चौबेजी कहिन:- 'हर हर महादेव' के उद्घोष के साथ आज से सावन माह आरंभ। आईए सावन में पड़ने वाली विशेष तिथियां और रुद्राभिषेक हेतु अलग-अलग द्रव्यों के लाभ के बारे में कुछ जानकारियां प्रस्तुत करता हूं 🙏
28/7/2018
आज से सावन का पवित्र माह आरंभ हो गया इस मांह को 'पावस माह' भी कहा जाता है। पौराणिक संदर्भों में वर्णित कथाओं के मुताबिक सनत्कुमारों का प्रसंग मिलता है वहीं मां पार्वती के 'शिव' जी को पति रुप में प्राप्त करने हेतु किए गए कठोर तप इसी सावन माह में किया गया। चूंकि मैं भिलाई के शांतिनगर में निवासरत हूं छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में जाना होता है यहां के लोग पूरे सावन में बाबा बूढादेव की पूजा अर्चना की जाती है, यत्र-तत्र-सर्वत्र शिव आराधना हर हर महादेव के उद्घोष के साथ की जाती है। आईए आपको सावन में पड़ने वाले कुछ विशेष तिथियों और रुद्राभिषेक द्रव्य और उसके लाभ के बारे में आज के "चौबेजी कहिन'' में चर्चा करेंगे 😊🌹
28 जुलाई 2018 दिन शनिवार को श्रवण नक्षत्र से आरंभ होकर 26 अगस्त 2018 रविवार तक तीस दिन का सावन माह रहेगा। इस सावन के महीने में चार सोमवार होंगे जो निम्न तिथियां हैं:-
1- 30/7/2018 प्रथम सोमवार व्रत
2- 6/8/2018 द्वितीय सोमवार व्रत
3- 13/8/2018 तृतीय सोमवार व्रत
4- 20/8/2018 चतुर्थ सोमवार व्रत
इसके अलावा सावन में वह विशेष तिथियां जो देवाधिदेव महादेव के आराधना के लिए उपयुक्त हैं:-
2/8/2018 गुरुवार को मधुश्रावणी व्रत (मिथिला राज्य) एवं श्रावण कृष्ण पक्ष पंचमी व्रत
6/8/2018 सोमवार को कामदा एकादशी व्रत
9/8/2018 गुरुवार को मास शिवरात्रि एवं प्रदोष व्रत
11/8/2018 शनिवार को हरियाली अमावस्या
15/8/2018 बुधवार को हस्त नक्षत्र में नागपंचमी एवं भारतीय स्वतंत्रता दिवस 71 तम:
17/8/2018 शुक्रवार को श्रावण शुक्ला सप्तमी को कुलदेवता पूजन एवं गोस्वामी तुलसीदास जयंती
22/8/2018 बुधवार को पुत्रदा एकादशी व्रत
23/8/2018 गुरुवार को ् प्रदोष व्रत
25/8/2018 शनिवार को ऋक्उपाकर्म
26/8/2018 रविवार को श्रावणी उपाकर्म, संस्कृत दिवस एवं रक्षाबंधन
किस पदार्थ से रुद्राभिषेक करने से क्या क्या लाभ मिलता है ?
शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा।
श्लोक :-
जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै
दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै।
मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा।
पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।।
बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना।
जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।।
घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्।
तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः।
प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम।
केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः।
शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्।
श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!!
सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह!
पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधिः सर्पिषा तथा।।
जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।
पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा।
महलिंगाभिषेकेन सुप्रीतः शंकरो मुदा।
कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम्।
अर्थात्
1. जल से रुद्राभिषेक करने पर वृष्टि होती है।
2. कुशा जल से अभिषेक करने पर रोग, दुःख से छुटकारा मिलती है।
3. दही से अभिषेक करने पर पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
4. गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी प्राप्ति
5. मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर धन वृद्धि के लिए।
6. तीर्थ जल से अभिषेकक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
7. इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है ।
8. गाय के दूग्ध से अभिषेककरने से पुत्र प्राप्ति होती है।
9. दही से अभिषेक करने से प्रमेह रोग की शान्ति त प्राप्ति होती है।
10. घी से अभिषेक करने से वंश विस्तार होती है।
11. सरसों के तेल से अभिषेक करने से रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
12. शुद्ध शहद रुद्राभिषेक करने से पाप नष्ट होता है।
- आचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक- "ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका शांतिनगर भिलाई दुर्ग छत्तीसगढ़ मोबाइल नं 09827198828
(कृपया इस लेख को कोई कॉपी-पेस्ट ना करें ऐसा करते पाये जाने पर ' ज्योतिष का सूर्य' वैधानिक कार्यवाही करने को बाध्य होगा)
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