ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

!!विशेष सूचना!!
नोट: इस ब्लाग में प्रकाशित कोई भी तथ्य, फोटो अथवा आलेख अथवा तोड़-मरोड़ कर कोई भी अंश हमारे बगैर अनुमति के प्रकाशित करना अथवा अपने नाम अथवा बेनामी तौर पर प्रकाशित करना दण्डनीय अपराध है। ऐसा पाये जाने पर कानूनी कार्यवाही करने को हमें बाध्य होना पड़ेगा। यदि कोई समाचार एजेन्सी, पत्र, पत्रिकाएं इस ब्लाग से कोई भी आलेख अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क कर अनुमती लेकर ही प्रकाशित करें।-ज्योतिषाचार्य पं. विनोद चौबे, सम्पादक ''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका,-भिलाई, दुर्ग (छ.ग.) मोबा.नं.09827198828
!!सदस्यता हेतु !!
.''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका के 'वार्षिक' सदस्यता हेतु संपूर्ण पता एवं उपरोक्त खाते में 220 रूपये 'Jyotish ka surya' के खाते में Oriental Bank of Commerce A/c No.14351131000227 जमाकर हमें सूचित करें।

ज्योतिष एवं वास्तु परामर्श हेतु संपर्क 09827198828 (निःशुल्क संपर्क न करें)

आप सभी प्रिय साथियों का स्नेह है..

गुरुवार, 13 अक्तूबर 2016

आश्चर्य किन्तु सत्य......बगलामुखी उपासना

आश्चर्य, किन्तु सत्य राजयोग "श्रीनाथ योग



" को जागृत करने वाली ,"श्री-कुल" की देवी बगलामुखी......
यह मेरा अनुभव है......एक बार अवश्य पढें.....हो सकता है आपका भी राजयोग जागृत हो जाय........
साथियों,
नमस्कार आज हम चर्चा करेंगे कि जन्मकुण्डली/हस्तरेखा/मस्तक रेखा में "राजयोग" है और उसके फलिभूत होने की विंशोत्तरी दशा भी चल रहा है,परन्तु फलिभूत क्यों नहीं हो रहा है? यही प्रश्न कल मेरे समक्ष आया।
कल हमारे निवास/ऑफिस शांतिनगर, भिलाई में एक ऐसे सज्जन की जन्मकुण्डली आई जो "श्रीनाथ" राजयोग और भाग्येश वृहस्पति की विंशोत्तरी दशा में उच्च राशिस्थ सूर्य जो तृतीयस्थ हैं , सूर्य की अन्तर्दशा चल रही है, साथ ही मंगल अपनी मकर (उच्च) राशि के होते हुये भी यह व्यक्ति सामान्य  "रेडीमेड स्टोर्स" के व्यवसाई हैं , मैने उनसे बार- बार प्रश्न किया कि - आपकी जन्म टाईमिंग व डेट सही तो है ? उन्होंने कहा कि हां बिल्कुल सही है, इसका उन्होंने चिकित्सालय का प्रमाण भी बताया मैं, हतप्रभ और आश्चर्यचकित था, कि आखिर कहीं मिस्टेक तो दिख नहीं रहा, फिर ये "श्रीनाथ" योग ने कार्य क्यों नहीं किया। इस व्यक्ति को किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी में बड़ी भूमिका में होना था अथवा लग्नेश शुक्र पंचमस्थ है तो इसे माईनिंग(खनिज) से संबंधित व्यापार करना था, किन्तु यह बिल्कुल अपोजिट दिख रहा है, माज़रा क्या है ? यह सवाल मेरे मन बार-बार कौंध रहा था। मैने उनसे पूछा- मित्रवर, आपने कभी कोयले का व्यवसाय किया क्या? उन्होंने अपनी नम आँखों से कहा हां, मैं कोयले का ही व्यापार करता था, लेकिन हमारे सहपाठी ने हथिया लिया और मैं अब बच्चों को पढाने लिखाने व घर खर्च के लिये एक छोटा सा " रेडिमेड स्टोर्स" चलाता हुं जो उसमे भी कोई ख़ास बरक्कत नहीं है।
साथियों, जब मैंने गहन चिन्तन किया तो पाया कि - " यह व्यक्ति भाग्य से शत्रु से पीड़ित है, जो कभी मित्र बनकर सबकुछ ठग लिया, और वह आज एक किसी राष्ट्रीय पार्टी का प्रादेशिक पदाधिकारी बन फार्चुनर गाड़ी से घूम रहा है, और ये रेडिमेड स्टोर्स के बतौर संचालक "टू व्हीलर" से घूम रहे हैं।
मैने, उनको कहा कि आप पुन: कोयले का कार्य स्वयं करें और आपके जन्म कुण्डली/हस्तरेखा/मस्तक रेखा में कोई दुर्भाग्य नहीं है बल्कि "शत्रु-कृत-बाहरी-बाधा" है, जिसका मात्र उपाय है बगलामुखी की उपासना करें।
मित्रों, 1999 में काशी हिन्दू विश्व विद्यालय से ज्योतिष से आचार्य किया, तबसे आजतक हजारों कुण्डलियों तथा हस्तरेखाओं का अवलोकन किया और देश के विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब-पोर्टलों एवं सोशल मीडिया, टेलीविज़न के लाईव टेलीकास्ट सहित "ज्योतिष का सूर्य" राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, भिलाई द्वारा संचालित ब्लॉग, फेसबुक, गुगल प्लस, वर्डप्रेस, ई-मेगजीन आदि के माध्यम से मैने अपने ज्योतिष पर आधारीत अनुभव को शेयर करता रहा हुँ, आज मुझे लगा कि यह वाकया आपके समक्ष रखूं।  वाकई जीवन सामान्य में कई ऐसे अवसर आते हैं जहां मैं भी हतप्रभ (चकित)  हो जाता हुं। ठिक वैसा ही क्षण का आभास मुझे उपरोक्त व्यापारी "रेडिमेड स्टोर्स" व्यापारी के जन्मांक को देखकर लगा।
तब मुझे "तंत्र कल्प" में वर्णित "श्री-कुल की देवी" मां बगलामुखी का ध्यान आया कि इस मामले में दसमहाविद्या की देवता बगलामुखी माँ ही सहायता कर सकतीं हैं! और रूद्रयामल तंत्र के इस बगलामुखी स्तोत्र पर पड़ा जो शत्रुओं के पराजय के लिये अमोघ अस्त्र है।
इसके अतिरिक्त अगर आपको राजनीतिक क्षेत्र में, व्यापारिक क्षेत्र में शत्रुबाधा/प्रतिस्पर्धा जो जरूरत से अधिक आपके कैरियर में रूकावट डाल रहें हैं तो आप किसी सक्षम परम साधक गुरू से "मंत्र दीक्षा" लेकर " बगलामुखी स्तोत्र" का नियमित पाठ करें, और ऱाजयोग, प्रसिद्धि, सत्ता और धन वैभव से समृद्ध व्यक्तित्व का स्वत: निर्माण करें...वाक्कई चकित कर देने वाला परिणाम देखें !
(यह साधना आरंभ करने के पूर्व कुंडली का परिक्षण करा लेना चाहिये, साथ ही सक्षम गुरू से " मंत्र दीक्षा" ले लेना चाहिये, क्योंकि तनिक भी गलती अधिक  नुकसान कर देता ह, अधिक जानकारी के लिये " ज्योतिष का सूर्य" के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं)
॥ श्रीबगलामुखीस्तोत्रम् ॥
श्रीगणेशाय नमः ।
चलत्कनककुण्डलोल्लसितचारुगण्डस्थलीं
लसत्कनकचम्पकद्युतिमदिन्दुबिम्बाननाम् ।
गदाहतविपक्षकां कलितलोलजिह्वाञ्चलां
स्मरामि बगलामुखीं विमुखवाङ्मनस्स्तम्भिनीम् ॥ १॥
पीयूषोदधिमध्यचारुविलद्रक्तोत्पले मण्डपे
सत्सिंहासनमौलिपातितरिपुं प्रेतासनाध्यासिनीम् ।
स्वर्णाभां करपीडितारिरसनां भ्राम्यद्गदां विभ्रतीमित्थं
ध्यायति यान्ति तस्य सहसा सद्योऽथ सर्वापदः ॥ २॥
देवि त्वच्चरणाम्बुजार्चनकृते यः पीतपुष्पाञ्जलीन्भक्त्या
वामकरे निधाय च मनुं मन्त्री मनोज्ञाक्षरम् ।
पीठध्यानपरोऽथ कुम्भकवशाद्बीजं स्मरेत्पार्थिवं
तस्यामित्रमुखस्य वाचि हृदये जाड्यं भवेत्तत्क्षणात् ॥ ३॥
वादी मूकति रङ्कति क्षितिपतिर्वैश्वानरः शीतति क्रोधी
शाम्यति दुर्जनः सुजनति क्षिप्रानुगः खञ्जति ।
गर्वी खर्वति सर्वविच्च जडति त्वन्मन्त्रिणा यन्त्रितः
श्रीर्नित्ये बगलामुखि प्रतिदिनं कल्याणि तुभ्यं नमः ॥ ४॥
मन्त्रस्तावदलं विपक्षदलने स्तोत्रं पवित्रं च ते
यन्त्रं वादिनियन्त्रणं त्रिजगतां जैत्रं च चित्रं च ते ।
मातः श्रीबगलेति नाम ललितं यस्यास्ति जन्तोर्मुखे
त्वन्नामग्रहणेन संसदि मुखे स्तम्भो भवेद्वादिनाम् ॥ ५॥
दुष्टस्तम्भनमुग्रविघ्नशमनं दारिद्र्यविद्रावणं
भूभृत्सन्दमनं चलन्मृगदृशां चेतःसमाकर्षणम् ।
सौभाग्यैकनिकेतनं समदृशः कारुण्यपूर्णेक्षणम्
मृत्योर्मारणमाविरस्तु पुरतो मातस्त्वदीयं वपुः ॥ ६॥
मातर्भञ्जय मद्विपक्षवदनं जिह्वां च सङ्कीलय
ब्राह्मीं मुद्रय दैत्यदेवधिषणामुग्रां गतिं स्तम्भय ।
शत्रूंश्चूर्णय देवि तीक्ष्णगदया गौराङ्गि पीताम्बरे
विघ्नौघं बगले हर प्रणमतां कारुण्यपूर्णेक्षणे ॥ ७॥
मातर्भैरवि भद्रकालि विजये वाराहि विश्वाश्रये
श्रीविद्ये समये महेशि बगले कामेशि वामे रमे ।
मातङ्गि त्रिपुरे परात्परतरे स्वर्गापवर्गप्रदे
दासोऽहं शरणागतः करुणया विश्वेश्वरि त्राहि माम् ॥ ८॥
संरम्भे चौरसङ्घे प्रहरणसमये बन्धने व्याधिमध्ये
विद्यावादे विवादे प्रकुपितनृपतौ दिव्यकाले निशायाम् ।
वश्ये वा स्तम्भने वा रिपुवधसमये निर्जने वा वने वा
गच्छंस्तिष्ठंस्त्रिकालं यदि पठति शिवं प्राप्नुयादाशु धीरः ॥ ९॥
त्वं विद्या परमा त्रिलोकजननी विघ्नौघसञ्छेदिनी
योषित्कर्षणकारिणी जनमनःसम्मोहसन्दायिनी ।
स्तम्भोत्सारणकारिणी पशुमनःसम्मोहसन्दायिनी
जिह्वाकीलनभैरवी विजयते ब्रह्मादिमन्त्रो यथा ॥ १०॥
विद्या लक्ष्मीर्नित्यसौभाग्यमायुः पुत्रैः पौत्रैः सर्वसाम्राज्यसिद्धिः ।
मानो भोगो वश्यमारोग्यसौख्यं प्राप्तं तत्तद्भूतलेऽस्मिन्नरेण ॥ ११॥
त्वत्कृते जपसन्नाहं गदितं परमेश्वरि ।
दुष्टानां निग्रहार्थाय तद्गृहाण नमोऽस्तु ते ॥ १२॥
पीताम्बरां च द्विभुजां त्रिनेत्रां गात्रकोमलाम् ।
शिलामुद्गरहस्तां च स्मरे तां बगलामुखीम् ॥ १३॥
ब्रह्मास्त्रमिति विख्यातं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् ।
गुरुभक्ताय दातव्यं न देयं यस्य कस्यचित् ॥ १४॥
नित्यं स्तोत्रमिदं पवित्रमिह यो देव्याः पठत्यादराद्धृत्वा
यन्त्रमिदं तथैव समरे बाहौ करे वा गले ।
राजानोऽप्यरयो मदान्धकरिणः सर्पा मृगेन्द्रादिकास्ते
वै यान्ति विमोहिता रिपुगणा लक्ष्मीः स्थिरा सिद्धयः ॥ १५॥
॥ इति श्रीरुद्रयामले तन्त्रे श्रीबगलामुखीस्तोत्रं समाप्तम् ॥
---ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, रावण संहिता विशेषज्ञ एवं संपादक, 'ज्योतिष का सूर्य' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, हाऊस नं. 1299, सड़क- 26, कोहका रोड,  शांतिनगर, भिलाई, दुर्ग (छ.ग.) -490023
(विशेष सूचना: मित्रों बगलामुखी देवी दश महाविद्या की देवी हैं इनकी साधना बिना किसी परमसाधक गुरू के सान्निध्य में ना करें, अथवा गुरू परम्परा से "मन्त्र दीक्षा" लेने के बाद ही" बगलोपासना" करें)

कोई टिप्पणी नहीं:

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.