ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद चौबे

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शुक्रवार, 15 जून 2012

लिङ्गांष्टकम्

मित्रों शुभ सन्ध्या, आप सभी के लिए.....आप सभी प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करें आप सभी की मनोकामनाएं भगवान शिव पूर्ण करेंगे।

!!अथ लिङ्गांष्टकम्!!


ब्रह्ममुरारि-सुरार्चितलिङ्गं निर्मल-भासित-शोभिन-लिङ्गम्।
जन्मज-दु:खविनाशक- लिङ्गतत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्।।1।।

देवमुनि-प्रवरार्चित लिङ्गं कामदडं करुणाकरलिङ्गम्।
रावणदर्प-विनाशन लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्।।2।।

सर्वसुगन्धि- सुलेपितलिङ्गं बुद्धि-विवर्धन-कारणलिङ्गम्।
सिद्ध-सुरा-सुर-वन्दितलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्।।3।।

कनक-महामणि भूषितलिङ्गं फणिपति-वेष्टित-शोभितलिङ्गं।
दक्षसुयज्ञ-विनाशकलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्।।4।।

कुमकुम-चंदन लेपितलिङ्गं पंकजजहार-सुशोभित लिङ्गम्।
सञ्चित-पाप विनाशन लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्।।5।।

देवगणर्चित-सेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिर्भिरेव च लिङ्गम्।
दिनकरकोटि-प्रभाकर लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्।।6।।

अष्टदलोपरि वेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भव कारणलिङ्गम्।
अष्टदरिद्र-विनाशितलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्।।7।।

सुरगुरु-सुरवर पूजतलिङ्गं सुरवनपुष्प-सदार्चितलिङ्गम््।।
परात्परं परमात्मक लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्।।8।।

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते।।9।।

इति श्रीलिङ्गाष्टकम् स्त्रोत्रं समाप्तम्।।



निवेदकः >>>>>>>>>>>>>>>>ज्योतिषाचार्य पं.विनोद चौबे

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