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बुधवार, 13 जुलाई 2011

सावन के महीनेमें पांच शुक्रवार, पांच शनिवार और पांच रविवार

 सावन के महीनेमें   पांच शुक्रवार, पांच शनिवार और पांच रविवार
तीस साल बाद सावन में पड़ रहे पांच शुक्रवार, शनिवार और रविवार यानी ट्रिपल फाइव राजनीतिक दलों में उठापटक कर सकता है। यह योग सत्ता में परिवर्तन और भ्रष्टाचारियों का पर्दाफाश भी कर सकता है। इसके अलावा कृषि को फायदा और मानव जीवन में खुशहाली का भी योग बन रहा है। कर्क की संक्रांति और सावन का महीना एक ही दिन शुरू होने की वजह से होगा। 

सावन के महीने और कर्क की संक्रांति की शुरुआत एक साथ हो रही है। मेष लग्न के उदय में कर्क की संक्रांति लग रही है। चंद्रमा अपने ही नक्षत्र श्रवण में और शनि मकर राशि में रहेगा। यह स्थिति 14 जनवरी 2012 तक बनी रहेगी, जब तक सूर्य का उत्तरायण नहीं हो जाता।

भारतीय जन्मपत्री के हिसाब से 16 जुलाई 2011 से 14 जनवरी 2012 तक ऐसे योग बनेंगे, जिनमें पूरे देश में आमूलचूल परिवर्तन होंगे। ये परिवर्तन सीधे जनमानस को प्रभावित करेंगे।

क्योंकि शनि और बृहस्पति छठे व आठवें भाव में स्थित हैं, इसलिए सत्तारूढ़ दल, सरकारी मिशनरी और लोगों की कथनी करनी में भारी अंतर देखने को मिलेगा।

15 नवंबर 2011 में शनि उच्च होकर तुला राशि में प्रवेश करेगा और बृहस्पति से पूर्णदृष्टित होगा। यह समय ऐसा होगा जब शनि का विशेष प्रभाव न्यायपालिका पर पड़ेगा। 15 नवंबर 2011 के बाद शनि तुला राशि में प्रवेश करेगा तो पूरे विश्व को कर्म की तुलिका में तौलकर शीशे की तरह साफ कर देगा। ऐसा योग तीस साल बाद पड़ता है।

किसानों को होगा लाभ
जून और जुलाई हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ का महीना कहलाता है। 16 जून से 15 जुलाई तक पांच गुरुवार और पांच शुक्रवार प़ड़ रहे हैं। जब पांच गुरुवार पड़ते हैं तो पश्चिमी देशों में उत्पात, युद्ध, परस्पर विद्रोह और वैमन्सय पैदा होता है।

शुक्र का फल धन-धान्य देने वाला और कृषक वर्ग की खुशहाली वाला होता है। इसके अलावा चंद्रमा और सूर्य की परस्पर दृष्टि सौर्यमंडल में भारी परिवर्तन का योग बना सकती है।

प्रकृति में परिवर्तन, वर्षा का विशेष योग है। चूंकि यह संक्रांति चंद्रमंडल में पड़ रही है, इसलिए कृषि योग्य वर्षा होगी। बाढ़, तूफान आदि नहीं आएंगे।

कब शुरू हो रही कर्क की संक्रांति
कर्क की संक्रांति और सावन का महीना 16 जुलाई 2011 रात 3.21 मिनट से 17 अगस्त 2011 की सुबह 11.48 तक रहेगा। मेष लग्न के उदय में कर्क की संक्रांति लग रही है। ऐसे में शंकर भगवान की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

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