ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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गुरुवार, 28 मार्च 2013

जो अब ''भाई'' से ''मुन्ना'' बन चुका है

































जो अब ''भाई'' से ''मुन्ना'' बन चुका है

सुधी पाठकों,
हिन्दू नववर्ष 2070 (वि.सं.) की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ, यह तो तयशुदा है कि पूरे विश्व में तकरीबन एक वर्ष में 70 बार नववर्ष मनाया जाता है परन्तु, डेढ़ अरब वर्ष पूर्व जो हमारे हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक नववर्ष को सर्वोत्कृष्ट एवं प्राचीनतम् तथा अन्य नववर्षों के एक निश्चित अवधि से काफी भिन्न है, साथ ही कुछ गणक-सिद्धांत चुनौतिपूर्ण है, जो आज भी अपनी सर्वोच्च सत्ता बनाये रक्खा है। आपके हाथों में जो यह अंक है इसमें सविशद् इस विषय पर चर्चा की गई है, मुझे विश्वास है कि आप सभी अवश्य अच्छा लगेगा। अब आईए चर्चा करते हैं आज के चल रहे राजनीतिक उठा-पटक की।
अभी सुनील नरगिस दत्त के पुत्र संजय दत्त के माफीनामा को लेकर चल रहा सियासी चहलकदमी कोई आम आदमी की बात नहीं करता केवल बाते हो रहीं हैं, एक चर्चित आदमी 'मुन्नाभाई' की, जो अब ''भाई'' से ''मुन्ना'' बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के सिलसिले में भगोड़े टाइगर मेनन के भाई अब्दुल्ला रज्जाक मेनन की फांसी की सजा को बरकरार रखकर उक्त षड्यंत्र के साजिशकर्ताओं से सख्ती से निपटने की पहल की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फांसी पाए 10 मुजरिमों की सजा को उम्रकैद में बदलने का फैसला भी किया है। इससे उन तत्त्वों को सबक मिल पाएगा, जो मुंबई ब्लास्ट की साजिश रचने के बाद अदालत से किसी तरह की रियायत की उम्मीद कर रहे थे। जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी रेखांकित किया है कि टाइगर मेनन की तरह याकूब की भूमिका भी मुख्य साजिशकर्ता की रही थी। याकूब और टाइगर मेनन ने न केवल अन्य साजिशकर्ताओं को ट्रेनिंग दी थी, बल्कि वे औरों की मदद से अपनी साजिश को अंजाम देते थे। 12 मार्च, 1993 को मुंबई में 12 जगह हुए धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 713 लोग घायल हुए थे। इससे एक बात तो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई न केवल दहल गई थी, उसे पाकिस्तान की शह पर चलाए जा रहे षड्यंत्र के एक खतरनाक घटनाक्रम के तौर पर देखा गया था। इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने के सबूत मिले थे।
आज तक ऐसे कई साक्ष्य सामने आ चुके हैं, जिनमें मुंबई बम धमाकों तथा आतंकवाद के अन्य मामलों में पाकिस्तान की संलिप्तता साबित होती रही, लेकिन फिर भी पाकिस्तान है कि मानता नहीं।
हैरानी की बात यह है कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी पाकिस्तान खुद पाकिस्तान को आतंकवाद का शिकार होने की दुहाई देता है। याकूब द्वारा मुंबई बम धमाकों का षड्यंत्र रचने, साजिशकर्ताओं को धन व ट्रेनिंग मुहैया करवाने जैसी विध्वंसक भूमिका को वह कैसे छिपा सकता है? अभी धमाकों में शामिल फरार आरोपियों में दाऊद इब्राहिम, अनीश इब्राहिम और टाइगर मेनन का पकड़ में आना शेष है, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। अगर पाकिस्तान आतंकवाद पर काबू पाने के प्रति वास्तव में गंभीर है तो उसे भारत के खिलाफ साजिश रचते रहने के बजाए उसे सहयोग देना होगा। अन्यथा उसका नापाक चेहरा अब तक कई बार बेनकाब हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह सच और जाहिर हो गया है। इसी मौके पर सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को एके-47 जैसे हथियार मिलने पर सीटीएसटी कोर्ट द्वारा 2007 में सुनाई गई छह साल की सजा को घटाकर पांच वर्ष कर एक बार फिर न्यायपालिका की सर्वोच्चता को रेखांकित किया है। हालांकि संजय दत्त के पास सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बैंच में पुनर्विचार याचिका दायर करने का विकल्प मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह पुन: साबित हुआ है कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं। -पंडित विनोद चौबे

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