ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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मंगलवार, 5 मार्च 2013

हाथ की लकीरों से जानें व्यवसाय की स्थिति

 हाथ की लकीरों से जानें व्यवसाय की स्थिति



-ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे, शांतिनगर, भिलाई
भारतीय शास्त्रों में प्रमुख रुप से ज्योतिष शास्त्र भी है ज्योतिषाम् चक्षु: कहा गया अर्थात वेदपुरुष का नेत्र कहा गया है, जिनके अलग-अलग विधा हैं जिनमें प्रमुख रुप से सिद्धांत एवं फलित बाद में भारतीय मनिषियों ने हस्तसञ्जीवनी (यह एक हस्त रेखा शास्त्र में प्रयुक्त किये जाने वाले ग्रंथों में से एक प्रमुख ग्रंथ है) के माध्यम से हस्तरेखा द्वारा जातक के भूत, भविष्य और वर्तमान को बताने वाला एक शास्त्र निरुपीत किया, वास्तवीक में यह भारतीय हस्त रेखा सामुद्रीक शास्त्र है, किन्तु बाद मे चलकर यूनानी विद्वान कीरो ने इसको विकसीत किया, जो वास्तवीक में गहन चिन्तनशील ज्योतिषी के द्वारा यदि भिन्न-भिन्न जानकारियाँ हस्तरेखा के माध्यम से ली जाय तो निश्चित ही सटीक भविष्यफल साबीत होगी।

आज कईयों के पास अपना जन्म तिथि, समय की सही जानकारी नहीं रहती और वे बार-बार किसी भी क्षेत्रों में निवेश कर व्यवसाय करते हैं परन्तु उन्हें असफलता ही हाथ लगती है, ऐसे में उनको किसी विज्ञ हस्तरेखा विशेषज्ञ के पास जाकर एक सुनिश्चित व्यावसायिक क्षेत्र का चयन कर लेना चाहिए। क्योंकि व्यवसाय और कारोबार करने वालों के लिए समय और भाग्य महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में व्यवसाय की स्थिति कैसी रहेगी, यह जानने के लिए जन्म कुंडली के अलावा हस्त रेखाओं का अध्ययन भी किया जाता है। कहते हैं कि हाथों की लकीरों का अध्ययन सही तरीके से हो जाए तो आने वाली कई समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। यदि हाथ में भाग्य रेखा सामान्य से अधिक मोटी होकर मस्तिष्क रेखा पर रुक जाए, जीवन रेखा सीधी हो, हृदय रेखा में द्वीप का चिन्ह हो और हाथ में एक से अधिक राहु रेखाएं हों तो जातक के व्यवसाय में उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। नौकरी पेशा जातक को नौकरी से •ाी हाथ धोना पड़ सकता है। इसके साथ-साथ यदि हाथ में विभिन्न ग्रह भी कमजोर या दोषपूर्ण हों तो जातक के व्यवसाय में घाटा होता है। मोटा पैसा अटकने की आशंका बढ़ जाती है। प्राय: आपने देखा होगा कि मनुष्य के हाथ में जन्मजात अथवा 25 वर्ष के बाद काला तल दिखने लगता है, जो स्थान के अनुसार शुभाशुभ फल देने में  अहम भूमिका का निर्वहन करता है।

काले तिल का मतलब हानिप्रद और लाभप्रद भी:


भाग्य रेखा के ऊपर काला तिल, धब्बा और द्वीप के अलावा जीवन रेखा पर स्पष्ट जाल व अंगुलियों में टेढ़ापन नजर आता हो तो व्यवसाय में धन और समय खर्च होने की तुलना में लाभ का प्रतिशत कम ही होता है। यदि जातक भागीदारी के रूप में कोई व्यवसाय कर रहा हो तो उसे आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ता है। यदि भाग्य रेखा मोटी होने के साथ-साथ टूट कर आगे बढ़ रही हो, शनि, मंगल और बुध ग्रह कमजोर या खराब हो, शनि क्षेत्र पर सीढ़ीनुमा रचना बनी हो या शनि पर्वत अत्यधिक कटा-फटा और जालयुक्त हो तब भी जातक को अपेक्षा के अनुरूप व्यवसाय में लाभ नहीं मिल पाता है। जातक का मन अस्थिर होने से वह बदल-बदल कर व्यवसाय की योजना बनाता रहता है। किन्तु ध्यान रहे कि यदि रेखाएं निर्दोष हैं तभी उन्नतिकारक मानी जाती हैं, अथवा उन्नति प्रदान करतीं हैं।

निर्दोष रेखाएं देती हैं उन्नति

व्यवसाय की स्थिति उस समय और भी खराब हो जाती है जब ह्रदय रेखा टूट कर मस्तिष्क रेखा में मिल जाए, भाग्य रेखा पतली और दोष पूर्ण हो, हाथ के मध्य में भाग्य रेखा, जीवन रेखा या ह्रदय रेखा पर काला तिल हो। ऐसी स्थिति में व्यवसाय में आर्थिक क्षति, मानसिक कष्ट और व्यवसाय में अनावश्यक रुकावटों का सामना करना पड़ता है। जिन हाथों में •ााग्य रेखा, जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा के साथ-साथ शनि, बुध एवं मंगल पर्वत निर्दोष हों तो वे जातक व्यवसाय में ला•ा और उन्नति कर पाते हैं।

हालॉकि मनुष्य के पाप और पुण्य कर्मों के आधार पर रेखाओं में समय-समय पर परिवर्तन देखने को मिलते रहते हैं, अत: हर छ: माह में सूक्ष्म हस्तरेखा का किसी विशेषज्ञ से वाचन कराते रहना चाहिए। साथ ही पुण्य कर्मों में संलिप्तता होनी चाहिए।

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