ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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शनिवार, 16 जुलाई 2011

'ज्योतिष का सूर्य' का यह २४ वाँ अंक


सुधी पाठकों,
'ज्योतिष का सूर्य' का यह २४ वाँ अंक आपके हाथों में है। पिछले 13 अगस्त 2009 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री मा. डॉ. रमनसिंह के द्वारा इस पत्रिका का विमोचन मुख्यमंत्री निवास रायपुर में हुआ था। तब से आज तक लगातार यह पत्रिका सतत्  राष्ट्र चेतना एवं भारतीय संस्कृति के साथ-साथ भारतीय प्राच्य विद्याओं सहित मर्मस्पर्शी, पठनीय पाठ्य सामग्री को आप तक पहुंचाने का प्रयास करते आ रहा हूँ। आपके मार्गदर्शन के अनुसार हमने बीच-बीच में पाठ्य सामग्रियों को संयोजित कर प्रकाशित करने का प्रयत्न किया, उसी का परिणाम है कि आज केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि सीमावर्ती राज्य, मध्यप्रदेश एवं दिल्ली से भी अलग-अलग संस्करण प्रारंभ करना पड़ा। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। कि 'ज्योतिष का सूर्य' के प्रति आप लोगों का कितना प्रेम और राष्ट्रीय चेतना का एक मंच परिवार के प्रति कितना लगाव है।
मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है कि निरंतर सुधी पाठकों का सहयोग पत्र व्यवहार के द्वारा हमें प्राप्त होता रहा है। विशेष रूप से मैं मा. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी (छ.ग. शासन) एवं मुख्य संरक्षक श्री विजय बघेल जी (संसदीय सचिव, छ.ग. शासन, गृह, जेल एवं  सहकारिता) के सहयोग के अलावा संपादक मण्डल में लगातार अपने लेख एवं पाठ्य सामग्रीयों के रूप में प्रमुख स्तंभकार के.के. झा (वरिष्ठ पत्रकार) संतोष मिश्र (पत्रकार), ऋषिकेश त्रिपाठी (पत्रकार) एवं  डॉ. महेशचन्द्र शर्मा, डॉ. संतोष राय, डॉ. सुचित्रा शर्मा सहित तमाम शिक्षाविद एवं देश के जानेमाने प्राच्य विद्या पर रिसर्च करने वाले वैदिक विद्वानों का मैं आभार प्रकट करता हूँ जिन्होने परोक्ष एवं प्रत्यक्ष रूप से सहयोग कर इस मंजिल तक पहुंचाने में अपना विशेष योगदान दिया। साथ ही हमारे प्रमुख सलाहकार एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री रविन्द्र सिंह ठाकुर ने जो अपने नेतृत्व में पत्रिका को आम जनमानस के हृदय पटल पर रेखांकित किया है मैं उनको सादर धन्यवाद देता हूँ।
आशा है, इसी प्रकार हमारे नियमित सुधी पाठकों का प्रेम बना रहेगा और आगामी शत-संवत्सर उक्त मासिक पत्रिका अनवरत गतिमान रहेगी।
पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णम्  एवाव शिष्यते।।

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