ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

रविपुष्य योग और आपके लिये कौन सा होगा समृद्धि एवं लाभदायक शुभ मुहूर्त:...?

रविपुष्य योग और आपके लिये कौन सा होगा समृद्धि एवं लाभदायक शुभ मुहूर्त:...?
ज्योतिषचार्य पण्डित विनोद चौबे, (शांतिनगर, भिलाई) जी के अनुसार २३/१०/२०१६ रविवार को   धन तेरस से ६ दिन पूर्व २२तारीख को रात्रि २ बजकर ३८ मिनट से आरंभ हो रहा है, जो २३ तारीख को अर्धरात्रि २ बजकर २ मिनट तक रहेगा। ज्योतिष मे गुरू-पुष्य और रवि-पुष्य योगों को लक्ष्मी-प्राप्ति-योग के रूप में माना जाता है, आज के दिन सोना, चांदी, तथा अन्य धातुओं से निर्मित सामनों को खरीदकर उसे घर में पूजन अर्चन करने से स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही आगामी दीपावली पर्यन्त सुख, समृद्धि तथा व्यापार मे उन्नति होता है।
ज्योतिष की दृष्टि में रविपुष्य योग का महत्त्व :
मित्रों/ साथियों
इस वर्ष २०१६ में कुल रविपुष्य योग १४ हैं, परन्तु इनमें से१२ रवि-पुष्य बीत गया और १३हवां रविपुष्य योग है जो कार्तिक मांह के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को पड़ने वाला यह रविपुष्य विशेष लाभप्रद है। आज ही के दिन "त्रिपुष्कर योग" भी है, साथ ही बुध के साथ, सूर्य-नीच की राशि तुला पर हैं वहीं बारहवें भाव में स्वतंत्र कन्या राशि के गुरू के होने कारण "अखण्ड-समृद्धि योग" बना रहे हैं।
   चौघड़िया का मुहूर्त : दुर्ग-भिलाई के लिये:-   
(  ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, जी के द्वारा मुहूर्त का समय शोधन करके प्रस्तुत किया गया है)
प्रात: ९:१५ मिनट से १०:४० तक (लाभ ),
प्रात: १०:४०मिनट से दोपहर १२:०५ मिनट तक(अमृत) ,
दोपहर १:२९ से २:५४ तक( शुभ),
सायंकाल: ७:०९ मिनट से ८:३३ मिनट तक(लाभ),
रात्रि ८: ३३ से ९:५७ तक (अमृत)
               लग्न मुहूर्त:
प्रात: ८:१२ मिनट से १०:२९ मिनट तक(वृश्चिक लग्न, स्थिर)
इन्हें रहेगा विशेष लाभकारी :-
शिक्षण संस्थान एवं स्वास्थ्य से संबंधित कारोबरियों के लिये विशेष शुभदायक।   
           
                    लग्न मुहूर्त:
दोपहर २:२२ मिनट से ३:५३ तक (कुम्भ लग्न, स्थिर)
इन्हे रहेगा विशेष लाभकारी:-
लोहा,ठिकेदारो, सिविल खनिज तथा मेटल के कारोबारियों के लिये विशेष शुभकारक।       

                    लग्न मुहूर्त :
सायंकाल ६:५८ से ८:५४ तक (वृषभ लग्न, स्थिर)
इन्हें रहेगा विशेष लाभकारी :-
आटो, केमिकल तथा बिल्डरों के लिये विशेष शुभकारक।   
  
                 वर्जित समय:
राहुकाल - दिन में ४ बजकर १९ मिनट से ५ बजकर ४४ मिनट तक राहुकाल ।                
यह रविपुष्य योग में द्विस्व तथा चर लग्नों में खरीददारी से परहेज करें। 
    -ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, रावण संहिता विशेषज्ञ एवं संपादक, "ज्योतिष का सूर्य" राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, भिलाई, दुर्ग, मोबा. नं - ९८२७१९८८२८
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