'द्वितीयं ब्रह्मचारिणीम्' गुप्त नवरात्री के दूसरे दिन की देवी स्तुति :-
रक्ष त्वं मुण्ड-धारी गिरि-गुह-विवरे निर्झरे पर्वते वा।
संग्रामे शत्रु-मध्ये विश विषम-विषे संकटे कुत्सिते वा।।
व्याघ्रे चौरे च सर्पेऽप्युदधि-भुवि-तले वह्नि-मध्ये च दुर्गे।
रक्षेत् सा दिव्य-मूर्तिः प्रदहतु दुरितं मुण्ड-चण्डे प्रचण्डे।।
!! मंगलमयी सुप्रभात !! मंगलमस्तु !! शुभमस्तु !! आज का दिन शुभ हो !!
मां आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करें
- आचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक- 'ज्योतिष का सूर्य' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका 9827198828, भिलाई
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