयुक्त किया गया है। इसी प्रकार हर ग्रह एक मूलांक से प्रभाव में है। 1 अंक का स्वामी सूर्य, 2 अंक का स्वामी चन्द्र, 3 अंक का स्वामी बृहस्पति, 4 अंक का स्वामी यूरेनस, 5 अंक का स्वामी बुध, 6 अंक का स्वामी शुक्र, अंक 7 नेप्चून के लिए, अंक 8 शनि के लिए, अंक 9 का स्वामी मंगल होता है।
व्यक्ति की प्रकृति, कर्म, व्यवहार, स्वास्थ्य आदि पर मूलांक पर आधिपत्य करने वाले ग्रह का पूर्ण प्रभाव पड़ता है। आइये जानते है किस अंक के व्यक्ति, कौन सी बीमारी या कौन सा अंग विभाग प्रभावित होता है और उनके निदान क्या है।
♦     मूलांक 1 वाले व्यक्तियों को रक्त विकार, रक्तचाप, हृदय रोग एवं नेत्र रोग सम्बन्धी बीमारियां हो सकती है।
    निदान- सूर्य उपासना करे, ‘‘आदित्यहृदय’’ कवच का पाठ करना लाभदायक रहेगा। रविवार का व्रत रखे, इस दिन नमक का सेवन न करें।
♦     मूलांक 2 वाले व्यक्तियों को फेफड़े सम्बन्धी रोग, श्वास रोग, सर्दी, पानी से भय रहता है। पाचन-तंत्र भी कमजोर रहता है।
    निदान- आप शिव उपासना करें। शिव महिम्न स्त्रोत का पाठ करें। सोमवार का व्रत रखें। ठण्ड, गहरे पानी से बचे।
♦     मूलांक 3 वाले व्यक्तियों को वायु विकार रक्त विकार, स्नायु तंत्र शिथिल होते है, मानसिक तनाव एवं त्वचा रोग भी हो सकते है।
    निदान- आपको विष्णु की उपासना लाभदायक होगी ‘‘विष्णु सहस्त्रनाम’’ का पाठ करें। बृहस्पतिवार का व्रत रखें। इस दिन पीला भोजन करें।
♦     मूलांक 4 वाले व्यक्तियों को रक्त अल्पता, मनोरोग, छूत सम्बन्धी बीमारियाँ, मानसिक असंतुलन हो सकता है।
    निदान- आप ‘‘गणेश’’ की उपासना करें। अथर्वशीर्ष का पाठ करें। गणेश चतुर्थी का व्रत रखे। प्रत्येक बुधवार गणेश प्रतिमा पर दूर्वा चढ़ाये।
♦     मूलांक 5 वाले व्यक्ति स्नायु रोग, हृदय दौर्बल्यता एवं मस्तिष्क सम्बन्धी रोग से पीड़ित हो सकते है। सर्दी जुकाम फ्लू से विशेष सावधानी रखें।
    निदान- बुधवार का व्रत रखे, गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें एवं दूर्वा चढ़ाये, गणपतिजी को तथा अधिक परिश्रम से बचे।
♦     मूलांक 6 वाले व्यक्तियों को कोष्ठबद्धता, गले, नाक के रोग, हृदय सम्बन्धी बीमारियाँ की सम्भावना रहती है।
    निदान- आप ‘‘शिव’’ उपासना करें। शुक्रवार का व्रत रखें, अधिक नमक, खटाई भोजन में शामिल न करें। गरिष्ठ भोजन से बचे।
♦     मूलांक 7 वाले व्यक्तियों को गठिया, उदर विकार, फोड़े-फुन्सी एवं छूत की बीमारियों का भय रहता है।
    निदान- आप ‘‘नृसिंह’’ भगवान की उपासना करें, हनुमानजी का पूजन करें। सोमवार, मंगलवार का व्रत रखें।
♦     मूलांक 8 वाले व्यक्तियों को कुष्ठ रोग, मूत्राशय के रोग, त्वचा रोग, आँतों से सम्बन्धी बीमारियाँ एवं वात रोग हो सकता है।
    निदान- आप ‘‘शनि’’ की उपासना करें। शनि स्तोत्र एवं शनि का जाप करें। शनिवार का व्रत रखें।
♦     मूलांक 9 वाले जातक को गुदा सम्बन्धी रोग लीवर, सिरदर्द, रक्त स्त्राव तथा दुर्घटनाओं में चोट-मोच की सम्भावना रहती है।
    निदान- मंगल उपासना एवं हनुमत उपासना करें। मंगल स्तोत्र का पाठ करें तथा मंगलवार का व्रत रखे। इस व्रत में नमक का सेवन न करे। हनुमत्कवच का पाठ भी करें।
मूलांक से जानिए आपका स्वास्थ्य एवं निदान

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