ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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बुधवार, 20 अप्रैल 2016

राष्ट्रवादी है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ...ऐसे में संघ मुक्त करने का दिवा स्वप्न देखना नीतीश जी का खयाली पुलाव...........

राष्ट्रवादी है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ..

.ऐसे में संघ मुक्त करने का दिवा स्वप्न देखना नीतीश जी का खयाली पुलाव...........

इस अंक में ''राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ'' को आरोपित करने और एक प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा संघ मुक्त का नारा देने वालों के लिए प्रेरणा का काम करेगी क्योंकि ''राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ'' ना केवल राष्ट्रवादी संस्था है वरन बगैर ढ़िंढ़ोरा पीटे और बगैर मीडिया में सुर्खियां बटोरे ....नित्य निरंतर समाज सेवा में लगा रहता है...शायद ही इतनी बड़ी संस्था जो वनवासियों, दबे कुचले अस्पृश्य जनों के बीच जाकर उनकी सेवा तथा उन्हें शिक्षित करने के साथ ही उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने का अथक प्रयास यह संस्था कर रही है इसके अलावा भारत के किसी भी कोने में किसी प्रकार की दैवीय आपदा आती है तो सबसे पहले  इस संघ के लोग वहां जाकर निःशुल्क सेवा करते हैं और दिलचस्प बात तो यह है कि इसी संघ के समानान्तर कांग्रेस में भी एक संस्था है जिसका नाम ''सेवा दल'' है लेकिन आजकल के कांग्रेस के कुछ नेता महात्मा गांधी जी द्वारा प्रायोजित इस संस्था पर कोई ध्यान नहीं देते ....और थोड़ा बहुत ध्यान भी देतें हैं तो चुनाव के वक्त, बल्कि इक्कीसवीं सदी का कांग्रेस मात्र सत्ता पाने के लिए भारत में केवल धर्म और जाति तथा संप्रदाय की राजनीति करती रही धिरे-धिरे ''सेवादल'' लुप्त प्राय हो सा गया। आरएसएस को भाजपा विरोधी यहां के नेताओं के द्वारा जबरन इतना विवादास्पद बना दिया गया कि  भारत में ही नहीं वरन पूरे विश्व में आरएसएस की सेवा कार्यों के बजाय  नेताओं द्वारा षडयंत्रकारी बदजुबानीयत तथाकथित आरोपों से चर्चित है, किन्तु आजतक इस संस्था पर लगे सभी आरोप कपोल कल्पित ही सिद्ध हुए.....संघ मुक्त भारत के बजाय इसी संस्था के समानान्तर जमीन पर सेवा-कार्य करने वालों एक विशाल ''संगठन'' ''संघ'' बनाना चाहिए...जो आम लोगों की सेवा, सामाजिक उत्थान तथा.. जो लोग भारतीय संवैधानिकता पर प्रश्न खड़े करते हैं ऐसे संगठनों  के लोगों व समर्थकों को मुख्यधारा में लाने का प्रयत्न करना चाहिए..ना कि जो ऐसा कार्य करने वाली देश की इतनी बड़ी संस्था है उससे देश को मुक्त कराने अथवा करने की बात करनी चाहिए....
- पण्डित विनोद चौबे, संपादक- ''ज्योतिष का सूर्य''

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