ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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सोमवार, 3 अक्तूबर 2016

ताकि " मॉडर्न दुर्गम राक्षस " से बचा जा सके.....
जगतजननी, देवी और माँ से " दुर्गा " बनने का क्या है रहस्य?
"दुर्गम" नामक राक्षस की आधुनिक सभ्यता में मौजूदगी का रहस्य?
(ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, शांतिनगर, भिलाई , की प्रस्तुति)
साथियों,
चर्चा यदि नवरात्र में जगतजननी , माँ, और दुर्गा की हो रही है तो हम श्रीमद्देवीभागवत को कैसे भूला सकते हैं, सर्वप्रथम मैं आपको श्रीमद्देवीभागवत की आध्यात्मिक यात्रा कराना चाहता हुं, जिसमें देवी के चण्डी, अम्बे आदि नामों की चर्चा देवी भागवत के अलावा मार्कण्डेय पुराण सहित कई ' आगम ' ग्रंथों भी प्रमुखता से आया है, और हर नाम के साथ कोई ना कोई एक रहस्य जुड़ा हुआ है।
तो आईये माँ दुर्गा नाम से जुड़े इस रोचक रहस्य को बहुत ध्यानपूर्वक समझने का प्रयास करते हैं।
एक बार की बात है कि - समस्त चराचर पर अराजक, व असमाजिक तत्वों मे अचानक बहुत भारी वृद्धी होने लगी। आपस में सगे-संबंधी जनों में पारस्परिक भेदभाव, एव आपस में पवित्र रिश्ते भी तार-तार होने लगे। चहुंओर त्राहि-त्राहि मची हुई थी। थकित एवं चकित  ऋषि -महर्षि एवं देवता सभी मिलकर इस विपदा से छुटकारा पाने के लिये ब्रह्मा जी के पास गये! ब्रह्मा जी से सभी बताने के बाद इस विपत्ति का कारण क्या है?
ब्रह्मा जी ने कहा कि - एक "दुर्गम"  नामक राक्षस है जो " वेद " वेदांगों को छुपाकर किसी कंदरा (गुफा) में विलुप्त हो गया है, जिसके कारण वेदविहीन धरती पर अराजकता फैल चुकी है, इस दुर्गम नामक राक्षस को ढूंढना पडेगा, और उसको युद्ध में पराजित करके " वेद " वेदांगों को समस्त चराचर को सौंपना होगा, नहीं तो पृथ्वी पर अप्रकृतिक, व अव्यवहारिक कार्यों तथा मानव सभ्यता की मर्यादाओं को नष्ट करके अमानवीयता पर लोग उतारू हो जायेंगे! अत: इस दुर्गम नामक असुर का वध करना नितान्त आवश्यक है, और इस असुर का वध देवी ही कर सकतीं हैं।
ऐसा ही हुआ ।  "दुर्गम" नामक राक्षस का वध करके वेद-वेदांगों को स्वतंत्र किया, पुन: लोगों में वेद सम्मत जीवन यापन करने की प्रवृत्ति बढ़ने लगी, समाज में अराजकता, अश्लीलता(अमर्यादित व अव्यवहारिक) समाप्त होने लगी!
देवी ने दुर्गम नामक राक्षस का वध किया इसलिये इनका " दुर्गा " पड़ा।
साथियों इस कथा- प्रसंग को थोड़ी गहराई से समझना पड़ेगा।
आज भारतीय संस्कृति जो पूरे विश्व सर्वोत्कृष्ट, प्राचीन, व सम्मानित संस्कृति मानी जाती है, किन्तु " निर्भया" कांड  जैसी घटनाओं के होने से हमे आत्ममंथन करने विवश होना पड़ता है। आज पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से प्रभावित युवाओं को अश्लील साहित्य एवं इण्टरनेट पर दृश्य सामग्रियों को परोसने वाले " दुर्गम" नामक राक्षसों प्रतिदिन दो-चार होना पड़ रहा है! क्योंकि आज का आधुनिक व मॉडर्न "दुर्गम" टेलीविज़न के विग्यापनों से लेकर, दुराचारियों, कुकर्मियों को हीरो बनाती और सत-साहित्य एवं संस्कारित कवि, लेखकों के साहित्य ग्रंथों हासिये पर रखती मीडिया, अश्लील जुमलों पर आधारित कपाली शर्मा के " हास-परिहास" टीव्ही शो आदि को बढावा देने वाले लोग ही प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप में दुर्गम राक्षस हैं, जिनसे हमारे समाज को बचना होगा। और वेद-वेदांग, व्यावसायिक शिक्षा के बजाय नैतिक शिक्षा पर ध्यान देना होगा, उद्भट विद्वानों द्वारा लिखित सत- साहित्यों को बढ़ावा देना होगा ताकि "मॉडर्न दुर्गम" राक्षसों से बचा जा सके।
- ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, रावण संहिता विशेषग्य एवं संपादक,ज्योतिष का सूर्य, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका , शांतिनगर, भिलाई, मोबाईल नं 9827198828
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