ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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शनिवार, 27 मई 2017

कल जैसा की मैने नवदंपती के कुण्डली में देखा व विचार किया तथा आजकल विवाह में 'मदिरा-डीजे-डांस' का दांपत्य पर कु-प्रभाव....... आप भी गौर से पढें......


कल जैसा की मैने नवदंपती के कुण्डली में देखा व विचार किया तथा आजकल विवाह में 'मदिरा-डीजे-डांस' का दांपत्य पर कु-प्रभाव....... आप भी गौर से पढें......



मित्रों, मैने कल ज्योतिष के अनुसार ज्योतिषीय समाधान हेतु वैसे तो कई समस्याएं लेकर लोग आते हैं जिसमे कार्य,व्यापार, रोग, विदेश यात्रा, शिक्षा, उद्योगों से जुड़ी समस्याएं प्रमुख होती हैं, किन्तु इनमे दाम्पत्य सुख विवाह से संबंधित लोग अधिक आते हैं..या तो उनके पति-पत्नि के बीच तलाक हो जाया रहता है, या परस्पर में इतनी कड़वाहट आ गई रहती है जिसकी वजह से ना केवल जीवन शैली तबाह हो जाती है बल्कि भावी संतानोत्पत्ति अथवा संसार में आ चुके संतानों का देखभाल लालन पालन...बड़ी समस्या बन जाती है..पति-पत्नि में इतनी तल्खी बढ जाती है एक दूसरे के जान के प्यासे हो जाते है, और मामला न्यायालय .तक पहुंच जाता है..ज्योतिष के मुताबिक इसका कारण भी स्पष्ट है ..आईये इसके तह में चलते हैं....

आपने सुना होगा की मांगलिक योग तो वैदिक ज्योतिष में मंगल को लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में दोष पूर्ण माना जाता है.इन भावो में उपस्थित मंगल वैवाहिक जीवन के लिए अनिष्टकारक कहा गया है.जन्म कुण्डली में इन पांचों भावों में मंगल के साथ जितने क्रूर ग्रह बैठे हों मंगल उतना ही दोषपूर्ण होता है जैसे दो क्रूर होने पर दोगुना, चार हों तो चार चार गुणा.मंगल का पाप प्रभाव अलग अलग तरीके से पांचों भाव में दृष्टिगत होता है!
कल एक 27/5/2017 की दरमियानी शाम को पति-पत्नि का मामला मेरे कार्यालय बतौर ज्योतिषिय समाधान हेतु पहुंचा...मैंने दोनों नवदम्पती के जन्मपत्री का उपरोक्तानुसार ग्रहों की स्थिति का सम्यक आकलन कर 
कुंडली में कुछ विशेष ग्रह दोषों के प्रभाव/ कुप्रभाव से वैवाहीक जीवन पर बुरा या साकारात्मक असर पड़ता ही है। ऐसे में उन ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को रोकने हेतु उचित ज्योतिषीय उपचार के साथ ही मां पार्वती को प्रतिदिन सिंदूर अर्पित करना चाहिए। सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। जो भी व्यक्ति नियमित रूप से देवी मां की पूजा करता है उसके जीवन में कभी भी पारिवारिक क्लेश, झगड़े, मानसिक तनाव की स्थिति निर्मित नहीं होती है।
मैने उस नवदंपती को समझा बुझाकर भेज देना चाहिये...हमारे शांतिनगर, स़ड़क -26, भिलाई स्थित कार्यालय में नवदंपती का आगमन बेहद कड़वाहट भरा था....पर समय समय पर कई उनके दोषपूर्ण गोचरीय एवं विंशोत्तरी दशा पर केन्द्रीत कई उपायों को सुझाया परन्तु...उसका परिपालन मजबूती से होना चाहिये...


विचारणीय एक डिफरेन्ट एंगल एक यह भी है.....

यह भी विचित्र सी बात है कि जिन मंत्रो के सहारे दो वक्तियो को आजीवन साथ निभाने के लिए बांधने वाले मंत्र जब आवेशित नहीं होंगे तो उन मंत्रो और उस विवाह का मतलब ही क्या है। आज तो विवाह समारोह बस कुछ मौज मस्ती और नाच गाने के साथ डिनर के कार्यक्रम ही के रूप में रह गए है। इनमे विवाह के कार्य हो ही कहा रहे है। फिर जब तलाक होने लगते है तो हो हल्ला मचने लगता है। अरे जब मंत्र आवेशित ना हुए , विवाह के मंत्र बैंड और DJ के साथ मदिरा के बोतलों में बह गए उस कथित विवाह से क्या अपेक्षा है तुम्हारी. क्या साक्षात लक्ष्मी जी जाएंगी आपके घर में?
यह यक्ष प्रश्न है..जरा विचार करें और सभी आठ प्रकार के विवाहों में सर्वोत्तम विवाह 'ब्रह्म विवाह' है ! इस विधी से विवाह संपन्न होने वाले नवदंपतियों के जीवन में सुख, समृद्धि और आपसी प्रेम अधिक प्रगाढ देखा गया है, बजाय अन्य सातों प्रकार के विवाह के! मित्रों यदि ब्रह्म विवाह का सौ फिसदी लाभ लेना चाहते हैं तो आजकल विवाहों मे हो रहे आसुरी कार्य जैसे शराब, डीजे की कानफोड़ु ध्वनि प्रदूषण एवं देर रात बारात पहुंचना और जयमाल जैसे वैवाहिक कार्यक्रमों में अधिक समय न लगाकर मण्डप में किये जाने वाले वैदिक विधान पर अधिक समय व तन्मयता से किया जाना चाहिये! इससे ना केवल , संतति एवं सुखी दांपत्य का लाभ मिलेगा वरन् समाज हो रहे पारिवारीक वैमनस्यता पर लगाम भी लगेगा..क्योंकि दो परिवार के इस प्रथम मिलन के वक्त एक दुसरे को समझने व जानने तथा परखने का लाभ भी मिलता है..इससे प्रेम में प्रगाढता होती, सामाजिक मर्यादा बढती है!


-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक- 'ज्योतिष का सूर्य' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, सड़क-२६, शांतिनगर, भिलाई, दूरभाष नं.  ९८२७१९८८२८


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