ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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गुरुवार, 21 जुलाई 2011

दशमेश उच्च ही कराता है विदेश यात्रा

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ज्योतिष का सूर्य 
दशम भाव का स्वामी अष्टम भाव में हो तो उस जातक को हमेशा कुछ न कुछ आपदा घेरे रहती है। व्यापार हो तो उतार-चढ़ाव देखना ही पड़ता है। नौकरीपेशा है तो बार-बार स्थानांतरण या अधिकारियों से नहीं बनती। पिता से वैमनस्यता रखने वाला छल-कपट से पूर्ण होता है। दशमेश का अष्टम में होना पूर्व जन्म के पाप कर्मों का फल ही मिलता है। यदि इस भाव में दशमेश उच्च का हो तो उस जातक को गुप्त धन या अकस्मात धन मिलता है। नौकरी में हो तो रिश्वत लेकर धनी बनता है। ऐसे जातकों की कमाई पाप में नष्ट हो जाती है। दशम भाव का स्वामी यदि नवम धर्म, भाग्य भाव में हो तो उस जातक को पिता का भरपूर सहयोग मिलता है। व्यापार में हो तो सदैव उन्नति पाता रहता है। नौकरीपेशा हो तो वह अपने अधिकारियों का प्रिय व सदैव उन्नति पाता है। राजनीति में हो तो उत्तम राजयोग बनता है एवं मंत्री तक बन जाता है। उस जातक को परिवार वालों का निरंतर सहयोग मिलता रहता है। दशमेश की शुभ स्थिति धर्मात्मा, परोपकारी, यशस्वी बना देती है। उस जातक को उत्तम व गुणी संतान का सुख मिलता है। राज्यकृपा सदैव बनी रहती है। स्वराशि स्वदशमेश हो तो वह जातक अत्यंत भाग्यशाली होगा व नवम भाव के स्वामी का रत्न पहनने से और अधिक लाभ पाएगा। दशमेश यदि नीच राशि का हो तो उसे अनेक कष्टों का भी सामना करना पड़ता है। यथा व्यापाार में हानि, पिता से कष्ट, नौकरी में बाधा राज्य से कष्ट मिलता है। परिवार में भी दुःखी रहता है। दशम भाव का स्वामी यदि दशम भाव में हो तो उस जातक को अनेक सुख मिलते है। ऐसा जातक माता, नाना, मामा से लाभ पाता है। ऐसा जातक पिता का भक्त होकर उनकी प्रत्येक बात का पालन करने वाला आज्ञाकारी पुत्र होता है। राज्य से सम्मान भी पाता है। वहीं सर्विस में है तो उच्च पद भी मिलता है। ऐसा जातक सफल राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक क्षमता से भरपूर होता है। समाज में व अन्य जनों से प्रशंसित होता है।
दशमेश गुरु स्वराशिस्थ हो तो वह जातक प्रोफेसर, शिक्षा विभाग या बैंक आदि क्षेत्र में सफलता पाता है। शुक्र हो तो सौंदर्य प्रसाधनों, इंजीनियर, कला के क्षेत्र में उत्तम स्थिति पाता है। सफल कलाकारों की कुंडली में दशम स्थान में ही शुक्र रहा है। दशम में मंगल अपनी ही राशि का हो तो ऐसा जातक शूरवीर, साहसी, पराक्रम, पुलसि या सेना में प्रमुख पदों पर पहुंच जाता है। बुध हो कर दशमेश हो तो ऐसा जातक गुणी, ज्ञानवान, व्यापारी होता है। सूर्य हो तो प्रशासनिक कार्य में सफल होता है। चंद्र हो तो सफेद वस्तुओं के व्यापार में सफल होगा। शनि हो तो लोहे के व्यापार में या तेल के व्यापार में सफल होगा। दशम भाव का स्वामी यदि एकादश भाव में स्वराशि हो तो वह जातक अपने कर्म द्वारा व्यापार से लाभ पाने वाला होता है। पिता से धन लाभ मिलता है। ऐसा जातक तेल के व्यापार में भी सफल होता है। यह सिर्फ मेष लग्न में नहीं होगा। दशमेश यदि नीच का हो तो उस जातक को व्यापार में हानि, पिता का न होना एवं और स्वयं वह भी काफी परेशान रहता है। आर्थिक लाभ नहीं होता। जब तक उसकी संतान मददगार नहीं होगी वह सफल नहीं होगा। दशम भाव का स्वामी यदि द्वादश भाव में हो तो उस जातक को दूर देश में जाकर व्यापार आदि से लाभ होता है। ऐसे जातक पिता से दूर रहकर ही सुखी रहता है। दशम भाव का स्वामी यदि नीच का हो तो उसे बाहरी व्यक्ति से धोखा व हानि सहन करनी पड़ती है। दशमेश उच्च का हो तो वह जातक निश्चित तौर पर विदेश में या फिर जन्म स्थान से दूर रहकर लाभार्जन करने वाला होता है। एक से अनेक बार विदेश यात्रा करता है।
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2 टिप्‍पणियां:

Ashutosh Joshi ने कहा…

पंड़ित जी नमस्कार,

एक जज्ञासा है..यदि वृषभ लग्न हो तथा शनि देव( नवमेश, दशमेश) षष्टम में हों, पर वक्री तथा लग्नेश व चंद्र से द्रष्ट भी हों. इस अवस्था में उनकी भूमिका कैसी होगी.

धन्यवाद

Ashutosh Joshi ने कहा…

पंड़ित जी नमस्कार,

एक जज्ञासा है..यदि वृषभ लग्न हो तथा शनि देव( नवमेश, दशमेश) षष्टम में हों, पर वक्री तथा लग्नेश व चंद्र से द्रष्ट भी हों. इस अवस्था में उनकी भूमिका कैसी होगी.

धन्यवाद

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